{"_id":"5cad791dbdec2213f41363ca","slug":"lok-sabha-elections-2019-sangrur-lok-sabha-constituency-political-history","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लोकसभा चुनाव 2019: संगरूर में तीन दशक से आधे वोट नहीं ले पाया कोई प्रत्याशी, कुछ ऐसे हैं समीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकसभा चुनाव 2019: संगरूर में तीन दशक से आधे वोट नहीं ले पाया कोई प्रत्याशी, कुछ ऐसे हैं समीकरण
Wed, 10 Apr 2019 10:37 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)
सुशील कुमार, अमर उजाला, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 10 Apr 2019 10:37 AM IST
विज्ञापन
पूर्व सीएम सुरजीत सिंह बरनाला
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संसदीय सीट संगरूर पर मतदाताओं का रुझान पूरी तरह से एक तरफ नहीं झुकता है। हार जीत से परे यहां वोटरों का प्रमुख सियासी दलों से जुड़ाव बना रहता है। पिछले तीस साल के आंकडे़ बता रहे हैं कि यहां से कोई भी प्रत्याशी आधे वोट नहीं ले पाया है।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 1989 के लोकसभा चुनाव तक संगरूर संसदीय सीट से कोई भी राजनीतिक दल पच्चास फीसदी वोट हासिल नहीं कर सका है। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान 48.5 मत हासिल करने में सफल रहे थे।
2009 में कांग्रेस के विजयइंदर सिंगला 38.50 फीसदी वोट लेकर संसद पहुंचे थे। अकाली दल को 34 फीसदी, लोक भलाई पार्टी को 12 फीसदी और बसपा को साढे़ सात फीसदी मत हासिल हुए थे। 2004 में अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींढसा 34 फीसदी वोट लेकर सांसद बने थे।
विज्ञापन
1999 में अकाली दल मान के सिमरनजीत सिंह मान 42 फीसदी मत लेकर सांसद बने। अकाली दल को 30 फीसदी, सीपीआई को 27 फीसदी मत मिल थे। इसी प्रकार 1998 में अकाली दल के सुरजीत सिंह बरनाला 40 फीसदी लेकर संसद की सीढ़ियां चढे़ थे। तब अकाली दल मान को 29 फीसदी व कांग्रेस को 25 फीसदी वोट नसीब हुए थे।
विज्ञापन
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 1989 के लोकसभा चुनाव तक संगरूर संसदीय सीट से कोई भी राजनीतिक दल पच्चास फीसदी वोट हासिल नहीं कर सका है। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान 48.5 मत हासिल करने में सफल रहे थे।
विज्ञापन
2009 में कांग्रेस के विजयइंदर सिंगला 38.50 फीसदी वोट लेकर संसद पहुंचे थे। अकाली दल को 34 फीसदी, लोक भलाई पार्टी को 12 फीसदी और बसपा को साढे़ सात फीसदी मत हासिल हुए थे। 2004 में अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींढसा 34 फीसदी वोट लेकर सांसद बने थे।
विज्ञापन
1999 में अकाली दल मान के सिमरनजीत सिंह मान 42 फीसदी मत लेकर सांसद बने। अकाली दल को 30 फीसदी, सीपीआई को 27 फीसदी मत मिल थे। इसी प्रकार 1998 में अकाली दल के सुरजीत सिंह बरनाला 40 फीसदी लेकर संसद की सीढ़ियां चढे़ थे। तब अकाली दल मान को 29 फीसदी व कांग्रेस को 25 फीसदी वोट नसीब हुए थे।
1996 में अकाली दल के सुरजीत सिंह बरनाला 32 फीसदी वोट लेकर सांसद बनने में सफल रहे थे। अकाली दल मान को 22 फीसदी, सीपीआई को 21 और कांग्रेस को 19 फीसदी वोट मिले थे। 1992 में कांग्रेस के गुरचरण सिंह ददाहुर 44 फीसदी मत लेकर सांसद बने। तब सीपीआई को 39 व बसपा को 14 फीसदी वोट मिले।
1989 में अकाली दल मान के राजदेव सिंह 37 फीसदी वोटों से सांसद बने। तब सीपीआई को 21, कांग्रेस 16, अकाली दल बादल 10 व अकाली दल (तकडी) को 10 फीसदी मत मिले। इस सीट पर सिर्फ तीन बार ही आधे से ज्यादा वोट लेने में प्रत्याशी सफल रहे। 1985 में अकाली दल ने यहां से 53 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए थे। 1977 में अकाली दल को करीब 65 फीसदी वोट और 1967 में अकाली दल संत सिंह को 55 फीसदी वोट मिले थे।
अर्श से फर्श पर भी आए कई दल
इस संसदीय सीट से अकाली दल अमृतसर अर्श तक पहुंच गया था। वर्ष 2009 में इस दल को मात्र साढे़ तीन फीसदी मत नसीब हुए थे। बहरहाल इस सीट पर दो नए सियासी दल अब अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। डेमोक्रेटिक अलायंस के अलावा अकाली दल टकसाली भी अब चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में सियासी दलों की बढ़ रही संख्या नए सियासी समीकरण बनाने की तरफ इशारा कर रही है।
1989 में अकाली दल मान के राजदेव सिंह 37 फीसदी वोटों से सांसद बने। तब सीपीआई को 21, कांग्रेस 16, अकाली दल बादल 10 व अकाली दल (तकडी) को 10 फीसदी मत मिले। इस सीट पर सिर्फ तीन बार ही आधे से ज्यादा वोट लेने में प्रत्याशी सफल रहे। 1985 में अकाली दल ने यहां से 53 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए थे। 1977 में अकाली दल को करीब 65 फीसदी वोट और 1967 में अकाली दल संत सिंह को 55 फीसदी वोट मिले थे।
अर्श से फर्श पर भी आए कई दल
इस संसदीय सीट से अकाली दल अमृतसर अर्श तक पहुंच गया था। वर्ष 2009 में इस दल को मात्र साढे़ तीन फीसदी मत नसीब हुए थे। बहरहाल इस सीट पर दो नए सियासी दल अब अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। डेमोक्रेटिक अलायंस के अलावा अकाली दल टकसाली भी अब चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में सियासी दलों की बढ़ रही संख्या नए सियासी समीकरण बनाने की तरफ इशारा कर रही है।