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लोकसभा चुनाव 2019: गुरदासपुर में करतारपुर कॉरिडोर नहीं है मुद्दा, सिख वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश

Tue, 02 Apr 2019 02:55 PM IST
खुशबू गोयल अखिल तलवार, अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
अखिल तलवार, अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 02 Apr 2019 02:55 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Kartarpur Corridor Not a Election Issue in Gurdaspur of Punjab
करतारपुर कॉरिडोर
लोकसभा चुनाव 2019 में पंजाब के गुरदासपुर जिले में करतारपुर कॉरिडोर चुनावी मुद्दा नहीं है। पार्टियां सिख वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में है, लेकिन जनता ऐसा होने नहीं दे रही। पिछले साल अगस्त में पाक पीएम इमरान खान की ताजपोशी में गए पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू ने वहां के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को जफ्फी डाली। यह जफ्फी देखते ही देखते टीवी चैनलों की ब्रेकिंग न्यूज बनी और अगले दिन अखबारों की सुर्खियां बन गई।
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सिद्धू ने सफाई दी कि बाजवा ने उन्हें करतापुर कॉरिडोर खोलने का वादा किया। वह मांग, जो दुनिया भर के सिख बंटवारे के बाद से कर रहे हैं। भारत की सरहद से चंद किलोमीटर दूर पाक स्थित गुरद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों की। जहां श्री गुरु नानक देव जी ने जिंदगी के अंतिम साल गुजारे और मानवता को अहम संदेश दिए थे। समय बीता, सिद्धू कभी विलेन तो कभी हीरो, पाक ने कॉरिडोर खोलने की पेशकश की, पीएम नरेंद्र मोदी ने मंजूरी दी।
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कांग्रेस और अकाली-भाजपा के क्रेडिट वार के बीच आखिर सरहद के दोनों तरफ कॉरिडोर का काम शुरू हो गया। अब सालों पुराना सपना बस पूरा होने को ही है। लेकिन जिस गुरदासपुर हलके से यह कॉरिडोर बनाया जा रहा है, वहां यह चुनावी मुद्दा नहीं है। अकाली-भाजपा और कांग्रेस बेशक इससे सिख वोटों का ध्रुवीकरण अपनी-अपनी तरफ करने के आंकलन कर रहे हों, पर इस हलके में कॉरिडोर के नाम पर वोट पड़ेंगे, ऐसा नहीं लगता।
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कॉरिडोर के लिए तबाह की जा रही फसल

सीमा पर स्थित डेरा बाबा नानक में कॉरिडोर का काम शुरू हो गया है। इलाके के कुछ किसान सूनी आंखों से जेसीबी मशीनों को खून-पसीने से सींची अपनी गेहूं की फसल तबाह करते देख रहे हैं। करीब 450 परिवारों की 108 एकड़ जमीन कॉरिडोर और टर्मिनल के लिए एक्वायर की गई है। 34 लाख मुआवजा मिलेगा, पर जमीन कहां मिलेगी, यह नहीं पता। कई परिवारों की उलझन यह है कि आधी जमीन एक्वायर हुई है, वह क्या करें समझ नहीं आ रहा।

किसी की जमीन ले ली गई तो ट्यूबवेल छूट गया। किसी का ट्यूबवेल आ गया तो जमीन बच गई। एक किसान गुरनाम सिंह कहते हैं कि अगर बीस किलोमीटर दूर जमीन मिली तो घर भी वहीं बनाना पड़ेगा। पीढ़ियों से जिस गांव में रहे, जिन लोगों के बीच रहे, सब छूट जाएंगे। दस दिन बाद गेहूं पक जाती तो साल भर का चारा हो जाता, लेकिन फसल काट दी, तो अब चारे को भी मोहताज हो गए। लांघे (कॉरिडोर) ने घर उजाड़ दिए।

डेरा बाबा नानक के आसपास के इलाके हों, या गुरदासपुर शहर, वहां भी कॉरिडोर को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं है। लेकिन पंजाब के दूसरे हिस्सों में लोग बेहद उत्साहित हैं। बीएसएफ ने कई साल पहले से सीमा पर दो दूरबीन लगा कर पाक स्थित गुरद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शनों का इंतजाम किया हुआ है। बीएसएफ अधिकारी सतीश कुमार कहते हैं कि जब से कॉरिडोर पर सहमति हुई है, यहां आने वालों की तादाद काफी बढ़ गई है। आजकल रोजाना करीब दो हजार लोग आ रहे हैं, छुट्टियों में संख्या बढ़ जाती है।

गन्ना बेल्ट में पेमेंट बन सकता है बड़ा मुद्दा

गुरदासपुर हलके को गन्ना बेल्ट कहा जाता है, यहां कई मिलें हैं और बड़े क्षेत्र में गन्ने की पैदावार होती है। गन्ना किसानों को अदायगी न होना इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। पिछले साल के 260 करोड़ बकाया थे, सौ करोड़ जारी हुए, फिर पेमेंट रुक गई। किसानों ने जीटी रोड जाम किया। उच्च स्तर पर सरकार ने आश्वासन दिया कि हर हफ्ते 25-25 करोड़ रिलीज किए जाएंगे। लेकिन कुछ नहीं हुआ।

