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लोकसभा 2019: रतन लाल कटारिया पर भाजपा ने तीसरी बार खेला दांव, पर आसान नहीं जीत की राह

Mon, 08 Apr 2019 04:51 PM IST
खुशबू गोयल अवधेश शुक्ला, अमर उजाला, पंचकूला
अवधेश शुक्ला, अमर उजाला, पंचकूला Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 08 Apr 2019 04:51 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, BJP Candidate from Amabala Ratan Lal Kataria Political Career
रतन लाल कटारिया
68 साल के रतन लाल कटारिया पर भाजपा ने तीसरी बार दांव खेला है, लेकिन इस बार अंबाला लोकसभा की सीट को जीत पाना भाजपा के लिए आसान नहीं है। इसके पीछे एक नहीं कई कारण हैं। पहला तो यह है कि पांच साल पहले और अब के राजनीतिक समीकरण में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है।
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वहीं, यदि सांसद निधि से विकास की बात करें तो वह जीरो है। सांसद रतनलाल कटारिया भले ही माता मनसा देवी कांप्लेक्स (एमडीसी) सेक्टर-4 में रहते हैं, लेकिन यहां की जनता जर्नादन से वह काफी दूर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने जिले के किसी गांव को भी गोद तक लेना मुनासिब नहीं समझा। इससे यहां की जनता में सांसद के प्रति रोष है।
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लोगों की मानें तो सांसद की राजनीति केवल वोट तक ही सीमित रही है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जिले के किसी भी गांव में विकास नहीं करवाया है। जबकि सांसद को विकास कार्य के लिए सालाना पांच करोड़ की सांसद निधि मिलती है।
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बेदाग छवि के चलते मिली टिकट

तजुर्बे और पुराने चेहरे के चलते ही भाजपा ने सांसद रतनलाल कटारिया को अंबाला लोकसभा आरक्षित सीट से मैदान में उतारा है। हालांकि इसी सीट से राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा से वह लगातार दो बार हार चुके हैं, लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में उन्होंने जीत का रिकार्ड बनाया था।

यही कारण रहा कि अपने लंबे राजनीतिक तजुर्बे और बेदाग छवि के चलते उन्हें टिकट मिली है। भले ही भाजपा की सूची में कटारिया का नाम शनिवार को सार्वजनिक किया गया है, लेकिन उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में पहले ही भागीदारी शुरू कर दी थी।

हालांकि अंबाला छावनी से विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और कटारिया के बीच में दूरियां भी रहीं, लेकिन अब जीतने के लिए सभी नेता एक मंच पर आ चुके हैं। राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी, शहर विधायक असीम गोयल, जिलाध्यक्ष जगमोहन कुमार कटारिया के नजदीकी रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दिल में भी कटारिया ने जगह बना रखी है।

कई अहम पद पर रह चुके हैं कटारिया

कटारिया अपने राजनीतिक जीवन में विधायक, सांसद, संसदीय सचिव, वेयर हाउसिंग के चेयरमैन रह चुके हैं। कटारिया सांसद के रूप में अमेरिका में न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। यमुनानगर के गांव संधाली में 19 दिसंबर 1951 को जन्मे रतन लाल कटारिया अब पंचकूला के मनसा देवी कांप्लेक्स में रह रहे हैं।

छावनी के एसडी कॉलेज से बीए ऑनर्स करने के बाद केयूके से राजनीति शास्त्र में एमए तथा फिर वहीं से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। कटारिया को राष्ट्र गीत गाने, कविताएं लिखने, शायरी करने और अच्छी पुस्तकों को पढ़ने का भी शौक है। पिता ज्योति राम और माता परिवारी देवी की संतान रतन लाल कटारिया के परिवार में उनकी पत्नी बंतो कटारिया के अलावा एक बेटा तथा दो बेटियां हैं।

 

1980 में पहली बार भाजयुमो उपाध्यक्ष बने

अपने राजनीतिक जीवन में उन्हें पहली बार 1980 में भाजयुमो का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद वह पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश मंत्री, अनुसूचित जाति मोर्चा के अखिल भारतीय महामंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री तक के सफर के बाद उन्हें जून 2001 से सितंबर 2003 तक भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया।

वह 1980 से लगातार भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य चले आ रहे हैं। वर्ष 1987 में रादौर विधानसभा क्षेत्र से वह पहली बार विधायक बने। 1987-90 में प्रदेश सरकार के संसदीय सचिव एवं हरिजन कल्याण निगम के चेयरमैन बने। जून 1997 से जून 1999 तक वह हरियाणा वेयर हाउसिंग के चेयरमैन रहे।

6 अक्टूबर 1999 को अंबाला से सांसद निर्वाचित हुए थे। वह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जापान, हांगकांग, सिंगापुर, थाईलैंड तथा संयुक्त अरब अमीरात की यात्राएं कर चुके हैं।

आखिर भाजपा ने कटारिया पर क्यों जताया विश्वास

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने आखिर अंबाला लोकसभा संसदीय क्षेत्र से मौजूदा सांसद रतन लाल कटारिया पर भी विश्वास क्यों जताया और तीसरी बार उन्हें टिकट देकर मैदान में क्यों उतारा। जबकि इस बार पिछले चुनाव जैसी स्थिति नहीं है। इस पर कटारिया के अलावा उनकी पत्नी व हरियाणा भाजपा की उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, पंजाबी सूफी गायक व राष्ट्रीय सफाई आयोग के वाइस चेयरमैन हंसराज हंस का भी नाम इस लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार के लिए चल रहा था। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने केवल कटारिया पर ही दांव खेला। इसके पीछे का मुख्य कारण मुख्यमंत्री के करीब होना माना जा रहा है।

 
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