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लोकसभा चुनाव 2019: पैरोल पर आते ही डट गए अजय चौटाला, पर जेजेपी के लिए आसान नहीं होगी राह

Tue, 16 Apr 2019 12:43 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 16 Apr 2019 12:43 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Ajay Chautala Campaigning for Dushyant Chautala Party JJP
अजय चौटाला - फोटो : फाइल फोटो
पैरोल मिलते ही अजय चौटाला लोकसभा चुनाव 2019 के रण में उतर गए, लेकिन बेटे दुष्यंत की पार्टी जेजेपी के लिए संसद तक की राह आसान नहीं होगी। पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल और पूर्व सीएम भजनलाल के गढ़ हिसार में इस बार चुनावी दंगल बेहद रोचक होने वाला है। देवीलाल के पड़पोते जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला अगर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनकी संसद पहुंचने की राह आसान नहीं होगी।
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यहां से भाजपा ने कद्दावर जाट नेता बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस से भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई या उनके पोते भव्य बिश्नोई मैदान में उतर सकते हैं। इनेलो भी यहां से कोई मजबूत प्रत्याशी देने का सौ फीसदी प्रयास करेगी, चूंकि चाचा अभय चौटाला किसी सूरत में नहीं चाहेंगे कि पहला चुनाव लड़ रही जेजेपी से दुष्यंत या कोई और उम्मीदवार जीत हासिल करे।
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इसलिए भाजपा, कांग्रेस और इनेलो की घेराबंदी को देखते हुए बेटे दुष्यंत को चुनावी रण में अजेय बनाने के लिए पिता अजय चौटाला खुद मैदान में डट गए हैं।

बेटे को जिताने की पुरजोर कोशिश कर रहे

अजय चौटाला को तिहाड़ जेल से बिना शर्त पैरोल मिली और वह आते ही जेजेपी की चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए। अजय चौटाला के लिए हिसार सीट नाक का सवाल है। चूंकि, जेजेपी का यह पहला लोकसभा चुनाव है। दुष्यंत चौटाला इससे पहले इनेलो टिकट पर हिसार से सांसद बने थे, अजय किसी सूरत में नहीं चाहेंगे कि जेजेपी के चुनाव चिह्न पर दुष्यंत को पहले चुनाव में यहां से हार का मुंह देखना पड़े।

इसलिए अजय चौटाला ने चुनाव के चरम पर पहुंचने से ठीक पहले पैरोल पर बाहर आकर जेजेपी की चुनावी कमान अपने हाथ में ले ली है। अजय चौटाला भी एक बार हिसार से किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा था। भजन लाल की मृत्यु के बाद 2011 के उपचुनाव में कुलदीप बिश्नोई और अजय चौटाला आमने-सामने थे। हजकां टिकट पर कुलदीप बिश्नोई ने सहानुभूति पाकर अपना गढ़ बचा लिया था।

हालांकि, 2014 के चुनाव में दुष्यंत यहां से कुलदीप बिश्नोई को हराकर पिता की हार का हिसाब बराबर कर चुके हैं।

इस बार त्रिकोणीय हो गया मुकाबला

इस बार दुष्यंत का मुकाबला कुलदीप या उनके बेटे भव्य बिश्नोई से हो सकता है। भाजपा टिकट पर बृजेंद्र चुनाव मैदान में हैं, इसलिए टक्कर त्रिणोकीय बन गई है। अब दारोमदार अजय चौटाला पर है कि वह कैसे बेटे दुष्यंत चौटाला की नैया हिसार में पार लगाते हैं। अजय खुद एक बार भिवानी से 1999 में सांसद रह चुके हैं, जबकि 1998 में उन्हें बंसी लाल के बेटे सुरेंद्र सिंह, 2004 में कुलदीप बिश्नोई व 2009 में श्रुति चौधरी से यहां से हार का मुंह देखना पड़ा।

चार भाजपा विधायक, एक इनेलो विधायक भी हो चुके शामिल
हिसार संसदीय क्षेत्र में उचाना कलां, आदमपुर, उकलाना, नारनौंद, हांसी, बरवाला, हिसार, नलवा और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्र आते हैं। उचाना कलां से बीरेंद्र सिंह की पत्नी और बृजेंद्र की माता प्रेम लता विधायक हैं। नारनौंद से वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु विधायक हैं। हिसार से डॉ. कमल गुप्ता विधायक हैं, उन्हें सरकार ने चेयरमैन भी बनाया हुआ है।

नलवा से इनेलो विधायक रणबीर गंगवा भाजपा में शामिल हो चुके हैं। वे भी हिसार से टिकट की दौड़ में थे, उनकी नाराजगी भी भाजपा को दूर करनी होगी। बवानीखेड़ा से बिशंभर सिंह भाजपा विधायक हैं। आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस विधायक हैं, हांसी से उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई कांग्रेस विधायक है। उकलाना से अनूप धानक इनेलो विधायक थे, बागी होकर जेजेपी के साथ जा चुके हैं। बरवाला से वेद नारंग इनेलो विधायक हैं।
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