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लोकसभा चुनाव 2019: तीन करोड़ खर्च, फिर भी पोलिंग बूथ पर नहीं पहुंचे 29 प्रतिशत मतदाता
Tue, 21 May 2019 10:59 AM IST
खुशबू गोयल
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 21 May 2019 10:59 AM IST
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पोलिंग बूथ पर लाइन में खड़े मतदाता
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए आयोग ने चंडीगढ़ में तीन करोड़ रुपये खर्च कर दिए लेकिन वोटिंग 70.62 प्रतिशत ही हुई, जबकि इसे 80 प्रतिशत पहुंचाने का लक्ष्य था। खास बात यह है कि लंबी-चौड़ी कवायद और पैसे खर्च करने के बावजूद वोटिंग प्रतिशत 2014 के लोकसभा चुनाव से करीब तीन प्रतिशत कम रहा। 2014 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ में 73.71 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। चुनाव आयोग के तमाम प्रयासों के बावजूद रविवार को हुए मतदान में करीब 29 फीसदी मतदाता पोलिंग बूथ पर नहीं पहुंचे।
बता दें कि मतदाता जागरूकता को लेकर पिछले सालों के मुकाबले इस बार अधिक कोशिशें की गईं, लेकिन अनुमान के मुताबिक कम वोटिंग हुई। अब निर्वाचन कार्यालय मंथन में जुट गया है। शहर में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए इस बार स्वीप की ओर से लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे थे। कार्यालयों से लेकर स्कूलों और अस्पतालों से लेकर चिकित्सकों तक में जागरूकता फैलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। इसके बावजूद सिटी का वोट प्रतिशत बढ़ नहीं सका। इसको लेकर निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारी भी हैरान हैं।
अगर आंकड़ों पर गौर करे तो पिछले लोकसभा चुनाव में यहां 73.71 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। यही वजह है कि इस बार वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए पिछले साल की अपेक्षा इस बार जागरूकता फैलाने के नाम पर अधिक धन भी खर्च किया गया, लेकिन वोट प्रतिशत बढ़ने के बजाय 70.62 ही रह गया। चुनाव का प्रतिशत कम होने की वजह तो चीफ इलेक्शन ऑफिसर अजॉय कुमार सिन्हा भी नहीं बता पा रहे हैं। उनका कहना है कि लोकल निर्वाचन कार्यालय की ओर से तमाम प्रयास हुए हैं। फिर कहां हम पिछड़े हैं, इस मंथन किया जाएगा।
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बता दें कि मतदाता जागरूकता को लेकर पिछले सालों के मुकाबले इस बार अधिक कोशिशें की गईं, लेकिन अनुमान के मुताबिक कम वोटिंग हुई। अब निर्वाचन कार्यालय मंथन में जुट गया है। शहर में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए इस बार स्वीप की ओर से लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे थे। कार्यालयों से लेकर स्कूलों और अस्पतालों से लेकर चिकित्सकों तक में जागरूकता फैलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। इसके बावजूद सिटी का वोट प्रतिशत बढ़ नहीं सका। इसको लेकर निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारी भी हैरान हैं।
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अगर आंकड़ों पर गौर करे तो पिछले लोकसभा चुनाव में यहां 73.71 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। यही वजह है कि इस बार वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए पिछले साल की अपेक्षा इस बार जागरूकता फैलाने के नाम पर अधिक धन भी खर्च किया गया, लेकिन वोट प्रतिशत बढ़ने के बजाय 70.62 ही रह गया। चुनाव का प्रतिशत कम होने की वजह तो चीफ इलेक्शन ऑफिसर अजॉय कुमार सिन्हा भी नहीं बता पा रहे हैं। उनका कहना है कि लोकल निर्वाचन कार्यालय की ओर से तमाम प्रयास हुए हैं। फिर कहां हम पिछड़े हैं, इस मंथन किया जाएगा।
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इस बार 15 प्रतिशत अधिक मिला बजट
साल 2014 के चुनाव के लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार सिटी को लोकसभा चुनाव कराने के लिए 15 प्रतिशत अधिक धन मिला था। चुनाव से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि इस बार पूरे चुनाव के लिए 3 करोड़ रुपये मिले थे। अधिकारी का कहना है कि चुनाव के बाद जो धन बचता है। उसे आयोग को वापस कर दिया जाता है।
पिछली बार कुछ पैसा वापस किया गया था लेकिन इस बार लगभग पूरा पैसा खर्च हो गया है। आयोग की सोच थी कि इस बार सिटी में रविवार को मतदान हो रहा है। छुट्टी का दिन होने के चलते अधिक से अधिक लोग वोट देने के लिए घर से बाहर निकलेंगे और मतदान 80 प्रतिशत के पार जाएगा, लेकिन हुआ इसके इतर। हालांकि सिटी के सेक्टरों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में वोट का प्रतिशत ठीक रहा है।
पिछली बार कुछ पैसा वापस किया गया था लेकिन इस बार लगभग पूरा पैसा खर्च हो गया है। आयोग की सोच थी कि इस बार सिटी में रविवार को मतदान हो रहा है। छुट्टी का दिन होने के चलते अधिक से अधिक लोग वोट देने के लिए घर से बाहर निकलेंगे और मतदान 80 प्रतिशत के पार जाएगा, लेकिन हुआ इसके इतर। हालांकि सिटी के सेक्टरों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में वोट का प्रतिशत ठीक रहा है।
किस साल कितनी वोटिंग
1991- 57.84 प्रतिशत
1996- 58.41 प्रतिशत
1998- 53.69 प्रतिशत
1999- 48.35 प्रतिशत
2004- 51.14 प्रतिशत
2009- 65.02 प्रतिशत
2014- 73.61 प्रतिशत
2019- 70.62 प्रतिशत
1996- 58.41 प्रतिशत
1998- 53.69 प्रतिशत
1999- 48.35 प्रतिशत
2004- 51.14 प्रतिशत
2009- 65.02 प्रतिशत
2014- 73.61 प्रतिशत
2019- 70.62 प्रतिशत