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इलेक्शन गेड़ी: सरकार आती है और चली जाती है, मगर ट्रैफिक समस्या का समाधान नहीं निकलता

Sat, 06 Apr 2019 01:18 PM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 06 Apr 2019 01:18 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Talk with people in Chandigarh on Problems
बस पैसेंजर्स
लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर इलेक्शन गेड़ी अभियान के तहत लोगों ने पार्टियों के घोषणापत्र पर सवाल उठाए और बोले कि सिर्फ नाम के वादे होते हैं। सरकार आती है और चली जाती है। समस्याओं का समाधान कोई कर नहीं पाता। दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। धूप भी काफी तीखी थी। इलेक्शन गेड़ी इंतजार में थी, तभी बस नंबर 254 पहुंची। इस बस का रूट सेक्टर 18, 27, 28 की मार्केट, रेलवे स्टेशन, कलाग्राम, मनीमाजरा, इंदिरा कॉलोनी, किशनगढ़ से होते हुए आईटी पार्क था। बस के रुकते ही सवारियां बैठने लगीं।
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एसी बस होने के कारण अंदर राहत थी, लेकिन चुनावी चर्चा का तार छिड़ते ही माहौल में गर्मी छा गई। बस में सवार पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड कर्मचारी मोहाली निवासी हरजीत सिंह ने कहा कि चुनाव में हर बार पार्टियां अपना घोषणापत्र तो जारी कर देती हैं, लेकिन सत्ता मिलते ही सबका भाव बदल जाता। विकास के नाम पर सिर्फ लोगों को बरगलाया जाता है। चंडीगढ़ को स्मार्ट बनाने की जरूरत नहीं है, जैसे इसकी कल्पना की गई थी, वैसा ही इसे रहने दो। सेक्टर 46 निवासी दिनेश कुमार ने एनडीए के पक्ष में तारीफ करते हुए कहा कि भाजपा सरकार में टैक्स चोरी करने वालों की पोल खुल गई है।
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आज टैक्स जमा करने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। यह सरकार के बेहतर निर्णयों का ही नतीजा है। दड़वा निवासी अमन शर्मा का कहना है कि पांच साल में शहर का विकास नहीं हुआ है। गलियों में न पर्याप्त लाइट की व्यवस्था है और न सड़कों का निर्माण हुआ है। इससे बरसात में काफी समस्या बढ़ जाती है। केवल मुख्यमार्ग बनवाना नेताओं का काम नहीं, गलियां भी देखनी होंगी। सेक्टर 29 निवासी उदय चंदेल ने कहा कि शहर में ट्रैफिक बोझ बनने लगा है। शहर में सिर्फ ट्रिब्यून चौक में फ्लाईओवर की जरूरत नहीं है बल्कि अब तो कई जगह बनाने पड़ेंगे।
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इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन को सर्वे करना चाहिए। सरकार आती है और चली जाती, लेकिन ट्रैफिक एक ऐसा मुद्दा है जो कभी नहीं सुलझा। यात्री एक-दूसरे से शहर के विकास पर चर्चा कर ही रहे थे कि आईटी पार्क आ गया। बस से उतरते हुए लोग बोले, जब-जब चुनाव आते हैं तभी नेताओं को शहर की सुध आती है। सेक्टर 43 में रहने वाली छात्रा मुस्कान ने बताया कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए पीजीआई एकमात्र हास्पिटल है। यदि पीजीआई जैसे एक-दो हास्पिटल और इस रीजन में बनें तो अस्पतालों में भीड़ कम हो सकती है।

रोजगार नहीं तो कैसा मतदान

मेरे दो बच्चे हैं। मैं कपड़े डिजाइन करके घर खर्च चलाता हूं। जिस तरह से युवाओं को बेरोजगार देख रहा हूं। अपने बच्चों को लेकर चिंता होती है। आखिर बड़े होकर वह क्या करेंगे, क्योंकि नौकरियां तो हैं ही नहीं। जो सरकार रोजगार नहीं दे सकती, उसके लिए क्या मतदान करना।
- शहजाद आलम, व्यवसायी, हाउसिंग बोर्ड

नोटबंदी सरकार का बड़ा फैसला
नोटबंदी का फैसला भाजपा सरकार ने अच्छा लिया था। देश में टैक्स चोरी करने वालों की कमर टूटी है। टैक्स भरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिस प्रकार से सरकार निर्णय ले रही है एक मौका और देने की जरूरत है, ताकि देशहित में और भी ऐसे ही बड़े फैसले लिए जा सकें।
- दिनेश कुमार, व्यवसायी, सेक्टर 46

मेट्रो चले तो बात बने
बलटाना से प्रतिदिन पंजाब विश्वविद्यालय जाना होता है। बस नहीं मिलती है तो कई बार क्लास छूट जाती है। यदि मेट्रो चलती तो समय से पहुंचकर पढ़ाई का नुकसान नहीं होता। सरकार कोई भी बने, लेकिन मेट्रो सिर्फ घोषणापत्र तक सीमित न रहे। उसे कागजों से जमीन पर लाने की जरूरत है।
- गणेश, छात्र, बलटाना

चंडीगढ़ को चंडीगढ़ ही रहने दो
चुनावी वादों में राजनीतिक पार्टियां चंडीगढ़ को पेरिस और अन्य विदेशी शहर बनाने का दावा करती हैं। चंडीगढ़ को सिटी ब्यूटीफुल का खिताब मिला हुआ है। यदि नेता इसे ही सजाने और संवारने का कार्य ठीक से करें तो कोई अन्य शहर जैसा चंडीगढ़ को बनाने की जरूरत नहीं होगी।
- हरजीत सिंह, रिटायर्ड पीडब्ल्यूडी कर्मचारी, मोहाली

स्वच्छता के नाम पर केवल दिखावा करते हैं नेता
स्वच्छता अभियान के नाम पर नेता केवल दिखावा करते हैं। बड़ी-बड़ी झाड़ूू लेकर सफाई करते हुए फोटो निकलवाने का बस एक फैशन सा चल गया है। वास्तविकता में साफ-सफाई का नेताओं को ध्यान होता तो शहर सफाई में 3 से 20वें स्थान पर नहीं पहुंचता। इसमें शहरवासियों को भी सहयोग करने की जरूरत है।
- रिशु, छात्र, मनीमाजरा
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