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#VoteKaro: सिख राजनीति की पहली सीढ़ी है एसजीपीसी का सदस्य होना, कई अध्यक्षों ने निभाई भूमिका
Thu, 18 Apr 2019 01:15 PM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 18 Apr 2019 01:15 PM IST
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एसजीपीसी प्रधान बंडूगर
- फोटो : फाइल फोटो
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पंजाब की सिख राजनीति में शिरोमणि अकाली दल के जमीनी आधार को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्षों मास्टर तारा सिंह, जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी, जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा व बीबी जागीर कौर सहित कई नेताओं ने अकाली दल के पंथक वोट बैंक को न केवल मजबूत किया, बल्कि विरोधी पार्टी कांग्रेस को पंथ विरोधी पेश करके पंजाब की सत्ता भी हासिल की।
प्रदेश में लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव एसजीपीसी की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। एसजीपीसी के सभी सदस्य शिअद के साथ दूसरी व तीसरी कतार के नेता के रूप में अपने-अपने हलकों में काम करते हैं। जब चुनावी मौसम आता है तो सभी एसजीपीसी मेंबर अकाली दल का न केवल प्रचार करते हैं, बल्कि पंथक वोटरों को अकाली दल के साथ जोड़े रखने के लिए धर्म की आड़ भी लेते हैं। चुनाव में पंथक वोट शिअद के साथ जोड़े रखना एसजीपीसी सदस्यों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
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प्रदेश में लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव एसजीपीसी की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। एसजीपीसी के सभी सदस्य शिअद के साथ दूसरी व तीसरी कतार के नेता के रूप में अपने-अपने हलकों में काम करते हैं। जब चुनावी मौसम आता है तो सभी एसजीपीसी मेंबर अकाली दल का न केवल प्रचार करते हैं, बल्कि पंथक वोटरों को अकाली दल के साथ जोड़े रखने के लिए धर्म की आड़ भी लेते हैं। चुनाव में पंथक वोट शिअद के साथ जोड़े रखना एसजीपीसी सदस्यों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
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बादल की जिताने में अहम भूमिका निभाई
पंथक राजनीति की पहली सीढ़ी पर पांव रखने के लिए एसजीपीसी का सदस्य होना महत्वपूर्ण माना जाता है। एसजीपीसी सदस्य की पंथक राजनीति में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है की जब बादल-टोहरा के बीच विवाद हुआ था तो बादल ने इन सदस्यों को अपने साथ बनाए रखने के लिए उन्हें गाड़ियों में लाल बत्ती व हूटर लगाने की अनुमति दी थी।
एसजीपीसी मेंबर्स की सबसे पहली जिम्मेदारी अपने-अपने हलकों में सिख धर्म का प्रचार-प्रसार करना है। इसके बावजूद एसजीपीसी मेंबर पंथक राजनीति में आने के लिए अकाली दल के लिए प्रचार भी करते हैं। वह भीड़ जुटाने का काम भी करते हैं। शिअद की कई रैलियों में एसजीपीसी द्वारा लंगर की व्यवस्था करने के आरोप भी लगते रहे हैं।
जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा एसजीपीसी के ऐसे पंथ प्रमाणित नेता थे, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को 1997 के विधानसभा चुनाव में प्रचार कर सत्ता तक पहुंचाया। 1999 में दोनों नेताओं के बीच विवाद होने के कारण जत्थेदार टोहरा को अकाली दल व एसजीपीसी के अध्यक्ष पद से निकाला गया, तब टोहरा ने बादल के खिलाफ नए अकाली दल का गठन कर लिया।
फिर 2002 के विधानसभा चुनाव में अपने उमीदवार खड़े करके बादल को सत्ता से वंचित करने में भूमिका निभाई थी। सत्ता में हटने के बाद बादल ने टोहरा के साथ समझौता किया था। यही कारण था की 2007 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल एकजुट था, तब बादल प्रदेश के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।
एसजीपीसी मेंबर्स की सबसे पहली जिम्मेदारी अपने-अपने हलकों में सिख धर्म का प्रचार-प्रसार करना है। इसके बावजूद एसजीपीसी मेंबर पंथक राजनीति में आने के लिए अकाली दल के लिए प्रचार भी करते हैं। वह भीड़ जुटाने का काम भी करते हैं। शिअद की कई रैलियों में एसजीपीसी द्वारा लंगर की व्यवस्था करने के आरोप भी लगते रहे हैं।
जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा एसजीपीसी के ऐसे पंथ प्रमाणित नेता थे, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को 1997 के विधानसभा चुनाव में प्रचार कर सत्ता तक पहुंचाया। 1999 में दोनों नेताओं के बीच विवाद होने के कारण जत्थेदार टोहरा को अकाली दल व एसजीपीसी के अध्यक्ष पद से निकाला गया, तब टोहरा ने बादल के खिलाफ नए अकाली दल का गठन कर लिया।
फिर 2002 के विधानसभा चुनाव में अपने उमीदवार खड़े करके बादल को सत्ता से वंचित करने में भूमिका निभाई थी। सत्ता में हटने के बाद बादल ने टोहरा के साथ समझौता किया था। यही कारण था की 2007 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल एकजुट था, तब बादल प्रदेश के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।
एसजीपीसी सदस्य बीबी जागीर कौर का कर रहे प्रचार
एसजीपीसी के पहली महिला अध्यक्ष बीबी जागीर कौर इस समय खडूर साहिब संसदीय हलके से चुनाव लड़ रहीं हैं। एसजीपीसी सदस्य उनके प्रचार में जुटे हैं, जो उनके प्रचार में नुक्कड़ बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा व जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी ने इमरजेंसी के बाद पटियाला व लुधियाना संसदीय हलकों में चुनाव जीता था। इसके बाद दोनों राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
टोहरा के बाद पंथ प्रमाणित अध्यक्ष की रही कमी
जत्थेदार गुरचरण सिंह की मौत के बाद एसजीपीसी का कोई भी ऐसा प्रभावशाली अध्यक्ष नहीं हुआ, जो अकाली दल के प्रधान चाहे व प्रकाश सिंह बादल हो या सुखबीर बादल, उनके साथ राजनीतिक रैलियों में प्रचार करके प्रभावशाली भूमिका निभा सके। बादल ने बीबी जागीर कौर को 2002 के विधानसभा चुनाव प्रचार में जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन सफल नहीं हुए। बीते 15 वर्षों में बादल का एसजीपीसी पर पूरा कंट्रोल है, यही कारण है की एसजीपीसी प्रधान की पंथक छवि दब गई है। जिसका नुकसान बादल को बीते विधानसभा चुनाव में हो चुका है।
टोहरा के बाद पंथ प्रमाणित अध्यक्ष की रही कमी
जत्थेदार गुरचरण सिंह की मौत के बाद एसजीपीसी का कोई भी ऐसा प्रभावशाली अध्यक्ष नहीं हुआ, जो अकाली दल के प्रधान चाहे व प्रकाश सिंह बादल हो या सुखबीर बादल, उनके साथ राजनीतिक रैलियों में प्रचार करके प्रभावशाली भूमिका निभा सके। बादल ने बीबी जागीर कौर को 2002 के विधानसभा चुनाव प्रचार में जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन सफल नहीं हुए। बीते 15 वर्षों में बादल का एसजीपीसी पर पूरा कंट्रोल है, यही कारण है की एसजीपीसी प्रधान की पंथक छवि दब गई है। जिसका नुकसान बादल को बीते विधानसभा चुनाव में हो चुका है।