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बुनियादी सुविधाओं की मांग, चार जगहों पर ग्रामीणों ने किया वोटिंग का बहिष्कार, सीएम की अपील भी बेअसर

Mon, 13 May 2019 12:45 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरवाला/उचाना/अलेवा/पंचकूला (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरवाला/उचाना/अलेवा/पंचकूला (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Mon, 13 May 2019 12:45 AM IST
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Lok sabha elections 2019, voting boycott at three places in Haryana
सरसाना में ग्रामीणों ने किया मतदान का बहिष्कार

बरवाला के गांव सरसाना के ग्रामीणों ने रविवार लोकसभा चुनावों का बहिष्कार किया। यहां के ग्रामीण गांव को नई बनी खेड़ी जालब उप तहसील में जोड़े जाने से नाराज हैं। इस दौरान ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी भड़ास निकाली। शाम छह बजे समाप्त हुए मतदान के समय तक कोई भी अधिकारी ग्रामीणों से बात करने नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है। 

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बाद में कुल 1339 मतदाताओं में से केवल 12 ने ही अपने वोट का प्रयोग किया। ग्रामीणों ने एलान किया है कि जल्द ही वे पंचायत कर आगामी आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। बता दें कि गांव सौथा, भाडा, पनिहारी व सरसाना को नई बनीं उप तहसील खेड़ी जालब से जोड़ दिया गया है। इससे पहले ये गांव बरवाला उपमंडल के अंतर्गत आते थे। 
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ग्रामीणों ने इन गांवों को फिर से बरवाला तहसील में जोड़ने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री व वित्तमंत्री तक को ज्ञापन सौंपे हैं। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद सरसाना के ग्रामीणों ने एलान किया था कि वे लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे, लेकिन ग्रामीणों के एलान के बाद किसी अधिकारी या सरकार के किसी नुमाइंदे ने ग्रामीणों से कोई बात नहीं की। हालांकि गांव सरसाना के ग्रामीणों ने ही चुनाव का बहिष्कार किया वहीं अन्य गांवों में चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई है।

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ग्रामीणों की ये हैं मुख्य मांगें

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गांव बालावास में मतदान का बहिष्कार

1. गांव सरसाना को बरवाला तहसील में फिर से जोड़ा जाए। 
2. सरसाना का स्वास्थ्य केंद्र डाटा के स्थान पर बरवाला होना चाहिए। 
3. गांव में बस की सुविधा नहीं हैं, रूट पर सरकारी बस चलाई जाए। 
4. वाटर सप्लाई की पाइपलाइन को बड़ी नहर से जोड़ा जाए। 
5. खराब पशु अस्पताल की हालत सुधारी जाए जैसी मांगों को लेकर ग्रामीण आवाज उठा रहे हैं। 

एक बूथ पर दो, दूसरे पर 10 वोट डाले गए 
गांव सरसाना में ग्रामीणों द्वारा चुनाव का बहिष्कार किए जाने के चलते गांव के सरकारी स्कूल में बने बूथ संख्या 184 में कुल 2 मतदाताओं ने वोट डाले, जिसमें से एक वोट कर्मचारी ने डाला। बूथ संख्या 183 पर 10 वोट पड़े। बूथ संख्या 184 में कुल 664 वोट हैं, जिनमें 369 पुरुष व 295 महिला मतदाता हैं। 183 नंबर बूथ में कुल 675 वोट हैं, जिनमें 370 पुरुष व 305 महिला मतदाता हैं। कुल 1339 मतदाताओं में से केवल 12 ने ही वोट डाला।

विधायक अनूप धानक पहुंचे थे ग्रामीणों से बात करने
सुबह मतदान प्रक्रिया जैसे ही शुरू हुई तो ग्रामीण मतदान केंद्र के बाहर एकत्रित हो गए। हालांकि यहां राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी के बूथ भी केंद्र के बाहर स्थापित किए हुए थे। इसके बावजूद ग्रामीण मतदान केंद्र के बाहर दरी बिछाकर बैठ गए व शाम तक विरोध प्रदर्शन करते रहे।

ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए उकलाना के विधायक अनूप धानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, उन्होंने ग्रामीणों को मतदान करने के लिए मनाने का प्रयास किया व आश्वासन दिया कि वे इस बारे जल्द ही उनको साथ लेकर अधिकारियों से बात करेंगे, लेकिन ग्रामीण विधायक की बात पर सहमत नहीं हुए।

खटकड़ के बूथ नंबर 209 पर इंतजार करते रहे अधिकारी नहीं आए मतदाता

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खटकड़ गांव में मतदान करने नहीं पहुंचे लोग

