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लोकसभा चुनाव 2019: किरण खेर के बारे में पति अनुपम खेर से पूछे गए सात सवाल, यहां पढ़ें जवाब
Sun, 19 May 2019 07:04 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 19 May 2019 07:04 AM IST
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अनुपम खेर
- फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चंडीगढ़ से भाजपा प्रत्याशी किरण खेर के बारे में उनके पति एक्टर अनुपम ने एक बड़ा खुलासा किया है। अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर का कहना है कि अगर राष्ट्रवाद के लिए उन्हें कोई सोशल मीडिया पर ट्रोल करता है, तो उनके लिए वह तमगा है, उन्हें उस पर गर्व है। वीरवार को अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान अनुपम ने किरण के पांच साल के काम, बंगाल में चल रहे तनाव, मणिशंकर अय्यर के बयान सहित विभिन्न मुद्दों पर अमर उजाला के संवाददाता रिशु राज सिंह से विस्तार से बातचीत की।
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सवाल- पांच साल पहले किरण खेर कम बोलतीं थीं, लेकिन इस बार वे विरोधियों का जवाब मजबूत तर्क के साथ देती हैं। तेवर भी बदले-बदले हैं?
जवाब- किसी भी फील्ड में नए होते हैं तो फूंक-फूंक कर कदम रखते हैं। सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली ने भी धीमी शुरुआत की, लेकिन बाद में बहुत कुछ सीखे। दूसरी बात किरण ने काम किया है तो उनका विश्वास ज्यादा है, इसलिए इस बार उनके तेवर बदले हैं।
सवाल : अगर किरण खेर चुनाव जीततीं हैं, तो आप उन्हें किस मंत्री के रूप में देखना चाहेंगे?
जवाब : हमने इतना नहीं सोचा। वह तो शहरवासियों के काम करने में व्यस्त रहती हैं। न तो मैंने और न ही किरण ने इस बारे में सोचा होगा।
सवाल : कई दिनों से आप चंडीगढ़ में हैं। कोई ऐसी एक प्रॉब्लम जिसे आप किरण से कहकर दूर करना चाहेंगे?
जवाब : कॉलोनियों में जब जाता हूं तो लोग पानी की कमी के बारे में बोलते हैं, मकान की रजिस्ट्री नहीं हुई है। ऐसे कई काम हैं। मुझे पता है कि किरण और उनकी टीम इन सभी पर काम कर रही है। किरण खेर ने कई काम किए भी हैं। कुछ छोटे हैं, कुछ बड़े, लेकिन जो छोटे काम होते हैं, वो दिखने में छोटे होते हैं, लेकिन उनका असर दूर तक होता है। जैसे, 10 रुपये में भरपेट खाना। इस स्कीम का लाभ हजारों गरीब लोग रोजाना उठा रहे हैं।
जवाब- किसी भी फील्ड में नए होते हैं तो फूंक-फूंक कर कदम रखते हैं। सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली ने भी धीमी शुरुआत की, लेकिन बाद में बहुत कुछ सीखे। दूसरी बात किरण ने काम किया है तो उनका विश्वास ज्यादा है, इसलिए इस बार उनके तेवर बदले हैं।
सवाल : अगर किरण खेर चुनाव जीततीं हैं, तो आप उन्हें किस मंत्री के रूप में देखना चाहेंगे?
जवाब : हमने इतना नहीं सोचा। वह तो शहरवासियों के काम करने में व्यस्त रहती हैं। न तो मैंने और न ही किरण ने इस बारे में सोचा होगा।
सवाल : कई दिनों से आप चंडीगढ़ में हैं। कोई ऐसी एक प्रॉब्लम जिसे आप किरण से कहकर दूर करना चाहेंगे?
जवाब : कॉलोनियों में जब जाता हूं तो लोग पानी की कमी के बारे में बोलते हैं, मकान की रजिस्ट्री नहीं हुई है। ऐसे कई काम हैं। मुझे पता है कि किरण और उनकी टीम इन सभी पर काम कर रही है। किरण खेर ने कई काम किए भी हैं। कुछ छोटे हैं, कुछ बड़े, लेकिन जो छोटे काम होते हैं, वो दिखने में छोटे होते हैं, लेकिन उनका असर दूर तक होता है। जैसे, 10 रुपये में भरपेट खाना। इस स्कीम का लाभ हजारों गरीब लोग रोजाना उठा रहे हैं।
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सवाल- किरण खेर ने पिछले पांच सालों में कोई फिल्म नहीं की, अगर फिर वह चुनाव जीततीं है तो क्या अगले पांच साल भी वह फिल्मों से दूर रहेंगी?
