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लोकसभा 2019: पंजाब में अमित शाह के बूथ मैनेजमेंट फॉर्मूले पर ही चुनाव लड़ेगी भाजपा, क्योंकि...
Wed, 10 Apr 2019 12:06 PM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 10 Apr 2019 12:06 PM IST
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पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन
- फोटो : Amar Ujala
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भारतीय जनता पार्टी पंजाब में अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बूथ मैनेजमेंट फॉर्मूले पर ही लोकसभा चुनाव 2019 का दंगल लड़ेगी। पार्टी के अपने कोटे की तीनों सीटों पर दस दिनों के अंदर पन्ना प्रमुख नियुक्त कर दिए जाएंगे। जो मतदान के दिन लोगों को पोलिंग स्टेशन तक लाकर वोट डलवाएंगे। भाजपा के पंजाब प्रभारी प्रभात झा और चुनाव प्रभारी कैप्टन अभिमन्यु ने लुधियाना में कोर ग्रुप और अपने तीन हलकों की चुनाव समितियों के सदस्यों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।
इसमें यह फैसला किया गया कि पार्टी बूथ स्तर पर सारी ताकत झोंकेगी। पार्टी पंजाब में गुरदासपुर, अमृतसर और होशियारपुर सीटों से लड़ती है। बाकी दस सीटों पर वह शिरोमणि अकाली दल की जूनियर पार्टनर है। पंजाब में अब तक निचले स्तर तक भाजपा का संगठनात्मक ढांचा खड़ा नहीं हो सका है। बूथ स्तर तक संगठन है, और देश के अन्य हिस्सों में भाजपा के बूथ के बाद पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख हैं, जो वोटर लिस्ट के एक पन्ने और आधे पन्ने से संबंधित हैं।
इनका काम सिर्फ इनके पन्ने में दर्ज लोगों से निरंतर संपर्क बनाना और उन्हें भाजपा के पाले में करना है। साथ ही मतदान के दिन सबसे पहले अपने पन्ने के वोटरों को घर से लाकर वोट डलवाना इनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन पंजाब में अभी तक अपनी तीनों सीटों पर भी भाजपा के पन्ना प्रमुख नहीं बन सके थे। क्योंकि प्रदेश प्रधान की नियुक्ति देर से हुई, फिर प्रदेश से लेकर जिलों की टीमें गठित हुईं। हर चार-पांच बूथों पर एक शक्ति केंद्र बनाने की योजना थी।
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इसमें यह फैसला किया गया कि पार्टी बूथ स्तर पर सारी ताकत झोंकेगी। पार्टी पंजाब में गुरदासपुर, अमृतसर और होशियारपुर सीटों से लड़ती है। बाकी दस सीटों पर वह शिरोमणि अकाली दल की जूनियर पार्टनर है। पंजाब में अब तक निचले स्तर तक भाजपा का संगठनात्मक ढांचा खड़ा नहीं हो सका है। बूथ स्तर तक संगठन है, और देश के अन्य हिस्सों में भाजपा के बूथ के बाद पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख हैं, जो वोटर लिस्ट के एक पन्ने और आधे पन्ने से संबंधित हैं।
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इनका काम सिर्फ इनके पन्ने में दर्ज लोगों से निरंतर संपर्क बनाना और उन्हें भाजपा के पाले में करना है। साथ ही मतदान के दिन सबसे पहले अपने पन्ने के वोटरों को घर से लाकर वोट डलवाना इनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन पंजाब में अभी तक अपनी तीनों सीटों पर भी भाजपा के पन्ना प्रमुख नहीं बन सके थे। क्योंकि प्रदेश प्रधान की नियुक्ति देर से हुई, फिर प्रदेश से लेकर जिलों की टीमें गठित हुईं। हर चार-पांच बूथों पर एक शक्ति केंद्र बनाने की योजना थी।
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बैठक के दौरान शीर्ष नेताओं ने कहा कि अब तक के चुनाव प्रचार अभियान में यह सामने आया है कि माहौल पार्टी के पक्ष में हैं। लोगों का रिस्पॉन्स अच्छा है, अगर उन्हें पार्टी के पक्ष में कनवर्ट कर वोट डलवा लिया गया तो जीत के चांस अच्छे हैं। इसलिए प्रदेश नेतृत्व को हिदायत दी गई है कि दस दिनों के अंदर कम से कम अपने तीन हलकों में पन्ना प्रमुख नियक्त कर लिए जाएं।
पन्ना प्रमुखों का है अहम योगदान
पड़ोसी राज्यों हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पार्टी के पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख काफी समय पहले से नियुक्त हैं। विधानसभा चुनाव में इनकी भूमिका बेहद अहम रही थी। भाजपा का मानना है कि जीत में इनका अहम रोल रहा है। दूसरे राज्यों में पार्टी की जीत का काफी दारोमदार इन पर ही रहता है।
इसलिए पंजाब में भी पार्टी जल्द से जल्द इनकी नियुक्ति करने की तैयारी में है। भाजपा की कोशिश है कि दस दिनों में अपनी तीन सीटों पर सारे बूथों पर पन्ना प्रमुख नियुक्त हो जाएं। इसके अलावा बाकी दस सीटों पर जहां भी संभव हो, इन्हें नियुक्त किया जाए।
पन्ना प्रमुखों का है अहम योगदान
पड़ोसी राज्यों हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पार्टी के पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख काफी समय पहले से नियुक्त हैं। विधानसभा चुनाव में इनकी भूमिका बेहद अहम रही थी। भाजपा का मानना है कि जीत में इनका अहम रोल रहा है। दूसरे राज्यों में पार्टी की जीत का काफी दारोमदार इन पर ही रहता है।
इसलिए पंजाब में भी पार्टी जल्द से जल्द इनकी नियुक्ति करने की तैयारी में है। भाजपा की कोशिश है कि दस दिनों में अपनी तीन सीटों पर सारे बूथों पर पन्ना प्रमुख नियुक्त हो जाएं। इसके अलावा बाकी दस सीटों पर जहां भी संभव हो, इन्हें नियुक्त किया जाए।