इस साल मिलों ने दस जनवरी तक तो अदायगी की, उसके बाद बंद कर दी। किसान संगठनों का दावा है कि इस साल के भी दो सौ करोड़ बकाया पड़े हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान हरमीत कादियां कहते हैं कि सरकार एक तरफ फसल विविधता की बात करती है, दूसरी तरफ गन्ने की अदायगी नहीं हो रही। किसान क्यों गन्ना लगाएंगे। गन्ना ऐसी फसल है जो मुनाफा दे जाती है और इसमें बारिश, ओलों से कोई नुकसान नहीं।

पर जब पिछले साल की अदायगी अब तक नहीं हुई तो किसान क्या करें। किसान हर जगह कांग्रेस और शिअद-भाजपा को घेर रहे हैं। राज्य सरकार की तो नाकामी है ही, केंद्र सरकार भी कम नहीं है। मिलों ने चीनी भरी हुई है, पर केंद्र सरकार उन्हें बेचने की इजाजत नहीं दे रही। हलके में किसानों के रुख पर सबकी नजरें हैं।

भाजपा असमंजस में, पर पीएम मोदी दे गए संकेत

अमृतसर की तरह गुरदासपुर में भी कांग्रेस के बजाय भाजपा कैंडिडेट ही चर्चा का विषय है। भाजपा यहां उम्मीदवारों को लेकर असमंजस में है। कभी स्थानीय, कभी बाहरी सेलिब्रिटी की बातें चलती हैं। स्थानीय उम्मीदवारों की बात करें तो 2017 में हारे स्वर्ण सलारिया और विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना में मुकाबला है। बाहरी में उनके बेटे अक्षय खन्ना का नाम चल रहा है। चर्चाएं यह भी हैं कि अक्षय ने मना कर दिया है, पर भाजपा उन्हें मनाने में लगी है। सनी दयोल के नाम पर भी चर्चा है।

सियासी दिग्गज जो भी गणित लगाएं, गुरदासपुर शहर के व्यवसायी अमित सैनी की अपनी कैलकुलेशन है। वह कहते हैं कि कुछ माह पहले गुरदासपुर में रैली करने आए पीएम नरेंद्र मोदी साफ संकेत दे गए हैं कि उम्मीदवार कौन होगा। मोदी ने रैली की शुरूआत में विनोद खन्ना को याद किया। कहा, हलके को दिया उनका योगदान कोई भूल नहीं सकता। हमें उनके सपनों को पूरा करना है। मोदी करीब चार मिनट तक खन्ना पर ही बोले थे। रैली के कर्ता-धर्ता सलारिया थे, लेकिन किसी पद पर हुए बिना कविता खन्ना को भी मंच पर बिठाया गया था।

गुरदासपुर हलके के ही विधानसभा क्षेत्र पठानकोट में ढक्की रोड के दुकानदार चमन लाल भी इसी सुर में बहस आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि खन्ना ने पूरे हलके के लिए जितना किया, उतना कोई कर नहीं सकता। 2017 में पार्टी ने उनके परिवार के साथ नाइंसाफी की। इस बार भरपाई होनी चाहिए। कैंडिडेट तो हाईकमान तय करेगा, लेकिन स्थानीय स्तर पर गुटबाजी पार्टी के लिए मुसीबत बनी हुई है। उधर, कांग्रेस में उम्मीदवार को लेकर मारा-मारी नहीं है, गुटबाजी भी कम है। एलान नहीं हुआ है, पर प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ की उम्मीदवारी लगभग पक्की मानी जा रही है। कांग्रेस हिंदू कैंडिडेट की टिकट काटने का जोखिम नहीं लेना चाहती।

अगर ऐन वक्त पर प्रताप बाजवा कोई उलटफेर कर गए तो ठीक, वरना जाखड़ की टिकट पक्की मानी जा रही है। फिलहाल कांग्रेसी भी भाजपा कैंडिडेट की तरफ देख रहे हैं। अगर सेलिब्रिटी आया, तो मुश्किल। स्थानीय लोकप्रिय आया तो भी डगर आसान नहीं। क्योंकि दो साल में सिर्फ एलान हुए और नींव पत्थर रखे गए। लोगों को व्यवहारिक तौर पर कुछ नहीं मिला, वे नाराज हैं, पर यहां के सिख बाहुल्य हलकों में अभी भी अकाली दल से ज्यादा नाराजगी है, जो भाजपा का नुकसान करेगी। हलके के नौ विधानसभा क्षेत्रों में सात पर कांग्रेस, एक-एक पर शिअद, भाजपा काबिज हैं। आम आदमी पार्टी अभी तक कोई प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही है।

बटाला को निगम मिला, इंडस्ट्री नहीं

अमृतसर से बटाला जाते समय फ्लाई ओवर पर चढ़ते वक्त विदेश में घूमने जैसी फीलिंग आती है। लेकिन हाईवे से बटाला में दाखिल होते ही सामना टूटी सड़कों से होता है। गुरदासपुर सीट के हिंदू बाहुल्य विधानसभा हलके बटाला की एक मांग पूरी हो गई, पर इंडस्ट्री के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया। डॉ. सुभाष चंद्र कहते हैं कि नगर निगम बनाने का एलान हो गया है, जल्द बन भी जाएगा।

