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वोटर कार्ड बनाने में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा, 20 साल की युवती को बना दिया 118 वर्ष की बुजुर्ग
Wed, 10 Apr 2019 03:30 PM IST
खुशबू गोयल
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 10 Apr 2019 03:30 PM IST
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वोटर कार्ड
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चंडीगढ़ में वोटर कार्ड बनाने को लेकर बड़ी गड़बड़ी हो रही है। इसका खुलासा तब हुआ, जब अमर उजाला संवाददाता का 118 साल की एक महिला से मिलना हुआ। वह 20 साल की युवती निकली। अगर आपके घर में 18 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी सदस्य ने हाल ही में मतदाता पहचान पत्र बनवाया है तो उसकी जांच जरूर कर लें, क्योंकि इस बार निर्वाचन कार्यालय की ओर से काफी लापरवाही बरती जा रही है।
मलोया कालोनी निवासी युवती के परिजन भी इस बात से हैरान हैं कि 20 वर्षीय जमुना को निर्वाचन कार्यालय ने 118 वर्ष की बुजुर्ग महिला कैसे बना दिया। उन्हें यह डर भी सता रहा है कि अब उनकी बेटी आगामी लोकसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर भी सकेगी या नहीं। यह केवल एक मामला नहीं है, निर्वाचन कार्यालय की ओर से बनाए गए मतदाता पहचान पत्रों में और भी कई तरह की गड़बड़ी सामने आई है। इससे मतदाता परेशान हैं। उधर, इस संबंध में मुख्य चुनाव अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।
बता दें कि निर्वाचन कार्यालय की ओर से जानकारी मिली थी कि चंडीगढ़ में 100 वर्ष से अधिक आयु के करीब 60 मतदाता हैं, जो इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। ऐसे मतदाताओं को निर्वाचन कार्यालय की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा। अमर उजाला ने जब इन बुजुर्ग मतदाताओं की पड़ताल की तो हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ। चंडीगढ़ जैसी हाईटेक सिटी में इस तरह की गलती से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा हो गया है।
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मलोया कालोनी निवासी युवती के परिजन भी इस बात से हैरान हैं कि 20 वर्षीय जमुना को निर्वाचन कार्यालय ने 118 वर्ष की बुजुर्ग महिला कैसे बना दिया। उन्हें यह डर भी सता रहा है कि अब उनकी बेटी आगामी लोकसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर भी सकेगी या नहीं। यह केवल एक मामला नहीं है, निर्वाचन कार्यालय की ओर से बनाए गए मतदाता पहचान पत्रों में और भी कई तरह की गड़बड़ी सामने आई है। इससे मतदाता परेशान हैं। उधर, इस संबंध में मुख्य चुनाव अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।
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बता दें कि निर्वाचन कार्यालय की ओर से जानकारी मिली थी कि चंडीगढ़ में 100 वर्ष से अधिक आयु के करीब 60 मतदाता हैं, जो इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। ऐसे मतदाताओं को निर्वाचन कार्यालय की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा। अमर उजाला ने जब इन बुजुर्ग मतदाताओं की पड़ताल की तो हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ। चंडीगढ़ जैसी हाईटेक सिटी में इस तरह की गलती से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा हो गया है।
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118 साल की वोटर का सच ऐसे आया सामने
जानकारी के मुताबिक, मलोया कालोनी के मकान नंबर 4654 में रहने वाले दिलीप कुमार के घर 118 वर्षीय वोटर जमुना रहती हैं। उससे मिलने पर पता चला कि जमुना, दिलीप कुमार की पत्नी हैं और उनकी उम्र महज 20 वर्ष है। अभी कुछ माह पहले ही उनकी शादी हुई है, जिसके बाद दिलीप ने अपनी पत्नी का वोटर कार्ड बनवाया, लेकिन वोट कार्ड में जमुना की उम्र देखकर उनके होश उड़ गए। जमुना के वोटर कार्ड में उम्र 118 वर्ष अंकित है।
अब दिलीप को यह समझ नहीं आ रहा कि वह क्या करें। उन्हें इस बात का भी डर है कि उनकी पत्नी चुनाव में वोट डाल पाएंगी या नहीं। जब जमुना से पूछा गया कि आपकी उम्र कितनी है तो वह बेहद गंभीर हो गई। उसने संकोच करते हुए बताया कि बीएलओ ने गलत उम्र भर दिया है। उनकी उम्र 118 साल नहीं, बल्कि महज 20 साल है। अब वह इसकी शिकायत निर्वाचन कार्यालय में दर्ज कराएंगी।
