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हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, जज बोले- अदालत का काम चुनाव की निगरानी करना नहीं, कोई भी हो
Tue, 02 Apr 2019 03:10 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 02 Apr 2019 03:10 PM IST
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लोकसभा चुनाव के साथ ही हरियाणा में विधानसभा चुनाव करवाने की मांग वाली जनहित याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनाव की निगरानी करना हमारा काम नहीं है। चुनाव कब हों और कैसे हों, यह चुनाव आयोग को देखना है। याचिका दाखिल करते हुए अंबाला निवासी चंद्र शेखर ने एडवोकेट विक्रम पूनिया के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।
याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार यदि विधानसभा चुनाव को 6 माह से कम का समय हो तो विधानसभा के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ करवाए जा सकते हैं। याची ने कहा कि चुनाव पर भारी खर्च होता है और इसके लिए बड़ी संख्या में मानव शक्ति की जरूरत पड़ती है। यह पैसा आम आदमी द्वारा दिए गए टैक्स से जुड़ता है।
यदि हरियाणा में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव संपन्न करवाए जाएं तो इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस पर दो टूक शब्दों में कहा कि कोर्ट का काम चुनाव में दखल देना नहीं है और न ही चुनाव की निगरानी करना। चीफ जस्टिस ने कहा कि कितना पैसा लगता है, कितना स्टाफ लगता है, यह हम नहीं जानते। चुनाव आयोग का काम है कि वह निर्णय ले, कौन से चुनाव कब और कहां होने हैं।
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उन्होंने कहा कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत हाईकोर्ट को असीमित अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन यह जज को निर्धारित करना होता है कि किन मामलों में इस अधिकार का प्रयोग किया जाए और किन में नहीं। कोर्ट का यह रुख देखकर याचिकाकर्ता ने याचिका वापिस लेने की छूट मांगी। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका वापिस लेने की छूट देते हुए इसे खारिज कर दिया।
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याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार यदि विधानसभा चुनाव को 6 माह से कम का समय हो तो विधानसभा के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ करवाए जा सकते हैं। याची ने कहा कि चुनाव पर भारी खर्च होता है और इसके लिए बड़ी संख्या में मानव शक्ति की जरूरत पड़ती है। यह पैसा आम आदमी द्वारा दिए गए टैक्स से जुड़ता है।
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यदि हरियाणा में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव संपन्न करवाए जाएं तो इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस पर दो टूक शब्दों में कहा कि कोर्ट का काम चुनाव में दखल देना नहीं है और न ही चुनाव की निगरानी करना। चीफ जस्टिस ने कहा कि कितना पैसा लगता है, कितना स्टाफ लगता है, यह हम नहीं जानते। चुनाव आयोग का काम है कि वह निर्णय ले, कौन से चुनाव कब और कहां होने हैं।
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उन्होंने कहा कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत हाईकोर्ट को असीमित अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन यह जज को निर्धारित करना होता है कि किन मामलों में इस अधिकार का प्रयोग किया जाए और किन में नहीं। कोर्ट का यह रुख देखकर याचिकाकर्ता ने याचिका वापिस लेने की छूट मांगी। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका वापिस लेने की छूट देते हुए इसे खारिज कर दिया।