जवाब- नहीं, चुनाव जीतने के बाद पांच साल तक वह कोई फिल्म नहीं करेंगी। अनिल कपूर ने कुछ दिन पहले उन्हें एक फिल्म ऑफर की, अनिल ने कहा कि पांच साल तक फिल्म नहीं की, अब तो कर लो लेकिन किरण खेर ने मना कर दिया है।
सवाल- बंगाल में जिस तरह से बीजेपी और टीएमसी के बीच तनाव बढ़ रहा हैं, उसे आप किस नजरिए से देखते हैं।
जवाब- चुनाव के दौरान पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगाती हैं। भाजपा उनका जवाब देने में सक्षम है, लेकिन वोट बैंक के लिए लोगों की आजादी नहीं छीननी चाहिए। जय श्री राम के नारे को लेकर देश के किसी भी हिस्से में विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए।
सवाल- आतंकवाद की वजह से आपने भी विस्थापन झेला, ठीक उसी तरह सिखों को 1984 में झेलना पड़ा। उसके बाद कोई कहे कि हुआ तो हुआ। इस तरह के बयान कितनी पीड़ा देते हैं।
जवाब- उन्हें तो पहले ही कई थप्पड़ पड़ चुके हैं, लेकिन बीते दिनों कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने एक पत्रकार को गाली दी। मुझे हैरानी हुई कि पत्रकारों के संगठन ने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया। जब कोई व्यक्ति इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करता है तो वह अपनी हैसियत का एहसास कराता है।
जवाब- नहीं, चुनाव जीतने के बाद पांच साल तक वह कोई फिल्म नहीं करेंगी। अनिल कपूर ने कुछ दिन पहले उन्हें एक फिल्म ऑफर की, अनिल ने कहा कि पांच साल तक फिल्म नहीं की, अब तो कर लो लेकिन किरण खेर ने मना कर दिया है।
सवाल- बंगाल में जिस तरह से बीजेपी और टीएमसी के बीच तनाव बढ़ रहा हैं, उसे आप किस नजरिए से देखते हैं।
जवाब- चुनाव के दौरान पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगाती हैं। भाजपा उनका जवाब देने में सक्षम है, लेकिन वोट बैंक के लिए लोगों की आजादी नहीं छीननी चाहिए। जय श्री राम के नारे को लेकर देश के किसी भी हिस्से में विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए।
सवाल- आतंकवाद की वजह से आपने भी विस्थापन झेला, ठीक उसी तरह सिखों को 1984 में झेलना पड़ा। उसके बाद कोई कहे कि हुआ तो हुआ। इस तरह के बयान कितनी पीड़ा देते हैं।
जवाब- उन्हें तो पहले ही कई थप्पड़ पड़ चुके हैं, लेकिन बीते दिनों कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने एक पत्रकार को गाली दी। मुझे हैरानी हुई कि पत्रकारों के संगठन ने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया। जब कोई व्यक्ति इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करता है तो वह अपनी हैसियत का एहसास कराता है।
सवाल- आजकल राष्ट्रहित की बात करने भर से ही लोग ट्रोल होने लगते हैं, आप भी कई बार हुए हैं। आपको कैसा लगता है?
जवाब- अगर राष्ट्रवाद के लिए मुझे कोई ट्रोल करता है तो वह मेरे लिए तमगा है। ट्रोल करने वाले कमजोर लोग होते हैं। कमजोर लोग ही बुराई करते हैं। मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैंने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है, अपने बलबूते पर पहुंचा हूं। वैसे भी ताकतवर लोग कभी किसी को ट्रोल और बुराई नहीं करते हैं। मेरा मानना है कि राष्ट्रवाद धर्म होना चाहिए। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि धर्म के साथ हम पैदा होते हैं लेकिन राष्ट्रवाद के साथ बड़े और थैंकफुल होना सीखते हैं।
सवाल- बॉलीवुड में कुछ ऐसे लोग हैं जो प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर अनाप-शनाप सोशल मीडिया पर लिखते हैं, उनके बारे में आपकी क्या राय है?
जवाब- उन लोगों के बोलने से झूठ सच नहीं होता। इस देश की खासियत यह है कि आप प्रधानमंत्री को भी बुरा-भला कह सकते हैं और उसके बाद भी कह देते हैं कि वह इस देश में सुरक्षित नहीं हैं। मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल कुछ लोग ऐसे करते हैं।
जवाब- अगर राष्ट्रवाद के लिए मुझे कोई ट्रोल करता है तो वह मेरे लिए तमगा है। ट्रोल करने वाले कमजोर लोग होते हैं। कमजोर लोग ही बुराई करते हैं। मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैंने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है, अपने बलबूते पर पहुंचा हूं। वैसे भी ताकतवर लोग कभी किसी को ट्रोल और बुराई नहीं करते हैं। मेरा मानना है कि राष्ट्रवाद धर्म होना चाहिए। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि धर्म के साथ हम पैदा होते हैं लेकिन राष्ट्रवाद के साथ बड़े और थैंकफुल होना सीखते हैं।
सवाल- बॉलीवुड में कुछ ऐसे लोग हैं जो प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर अनाप-शनाप सोशल मीडिया पर लिखते हैं, उनके बारे में आपकी क्या राय है?
जवाब- उन लोगों के बोलने से झूठ सच नहीं होता। इस देश की खासियत यह है कि आप प्रधानमंत्री को भी बुरा-भला कह सकते हैं और उसके बाद भी कह देते हैं कि वह इस देश में सुरक्षित नहीं हैं। मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल कुछ लोग ऐसे करते हैं।