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लोकसभा चुनाव 2019: रणबांकुरों के इंतजार में महाभारत की धरती, चेहरा देख वोट तय करेंगे मतदाता
Thu, 04 Apr 2019 03:27 PM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा/राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा/राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 04 Apr 2019 03:27 PM IST
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श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता संदेश जिस जगह दिया, वह धर्मक्षेत्र के नाम से विख्यात है। कुरुक्षेत्र का वही रण इन दिनों एक और महाभारत के लिए तैयार हो रहा है। यह महाभारत कौरवों व पांडवों के बीच नहीं, बल्कि सियासी दलों में होगा। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के लिए यह नई बात नहीं है, साल 1977 में कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद से ही यह धरती सियासी महाभारत का गवाह बनती आ रही है।
बहरहाल, 2019 लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। लेकिन अभी प्रत्याशियों के मैदान में उतरने का इंतजार है। चुनावी महारथियों के मैदान में नहीं होने से पूरा रणक्षेत्र फिलहाल सूना है। प्रत्याशी घोषित न होने पर अभी तक न तो चुनावी शोर है और न ही नेताओं की मतदाताओं के दरवाजों तक दौड़। बावजूद इसके जहां भी जमघट है, वहां एक ही चर्चा है कि किस दल से कौन उम्मीदवार होगा। केंद्र बिंदु साठ साल बनाम पांच साल है।
आम आदमी मोदी का गुणगान करने के साथ ही 2014 की घोषणाओं का भी सिंहावलोकन करता दिख रहा है। याद करता है, 15-15 लाख खाते में आने की बात और दो करोड़ रोजगार सालाना का सपना। जनता काला धन वापस लाने, भ्रष्टाचार, महंगाई व आतंकवाद खत्म करने को लेकर किए वादों पर भी केंद्र सरकार को घेरने से नहीं चूक रही। लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस भी जनता के सवालों के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। मोदी के मुकाबले मजबूत विकल्प न होने का फैक्टर भी यहां काम कर रहा है।
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बहरहाल, 2019 लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। लेकिन अभी प्रत्याशियों के मैदान में उतरने का इंतजार है। चुनावी महारथियों के मैदान में नहीं होने से पूरा रणक्षेत्र फिलहाल सूना है। प्रत्याशी घोषित न होने पर अभी तक न तो चुनावी शोर है और न ही नेताओं की मतदाताओं के दरवाजों तक दौड़। बावजूद इसके जहां भी जमघट है, वहां एक ही चर्चा है कि किस दल से कौन उम्मीदवार होगा। केंद्र बिंदु साठ साल बनाम पांच साल है।
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आम आदमी मोदी का गुणगान करने के साथ ही 2014 की घोषणाओं का भी सिंहावलोकन करता दिख रहा है। याद करता है, 15-15 लाख खाते में आने की बात और दो करोड़ रोजगार सालाना का सपना। जनता काला धन वापस लाने, भ्रष्टाचार, महंगाई व आतंकवाद खत्म करने को लेकर किए वादों पर भी केंद्र सरकार को घेरने से नहीं चूक रही। लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस भी जनता के सवालों के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। मोदी के मुकाबले मजबूत विकल्प न होने का फैक्टर भी यहां काम कर रहा है।
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यमुनानगर-कुरुक्षेत्र-पटियाला के बीच नहीं दौड़ पाई चुनावी रेल
50 साल पुराना मुद्दा कुरुक्षेत्र में आज भी जिंदा है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पिहोवा से पटियाला तक रेल लाइन का सर्वे कराया था। उसके बाद से ये रेल लाइन हर चुनाव में मुद्दा बनी, मगर हकीकत आज तक नहीं बन पाई। आचार्य पंडित बलराम गौतम कहते हैं कि पूर्व सांसद ओपी जिंदल, कैलाशो सैनी और उसके बाद नवीन जिंदल नई लाइन बनवाकर ट्रेन दौड़ाने के वादे तो करते रहे, मगर जमीन पर कुछ नहीं किया। केडीबी के पूर्व सदस्य जयनारायण शर्मा एडवोकेट व पूर्व कर्मचारी नेता माईचंद सैनी भी यमुनानगर-कुरुक्षेत्र- पटियाला नई रेल लाइन से न जुड़ने पर खफा हैं। बताते हैं कि चंद साल पहले कुरुक्षेत्र में तीन सौ मीटर के दायरे में तीन कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल, ईश्वर सिंह और डॉ. रामप्रकाश रहा करते थे, फिर भी ये रेललाइन नहीं बन पाई।