इससे शहर की हालत में सुधार होगा, बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी। जल्द जिला भी घोषित कर दिया जाए, लेकिन उनके साथी तरसेम लाल का मानना है कि जब तक बटाला की इंडस्ट्री का रिवाइवल नहीं होगा, कोई तरक्की नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि एक जमाने में बटाला बड़ा औद्योगिक केंद्र था, लोहे की हर चीज यहां बनती थी। लेकिन आतंकवाद के दौर में लोगों को औने-पौने दाम में सब कुछ बेच कर जाना पड़ा।

हर पार्टी चुनाव में वादा करती है, पर आज तक इंडस्ट्री को दोबारा खड़ा करने के लिए कुछ नहीं किया गया। उसी से युवाओं को रोजगार मिलेगा। क्लाथ हाउस के मालिक विजेंदर इंदर सिंह की समस्याएं नगर काउंसिल से संबंधित हैं, पर उनकी दुकान में काम करने वाले गौरव को केंद्र सरकार से शिकायत है। आवेदन के चार साल बाद भी उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर नहीं मिला।

रोडवेज मुलाजिम हरिंदरपाल सिंह दोनों पार्टियों से नाराज हैं। कहते हैं, अकाली दल ने बेअदबी कराई, कांग्रेस ने कोई कार्रवाई नहीं की, दोनों मिले हुए हैं।

रेलवे ट्रैक ने रोकी पठानकोट की राहें

गुरदासपुर लोकसभा हलके का सबसे प्रमुख शहर पठानकोट एयर बेस पर हमले के बाद सुर्खियों में आया था। जम्मू और हिमाचल से सटे इस शहर की सबसे प्रमुख समस्या पठानकोट से जोगिंदर नगर (हिमाचल प्रदेश) को जोड़ने वाला रेलवे ट्रैक है। नैरोगेज का ट्रैक शहर में कई जगह से गुजरता है, जहां दिन भर जाम लगा रहता है। पिछले दिनों भाजपा की दावेदार कविता खन्ना और कांग्रेस के दावेदार सुनील जाखड़, दोनों ने ही दावा किया था कि रेलवे 3.5 किलोमीटर का एलिवेटेड ट्रैक बनाने पर राजी हो गया है। दोनों ने दावा किया था कि उन्होंने रेलमंत्री पीयूष गोयल के पास यह मुद्दा उठाया। जिसके बाद रेलवे 226.77 करोड़ से ट्रैक बनाने पर राजी हो गया।

दोनों का क्रेडिट वार चुनाव में भी जारी है, पब्लिक किसकी मानती है, यह रिजल्ट के बाद पता चलेगा। यहां के लोग मानते हैं कि पठानकोट को विनोद खन्ना ने काफी कुछ दिया। ढक्की रोड निवासी एक्स सर्विसमैन ओंकार सिंह कहते हैं कि खन्ना की वजह से ही शहर को दो फ्लाई ओवर, चक्की बैंक रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट मिला। ढक्की रोड रेलवे क्रॉसिंग पर ओवर ब्रिज भी उन्होंने पास करवा लिए थे, पर उनके निधन के बाद कुछ नहीं हुआ। शहर में इंडस्ट्री न होने की वजह से बेरोजगारी है। अब स्थानीय कांग्रेस विधायक अमित विज ने पहला पेप्सी प्लांट स्थापित किया है। एयर स्ट्राइक के बाद शहर में किसी तरह की राष्ट्रवादी लहर से ओंकार सिंह इंकार करते हैं।

खन्ना ने ध्वस्त किया था कांग्रेस का किला

गुरदासपुर हलका भी कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है, जिसे पहली बार सुपर स्टार विनोद खन्ना ने ध्वस्त किया था। दो उप चुनाव समेत अब तक हुए 18 चुनाव में कांग्रेस यहां से 13 बार जीती है। कांग्रेस के दीवान चंद शर्मा तीन बार और सुखबंस कौर भिंडर लगातार पांच बार यहां से सांसद रहे। 1998 में भाजपा ने विनोद खन्ना को टिकट दिया, जिन्होंने कांग्रेसी किले में सेंध लगा दी। खन्ना लगातार तीन बार जीते। 2009 में हारने के बाद 2014 में फिर सांसद बने।

पिछले चुनाव
वर्ष--------------------- जीते (वोट प्रतिशत) ------------ ----- हारे (वोट प्रतिशत)
2017 (उप चुनाव) -- सुनील जाखड़ - कांग्रेस (58.15)-- स्वर्ण सलारिया-भाजपा (35.67)
2014---------------- विनोद खन्ना-भाजपा (46.25) ---- प्रताप सिंह बाजवा (33.20)
2009 --------------- प्रताप सिंह बाजवा-कांग्रेस (48) ---  विनोद खन्ना-भाजपा (47.10)
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