अब दिलीप को यह समझ नहीं आ रहा कि वह क्या करें। उन्हें इस बात का भी डर है कि उनकी पत्नी चुनाव में वोट डाल पाएंगी या नहीं। जब जमुना से पूछा गया कि आपकी उम्र कितनी है तो वह बेहद गंभीर हो गई। उसने संकोच करते हुए बताया कि बीएलओ ने गलत उम्र भर दिया है। उनकी उम्र 118 साल नहीं, बल्कि महज 20 साल है। अब वह इसकी शिकायत निर्वाचन कार्यालय में दर्ज कराएंगी।
52 वर्ष की भूपेंदर कौर को भी 119 वर्षीय वोटर बनाया
जमुना के अलावा कई अन्य मतदाताओं को भी निर्वाचन कार्यालय की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सेक्टर-38 डी के मकान नंबर 3062 में रहने वाली भूपेंदर कौर की आयु वोटर कार्ड में 119 साल लिखी हुई है, जबकि वह 52 वर्ष की हैं। भूपेंदर कौर का कहना है कि उन्होंने वोटर कार्ड देखा ही नहीं था।
इसलिए उन्हें यह पता नहीं था कि उनकी उम्र इतनी अधिक लिखी हुई है। जब अमर उजाला संवाददाता ने ही उन्हें इसकी जानकारी दी, तब वोटर कार्ड देखा तो उनके होश उड़ गए। भूपेंदर कौर के पति मनमोहन सिंह ने बताया कि वह बरेली के रहने वाले हैं। हाल ही में वह यहां अपने परिवार के साथ शिफ्ट हुए हैं। अब वह इसकी शिकायत निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारियों से करेंगे।
इसलिए उन्हें यह पता नहीं था कि उनकी उम्र इतनी अधिक लिखी हुई है। जब अमर उजाला संवाददाता ने ही उन्हें इसकी जानकारी दी, तब वोटर कार्ड देखा तो उनके होश उड़ गए। भूपेंदर कौर के पति मनमोहन सिंह ने बताया कि वह बरेली के रहने वाले हैं। हाल ही में वह यहां अपने परिवार के साथ शिफ्ट हुए हैं। अब वह इसकी शिकायत निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारियों से करेंगे।
113 वर्षीय सुनीता निकलीं 50 साल की
न्यू पुलिस लाइन कालोनी सेक्टर-26 के मकान नंबर-88 में जब संवाददाता 113 वर्षीय सुनीता से बात करने पहुंचे तो पता चला, वह कहीं और शिफ्ट हो गई हैं। उक्त मकान नंबर में रहने वाले व्यक्ति ने सुनीता के पति का मोबाइल नंबर दिया। इसके बाद सुनीता के पति को फोन लगाया गया तो बात हुई।
अशोक ने बताया कि उनकी पत्नी सुनीता की उम्र लगभग 50 साल है, लेकिन निर्वाचन कार्यालय से मिले वोटर कार्ड में उनकी पत्नी की उम्र 113 वर्ष अंकित है, जो गलत है। अशोक कुमार ने बताया कि वह पुलिस विभाग में कार्यरत थे। हाल ही में रिटायर हुए हैं। इसलिए वह सरकारी आवास छोड़कर अपने मकान में चले गए हैं। अब वह उम्र के साथ पता भी बदलवाएंगे।
अशोक ने बताया कि उनकी पत्नी सुनीता की उम्र लगभग 50 साल है, लेकिन निर्वाचन कार्यालय से मिले वोटर कार्ड में उनकी पत्नी की उम्र 113 वर्ष अंकित है, जो गलत है। अशोक कुमार ने बताया कि वह पुलिस विभाग में कार्यरत थे। हाल ही में रिटायर हुए हैं। इसलिए वह सरकारी आवास छोड़कर अपने मकान में चले गए हैं। अब वह उम्र के साथ पता भी बदलवाएंगे।
उम्र के साथ पता भी गलत
जिन लोगों ने पहली बार वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में दर्ज करवाया है, या नाम व पते में कोई संशोधन कराया है, उनके वोटर कार्ड में पते तक बदल दिए गए हैं। खास बात यह है कि बीएलओ फोन करके कार्ड तो पहुंचा रहे हैं, लेकिन खुद गलतियों से अनभिज्ञ हैं। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि सौ साल से अधिक उम्र के वोटरों की संख्या में अंतर है। अनुमान के मुताबिक, विभागीय लापरवाही और जल्दबाजी में कई गई गलतियों की जानकारी निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध करा दी गई है।
पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। आखिर यह गलती कैसे हो गई। गड़बड़ी कहां से हुई है, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। बीएलओ की जिम्मेदारी होती है कि वोटर आईडी कार्ड बनने के दौरान सभी तरह की वेरिफिकेशन कर ले। यह पता किया जाएगा कि क्या वेरिफिकेशन में गलती हुई है या कोई तकनीकी गड़बड़ी से ऐसा हुआ है।
- एके सिन्हा, मुख्य चुनाव अधिकारी
पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। आखिर यह गलती कैसे हो गई। गड़बड़ी कहां से हुई है, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। बीएलओ की जिम्मेदारी होती है कि वोटर आईडी कार्ड बनने के दौरान सभी तरह की वेरिफिकेशन कर ले। यह पता किया जाएगा कि क्या वेरिफिकेशन में गलती हुई है या कोई तकनीकी गड़बड़ी से ऐसा हुआ है।
- एके सिन्हा, मुख्य चुनाव अधिकारी