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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में चल रही विरासत की सियासत, बच्चों के ‘मोह’ में कई दिग्गज नेता
Tue, 16 Apr 2019 12:01 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 16 Apr 2019 12:01 PM IST
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चौधरी बीरेंद्र सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर हरियाणा में इस समय विरासत की सियासत की लहर चल रही है। कई दिग्गज नेताओं के बच्चे लॉन्च हो रहे हैं। नेताजी भी बच्चों के ‘मोह’ से घिरते जा रहे हैं। इस बार चुनाव में जहां विभिन्न पार्टियों के दिग्गज नेता अपने बच्चों को राजनीति में लांच करने की तैयारी में हैं, वहीं इन बच्चों के लिए भी ये चुनाव बड़ी चुनौती से कम नहीं होंगे। हरियाणा में राजनीतिक परिदृश्य देखा जाए तो यह सूबा परिवारवाद की राजनीति से अछूता नहीं है। दिग्गज नेता अपनी अगली पीढ़ी को सियासत में एंट्री करवाना और उन्हें स्थापित करना चाहते हैं।
इस कड़ी में एक नाम आता है हरियाणा के कद्दावर नेता व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह का, जिन्होंने बेटे को टिकट दिलवाने के लिए भाजपा के समक्ष अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि सर छोटू राम के नाती बीरेंद्र सिंह भाजपा हाईकमान से अपने बेटे बृजेंद्र सिंह के लिए हिसार से टिकट मांग रहे थे।
लेकिन भाजपा हाईकमान ने इसे परिवारवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला बताया, क्योंकि बीरेंद्र सिंह खुद केंद्र में मंत्री है और उनकी पत्नी प्रेमलता हरियाणा के उचाना से विधायक हैं। उधर, बीरेंद्र भी 73 बरस के हो गए हैं, इसलिए वे चाहते हैं कि उनकी राजनीतिक विरासत अब उनका आईएएस बेटा बृजेंद्र संभाले।
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इस कड़ी में एक नाम आता है हरियाणा के कद्दावर नेता व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह का, जिन्होंने बेटे को टिकट दिलवाने के लिए भाजपा के समक्ष अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि सर छोटू राम के नाती बीरेंद्र सिंह भाजपा हाईकमान से अपने बेटे बृजेंद्र सिंह के लिए हिसार से टिकट मांग रहे थे।
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लेकिन भाजपा हाईकमान ने इसे परिवारवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला बताया, क्योंकि बीरेंद्र सिंह खुद केंद्र में मंत्री है और उनकी पत्नी प्रेमलता हरियाणा के उचाना से विधायक हैं। उधर, बीरेंद्र भी 73 बरस के हो गए हैं, इसलिए वे चाहते हैं कि उनकी राजनीतिक विरासत अब उनका आईएएस बेटा बृजेंद्र संभाले।
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ऐसा ही वाक्या बिश्नोई परिवार में भी दिख रहा है। पूर्व सीएम भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई इस बार अपने बेटे भव्य बिश्नोई को राजनीति में लाना चाहते है। कांग्रेस हाईकमान हिसार सीट से उन्हें टिकट देना चाहता है, लेकिन वह अपने बेटे भव्य के लिए टिकट मांग रहे हैं। लिहाजा सीट पर नाम फाइनल नहीं हो पा रहा है। उधर, कांग्रेसी नेता एवं विधायक कुलदीप शर्मा करनाल सीट से अपने बेटे चाणक्य शर्मा को उतारना चाहते हैं। वह कांग्रेस हाईकमान से बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं, जबकि पार्टी चाहती है कि कुलदीप शर्मा चुनाव लड़ें।
पूर्व सीएम ओपी चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला भी इनेलो से अलग होकर अब अपने दोनों बेटों दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को राजनीति में स्थापित करने में डटे हैं। दुष्यंत वर्तमान में सांसद हैं। इनेलो टूट चुका है और अजय अपनी अलग पार्टी जननायक जनता दल (जजपा) के साथ मैदान में है। छात्र राजनीति करने वाले दिग्विजय चौटाला इसी साल जनवरी में जींद विधानसभा का उपचुनाव हार चुके हैं। मगर अजय अपने दोनों बेटों को मजबूत ढंग से राजनीति में स्थापित करने के लिए संघर्षरत है। अभय की पत्नी नैना चौटाला भी हरियाणा में विधायक है।
ओपी चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला भी अपने दोनों पुत्रों करण और अर्जुन चौटाला की सक्रिय राजनीति में एंट्री करवाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि भविष्य में इनेलो की कमान उनके दोनों बेटे संभालें। कांग्रेसी नेता पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा चौथी बार फिर रोहतक सीट से मैदान में है और भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने बेटे की जीत के लिए शिद्दत के साथ जुटे हैं। उधर, पूर्व सीएम बंसीलाल की पुत्रवधू कांग्रेस नेत्री एवं सीएलपी लीड किरण चौधरी भी अपने बेटी श्रुति चौधरी को भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से फिर जितवाने केलिए जीतोड़ मेहनत में जुटी है।
पूर्व सीएम ओपी चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला भी इनेलो से अलग होकर अब अपने दोनों बेटों दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को राजनीति में स्थापित करने में डटे हैं। दुष्यंत वर्तमान में सांसद हैं। इनेलो टूट चुका है और अजय अपनी अलग पार्टी जननायक जनता दल (जजपा) के साथ मैदान में है। छात्र राजनीति करने वाले दिग्विजय चौटाला इसी साल जनवरी में जींद विधानसभा का उपचुनाव हार चुके हैं। मगर अजय अपने दोनों बेटों को मजबूत ढंग से राजनीति में स्थापित करने के लिए संघर्षरत है। अभय की पत्नी नैना चौटाला भी हरियाणा में विधायक है।
ओपी चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला भी अपने दोनों पुत्रों करण और अर्जुन चौटाला की सक्रिय राजनीति में एंट्री करवाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि भविष्य में इनेलो की कमान उनके दोनों बेटे संभालें। कांग्रेसी नेता पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा चौथी बार फिर रोहतक सीट से मैदान में है और भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने बेटे की जीत के लिए शिद्दत के साथ जुटे हैं। उधर, पूर्व सीएम बंसीलाल की पुत्रवधू कांग्रेस नेत्री एवं सीएलपी लीड किरण चौधरी भी अपने बेटी श्रुति चौधरी को भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से फिर जितवाने केलिए जीतोड़ मेहनत में जुटी है।