खटकड़ गांव के रामदासिया मोहल्ले में पिछले चार साल से पानी की सप्लाई नहीं मिलने से नाराज लोगों ने एक बूथ पर मतदान का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया। हालांकि प्रशासन ने लोगों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। गांव की रामदासिया चौपाल में बने बूथ नंबर 209 के मतदाताओं ने कहा कि लोकसभा ही नहीं बल्कि विधानसभा चुनाव तक अगर उनके मोहल्ले में पीने के पानी की सप्लाई सुचारु नहीं हुई तो विस चुनाव में भी मतदान नहीं करेंगे।

लोगों ने कहा कि पीने के पानी की समस्या को लेकर वे अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक को शिकायत कर चुके हैं। अधिकारियों से मिलने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। चार साल से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। वहीं डीसी डॉ. आदित्य दहिया के अनुसार लोगों की मांग एक नए प्रोजेक्ट की है।

इसका आश्वासन दिया गया, लेकिन लोग नहीं माने। प्रशासन को सूचना मिली है कि चुनाव के बहिष्कार में कुछ राजनीतिक तत्वों ने लोगों को भड़काया है। इसकी जांच करवाई जाएगी। लोगों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा।

पीने के पानी की सप्लाई नहीं होने से मतदान नहीं करने की जानकारी जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को मिली तो वहां पर मौजूद खुफिया विभाग के कर्मचारी पुरुषोत्तम शर्मा के फोन पर वहां मौजूद महेंद्र से बात करवाई। सीएम द्वारा ग्रामीणों को मतदान का बहिष्कार नहीं करने के लिए कहा गया। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि चुनाव के बाद पानी की समस्या का समाधान करवा दिया जाएगा।

बूथ पर हैं 858 मतदाता 

खटकड़ गांव के बूथ नंबर 209 पर 858 मतदाता हैं। इसमें से 462 पुरुष और 396 महिलाएं शामिल हैं। मतदान का बहिष्कार करने के बाद कोई मतदान नहीं कर सके, इसको लेकर बूथ के बाहर भी ग्रामीण मौजूद रहे।

मतदान को लेकर सभी तैयारी थी पूरी
पोलिंग ऑफिसर सुभाष चंद्र ने कहा कि मतदान को लेकर सभी तैयारियां पूरी थीं, लेकिन कोई भी मतदाता मतदान करने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों से पता चला कि पीने के पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने मतदान न करने का फैसला लिया है।   

 सीएम की अपील भी बेअसर, गुमथला गांव में भी वोटिंग का बहिष्कार 
पंचकूला नगर निगम में आने वाले गुमथला गांव में लोगों ने लोकसभा चुनाव में एक भी वोट नहीं डाला। कारण रहा गांववासियों को मूलभूत सुविधाओं का न मिलना। जिस वजह से गांव में पूर्ण रूप से लोकसभा चुनाव का बहिष्कार ही रहा। प्रशासन की ओर से गांव में लोकसभा इलेक्शन के लिए एक बूथ भी बनाया गया था। लेकिन सौ फीसदी लोगों ने इलेक्शन का बॉयकाट रखा। 

लोगों का कहना था कि बिजली, पानी और सड़क की व्यवस्था जब तक इस गांव में नहीं आ जाती हम सभी इलेक्शन में वोटिंग नहीं करेंगे। इसकी जानकारी मिलने के बाद प्रशासन के अधिकारी और कई दलों के नेता लोगों को मनाने पहुंचे। इसके बाद भी लोग अपनी जिद पर अड़े रहे।

 गुमथला गांव में 40 घर हैं और 140 वोटर हैं। सभी लोगों का कहना था कि इस गांव में युवकों की शादी करने भी कोई नहीं आता है। इस बीच नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी जनरैल सिंह ने लोगों से पहुंचकर अपील की कि वो वोट दें।

गुमथला गांव में एक स्कूल है। वह भी बंद कर दिया गया है। टीचर नहीं होने के कारण लोगों ने अपने बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया है। इसके बाद भी मुख्यमंत्री की ओर से अपील की गई है। इसके बाद भी लोगों ने शांतिपूर्वक विरोध कर मतदान नहीं किया। 

पेयजल किल्लत : दातोली में मतदान का बहिष्कार

चरखी दादरी जिले के गांव दातोली के मतदाताओं ने रविवार को लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया। ग्रामीणों का कहना है कि वे 35 सालों से पेयजल की किल्लत झेल रहे हैं लेकिन उनकी आज तक किसी ने नहीं सुनी। इस गांव में 987 मतदाता हैं। बाद में सूचना मिलने पर सीटीएम वीरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया लेकिन नहीं माने। 

गांव में बनाए गए थे दो बूथ
मतदान केंद्र के प्रजाइडिंग ऑफिसर सतीश कुमार ने बताया कि गांव में दो बूथ बनाए गए थे। एक बूथ पर 650 व दूसरे बूथ पर 337 वोट हैं लेकिन सुबह सात से शाम छह बजे मतदान खत्म होने तक एक भी मतदाता ने मतदान नहीं किया। वे छह बजे तक मतदाताओं का इंतजार करते रहे।

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