ये मुद्दे भी रहेंगे हावी
. पुराने कुरुक्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर पांच फाटक दिन में घंटों लोगों की जिंदगी जाम कर देते हैं। बीस साल से आरओबी और आरयूबी बनाने की बात कागजों में ही चल रही है।
. उद्यमी ओपी जिंदल व नवीन जिंदल यहां से सांसद रहे, मगर नया उद्योग नहीं ला पाए। बेरोजगार नौजवान इससे नाराज हैं।
. राइस मिलर्स का दिवालिया होना
. आज तक शहर का आउटर रिंगरोड हकीकत नहीं बन सका।
. धार्मिक पर्यटन के मद्देनजर कृष्णा सर्किट के लिए अब तक पूरा बजट खर्च ही नहीं हो सका।
. कुरुक्षेत्र में एयरपोर्ट का मुद्दा सिर्फ चुनावी मौसम में जिंदा होता है और बाद में दफन हो जाता है
ये मुद्दे भी रहेंगे हावी
. पुराने कुरुक्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर पांच फाटक दिन में घंटों लोगों की जिंदगी जाम कर देते हैं। बीस साल से आरओबी और आरयूबी बनाने की बात कागजों में ही चल रही है।
. उद्यमी ओपी जिंदल व नवीन जिंदल यहां से सांसद रहे, मगर नया उद्योग नहीं ला पाए। बेरोजगार नौजवान इससे नाराज हैं।
. राइस मिलर्स का दिवालिया होना
. आज तक शहर का आउटर रिंगरोड हकीकत नहीं बन सका।
. धार्मिक पर्यटन के मद्देनजर कृष्णा सर्किट के लिए अब तक पूरा बजट खर्च ही नहीं हो सका।
. कुरुक्षेत्र में एयरपोर्ट का मुद्दा सिर्फ चुनावी मौसम में जिंदा होता है और बाद में दफन हो जाता है
कोर मुद्दों पर चर्चा नहीं राष्ट्रवाद हावी
बरसयाणा गांव के रघुबीर सिंह व हैबतपुर के धन सिंह कहते हैं कि हरियाणा में बिना खर्च और पर्ची के युवाओं को मिली नौकरी भी चुनावी मुद्दा होगा। भ्रष्टाचार व क्षेत्रवाद के मुद्दे पर कांग्रेस घिरी हुई है। बुच्ची गांव के सौरभ पहली बार वोट डालेंगे, वे प्रियंका के फैन हैं। राम सिंह के अनुसार बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे कोर इश्यू पर चर्चा ही नहीं हो रही, राष्ट्रवाद हावी है। विजय सिंह व जौनी भी पुराने मुद्दों का समाधान न होने की बात कहते हैं पर वोट देने के लिए उम्मीदवारों की घोषणा पर भी नजरें टिकाए बैठे हैं।
जातीय समीकरण रहेंगे हावी
कुरुक्षेत्र सीट पर जाट, ब्राह्मण और ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। एडवोकेट जयनारायण शर्मा व राजकिशन मल्हान के मुताबिक, चुनाव में आखिर जातीय समीकरण का बड़ा रोल रहेगा।
संसदीय क्षेत्र में नौ विधानसभा, पांच में भाजपा काबिज
कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में थानेसर, पिहोवा, लाडवा, शाहबाद, कैथल, कलायत, गुहला-चीका, पुंडरी व रादौर हलके आते हैं। इनमें से पांच में भाजपा विधायक हैं, जबकि कलायत व पुंडरी में आजाद विधायक हैं। कैथल में कांग्रेस विधायक रणदीप सुरजेवाला हैं। पिहोवा में इनेलो विधायक थे, जिनकी कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी है।
जातीय समीकरण रहेंगे हावी
कुरुक्षेत्र सीट पर जाट, ब्राह्मण और ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। एडवोकेट जयनारायण शर्मा व राजकिशन मल्हान के मुताबिक, चुनाव में आखिर जातीय समीकरण का बड़ा रोल रहेगा।
संसदीय क्षेत्र में नौ विधानसभा, पांच में भाजपा काबिज
कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में थानेसर, पिहोवा, लाडवा, शाहबाद, कैथल, कलायत, गुहला-चीका, पुंडरी व रादौर हलके आते हैं। इनमें से पांच में भाजपा विधायक हैं, जबकि कलायत व पुंडरी में आजाद विधायक हैं। कैथल में कांग्रेस विधायक रणदीप सुरजेवाला हैं। पिहोवा में इनेलो विधायक थे, जिनकी कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी है।
सांसद भाजपा से बागी होकर बना चुके अपनी पार्टी
कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी 2014 में चुने गए थे। लेकिन जाट आंदोलन के दौरान ही उन्होंने अपने रास्ते भाजपा से जुदा कर लिए। उसके बाद सैनी भाजपा के खिलाफ मुखर होते चले गए। 2018 में उन्होंने लोकतंत्र सुरक्षा मंच के नाम से नई पार्टी बनाई व जींद उपचुनाव भी लड़वाया।
