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लोकसभा चुनाव 2019: नए मोर्चों पर जीत के लिए छूटेंगे बाहरी प्रत्याशियों के पसीने, रण में कई धुरंधर

Thu, 25 Apr 2019 02:05 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 25 Apr 2019 02:05 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Challanges for Candidates for Victory in Haryana
सांकेतिक तस्वीर
हरियाणा में लोकसभा चुनाव 2019 की जंग में इस बार कई ऐसे धुरंधर हैं, जो अपना परंपरागत इलाका छोड़कर नई सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन इन सीटों पर जीतना इन धुरंधरों के लिए कड़ी चुनौती से कम नहीं है। जीत के लिए जहां इन प्रत्याशियों के पसीने छूटेंगे, वहीं चुनाव में जीत से पहले इन प्रत्याशियों को मतदाताओं का भरोसा जीतना होगा। इस बार टिकट वितरण में कुछ ऐसे समीकरण और हालात सामने आए कि सियासी दलों ने अपने प्रत्याशियों को नई सीटों की जिम्मेवारी सौंप दी।
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कांग्रेस ने इस बार भूपेंद्र सिंह हुड्डा की परंपरागत सीट को बदला है। चार बार रोहतक से सांसद रहे हुड्डा इस बार सोनीपत से चुनाव लड़ेंगे। उनके लिए यह नई सीट है, लेकिन उन्होंने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत इस इलाके से अपने पारिवारिक संबंध जोड़ते हुए शुरू कर दी है। आम आदमी पार्टी ने नवीन जयहिंद को फरीदाबाद लोकसभा सीट से उतारा है। जबकि जयहिंद रोहतक जिले के रहने वाले हैं। मगर जयहिंद को उम्मीद है कि दिल्ली से सटी होने की वजह से इस सीट पर केजरीवाल का जलवा काम कर सकता है।
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सिरसा के रहने वाले जननायक जनता पार्टी (जजपा) नेता दिग्विजय चौटाला ने जींद विधानसभा का उपचुनाव लड़ा था। लेकिन अब वे लोकसभा चुनाव के रण में हैं और पार्टी ने उन्हें सोनीपत से उतारा है। दिग्विजय के लिए भले ही यह इलाका भी नया है और वहां के मतदाता भी। लेकिन दिग्विजय को इस सीट पर अपने पड़दादा ताऊ देवीलाल के ‘प्रभाव’ की आस है।

सन 1980 के लोकसभा चुनाव में देवीलाल ने यहां से जनता पार्टी (सेक्यूलर) की टिकट पर चुनाव लड़ा था और 54.89 प्रतिशत वोट प्राप्त कर अपने प्रतिद्वंद्वी रणधीर सिंह को 1,57,791 वोटों से हराया था। यही सोच लेकर दिग्विजय ने इस शहर में लगी ताऊ देवीलाल की मूर्ति के सामने नतमस्तक होकर अपना चुनावी अभियान शुरू किया है।

पूर्व सांसद अरविंद शर्मा इस बार रोहतक से मैदान में है। लेकिन वे पहले 1996 में सोनीपत से और 2004 व 2009 में करनाल सीट से सांसद रह चुके हैं। भाजपा में आने के बाद इस बार भी अरविंद करनाल सीट से ही टिकट के लिए जोर लगा रहे थे। लेकिन भाजपा ने उन्हें रोहतक से मैदान में उतारा है, जो उनके लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

मनोहर सरकार में राज्यमंत्री नायब सैनी अंबाला के नारायणगढ़ हलके से विधायक हैं। लेकिन भाजपा ने उन्हें इस बार कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से उतारा है। अंबाला के नग्गल से चार बार के विधायक व पूर्व मंत्री रहे निर्मल सिंह को भी कांग्रेस ने इस बार कुरुक्षेत्र से उतारा है। यहां से पूर्व सांसद नवीन जिंदल ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।

यानी कुरुक्षेत्र की सीट पर भाजपा और कांग्रेस के धुरंधर दोनों ही अंबाला के निवासी हैं। उधर, इसी सीट पर इनेलो के प्रत्याशी अर्जुन चौटाला भी सिरसा के निवासी है।
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