हालांकि, भाजपा ने उन्हें अभी पार्टी से निष्कासित नहीं किया है। सैनी की पार्टी का हाल ही में बसपा के साथ हरियाणा में गठबंधन हुआ है। बसपा आठ व लोसुपा दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सैनी कुरुक्षेत्र से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। भाजपा राज्य मंत्री नायब सैनी, लाडवा विधायक पवन सैनी पर दांव खेल सकती है, कांग्रेस से नवीन जिंदल का टिकट पक्का माना जा रहा है।
2014 में थे 11 लाख 68 हजार 405 वोटर
. वर्ष 2014 में भाजपा के राजकुमार सैनी को मिले थे 418122
. इनेलो के बलबीर सैनी को 288376
. कांग्रेस के नवीन जिंदल को 287722
ये थे बीते चुनाव में मुख्य मुद्दे
इसवाईएल, हवाई अड्डा, उद्योग, पटियाला-पिहोवा-कुरुक्षेत्र-यमुनानगर रेलवे ट्रैक, रोजगार, पर्यटन, विकास।
हालांकि, भाजपा ने उन्हें अभी पार्टी से निष्कासित नहीं किया है। सैनी की पार्टी का हाल ही में बसपा के साथ हरियाणा में गठबंधन हुआ है। बसपा आठ व लोसुपा दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सैनी कुरुक्षेत्र से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। भाजपा राज्य मंत्री नायब सैनी, लाडवा विधायक पवन सैनी पर दांव खेल सकती है, कांग्रेस से नवीन जिंदल का टिकट पक्का माना जा रहा है।
2014 में थे 11 लाख 68 हजार 405 वोटर
. वर्ष 2014 में भाजपा के राजकुमार सैनी को मिले थे 418122
. इनेलो के बलबीर सैनी को 288376
. कांग्रेस के नवीन जिंदल को 287722
ये थे बीते चुनाव में मुख्य मुद्दे
इसवाईएल, हवाई अड्डा, उद्योग, पटियाला-पिहोवा-कुरुक्षेत्र-यमुनानगर रेलवे ट्रैक, रोजगार, पर्यटन, विकास।
तय नहीं किसी भी दल की जीत : रमेश मदान
प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक रमेश मदान कहते हैं कि प्रदेश में कोई भी दल यह दावा नहीं कर सकता है कि उसकी जीत तय है। प्रदेश में अलग-अलग मुद्दे चुनाव के दौरान हावी रहेंगे। इसमें जातिवाद, क्षेत्रवाद, सामाजिक समरसता, स्थानीय नेतृत्व, विकास कार्य और उम्मीदवार अहम कड़ी होंगे। राष्ट्रीय मुद्दों का अपना अलग प्रभाव रहेगा। इनेलो को परिवार व पार्टी में टूट से नुकसान हुआ है।
भाजपा एकजुट होने के कारण मजबूत दिख रही। केंद्र व प्रदेश सरकार के कामों को भुनाया जाएगा। कांग्रेस की गुटबाजी उसके लिए सबसे बड़ा नासूर बनी हुई है। भाजपा ने सभी सीटों पर अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। कांग्रेस और इनेलो से भी सीटें छीनकर सभी दस सीटें भाजपा जीतना चाह रही है। बिसात भी इसी हिसाब से बिछाई गई है। कांग्रेस को मजबूत उम्मीदवार उतारने होंगे।
कुरुक्षेत्र से अब तक ये रहे सांसद
-1977 रघबीर सिंह-भारतीय लोकदल
-1980 मनोहर लाल-जेएनपी-एस
-198 हरपाल सिंह-कांग्रेस
-1989गुरदयाल सिंह सैनी-जनता दल
-1991 तारा सिंह--कांग्रेस
-1996 ओपी जिंदल-हरियाणा विकास पार्टी
-1998 कैलाशो देवी-हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय
-199 कैलाशो देवी-इनेलो
-2004 नवीन जिंदल-कांग्रेस
-2009नवीन जिंदल-कांग्रेस
-2014 में 37 साल बाद खिला कमल
राजकुमार सैनी भाजपा से सांसद बने। 1977 में लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के 37 साल बाद मोदी लहर में कमल खिला।
भाजपा एकजुट होने के कारण मजबूत दिख रही। केंद्र व प्रदेश सरकार के कामों को भुनाया जाएगा। कांग्रेस की गुटबाजी उसके लिए सबसे बड़ा नासूर बनी हुई है। भाजपा ने सभी सीटों पर अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। कांग्रेस और इनेलो से भी सीटें छीनकर सभी दस सीटें भाजपा जीतना चाह रही है। बिसात भी इसी हिसाब से बिछाई गई है। कांग्रेस को मजबूत उम्मीदवार उतारने होंगे।
कुरुक्षेत्र से अब तक ये रहे सांसद
-1977 रघबीर सिंह-भारतीय लोकदल
-1980 मनोहर लाल-जेएनपी-एस
-198 हरपाल सिंह-कांग्रेस
-1989गुरदयाल सिंह सैनी-जनता दल
-1991 तारा सिंह--कांग्रेस
-1996 ओपी जिंदल-हरियाणा विकास पार्टी
-1998 कैलाशो देवी-हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय
-199 कैलाशो देवी-इनेलो
-2004 नवीन जिंदल-कांग्रेस
-2009नवीन जिंदल-कांग्रेस
-2014 में 37 साल बाद खिला कमल
राजकुमार सैनी भाजपा से सांसद बने। 1977 में लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के 37 साल बाद मोदी लहर में कमल खिला।