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लोहड़ी 2017: उत्साह का पर्व है लोहड़ी, देखिए शुभ मुहूर्त, नियम व तरीके
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:12 AM IST
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उत्साह का पर्व है लोहड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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आज लोहड़ी का त्योहार है। देश भर इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी का त्योहार शुक्रवार को मनाया जाएगा। सूर्यास्त के बाद ही लोहड़ी में अग्नि प्रज्ज्वलित किया जा सकता है। यह बात सेक्टर-15 के जयश्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र ने कही। उन्होने बताया कि शुक्रवार को दोपहर दो बजकर 40 मिनट पर द्वितीय तिथि का शुभारंभ हो रहा है। रात 11 बजकर 50 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। सूर्यास्त शाम पांच बजकर 37 मिनट पर होगा।
मिश्र ने कहा कि लोहड़ी के अगले दिन शनिवार को मकर संक्रांति है। सूर्य मकर राशि में सुबह सात बजकर 40 मिनट पर प्रवेश करेगा। मकर संक्रांति के बाद सभी शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। अगर शुभ समय पर लोहड़ी को जलाया जाएगा तो घर में सुख शांति का वास होगा और सारा साल प्यार बरसता रहेगा। लाभ होता रहेगा।
इस दिन स्नान, दान, जप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर किया दान सौ गुणा होकर प्राप्त होता है। इस दिन घी और कंबल दान का विशेष महत्व है। सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और गंगा तट पर दान का विशेष महत्व है। अगर किसी कारण गंगा स्नान के लिए न जा सके तो आप खाली बाल्टी में गंगाजल की बूंदे डालकर उसमें तिल डालें इसके बाद पानी भरकर स्नान करें। इससे गंगा स्नान का फल प्राप्त होगा।
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मिश्र ने कहा कि लोहड़ी के अगले दिन शनिवार को मकर संक्रांति है। सूर्य मकर राशि में सुबह सात बजकर 40 मिनट पर प्रवेश करेगा। मकर संक्रांति के बाद सभी शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। अगर शुभ समय पर लोहड़ी को जलाया जाएगा तो घर में सुख शांति का वास होगा और सारा साल प्यार बरसता रहेगा। लाभ होता रहेगा।
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इस दिन स्नान, दान, जप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर किया दान सौ गुणा होकर प्राप्त होता है। इस दिन घी और कंबल दान का विशेष महत्व है। सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और गंगा तट पर दान का विशेष महत्व है। अगर किसी कारण गंगा स्नान के लिए न जा सके तो आप खाली बाल्टी में गंगाजल की बूंदे डालकर उसमें तिल डालें इसके बाद पानी भरकर स्नान करें। इससे गंगा स्नान का फल प्राप्त होगा।
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क्या है लोहड़ी?
लोहड़ी
- फोटो : File Photo
कड़ाके की ठंड को विदाई और घर में आई नई खुशियों के स्वागत का पर्व है लोहड़ी। सिख समुदाय सर्दियों की विदाई के साथ ही नई खुशियों को सबके साथ बांटते हुए लोहड़ी का जश्न मनाते हैं। घर-आंगन में ‘माई लोहड़ी वे, जीवे तेरी जोड़ी वे...’ सरीखे गिद्दा गीतों के धमाल के साथ लोहड़ी जलाई जाती है।
इसमें मूंगफली, मक्के का लावा, चने, रेवड़ी का भुना जलती लोहिड़ी में छुड़ाते हैं। राजधानी में कहीं नई बहू के आने से आंगन में खुशियां उतरी हैं तो किलकारी गूंजने से खुशियों की फसल लहलहा उठी है। नन्हे-मुन्नों से लेकर दादा-दादी, नाना-नानी तक सब लोहड़ी की तैयारियों में जुटे हैं।
यार-दोस्तों के साथ महफिल जमाने की तैयारियां चल रही हैं तो ‘पिंड’ से भी लोगों के आने-जाने का सिलसिला शुरू होने वाला है। घर आई नई खुशियां कैसे मनाएंगे परिवार के लोग और क्या हैं उनके लिए लोहड़ी के मायने। ‘अमर उजाला’ ने जानी उनकी तैयारियां।
इसमें मूंगफली, मक्के का लावा, चने, रेवड़ी का भुना जलती लोहिड़ी में छुड़ाते हैं। राजधानी में कहीं नई बहू के आने से आंगन में खुशियां उतरी हैं तो किलकारी गूंजने से खुशियों की फसल लहलहा उठी है। नन्हे-मुन्नों से लेकर दादा-दादी, नाना-नानी तक सब लोहड़ी की तैयारियों में जुटे हैं।
यार-दोस्तों के साथ महफिल जमाने की तैयारियां चल रही हैं तो ‘पिंड’ से भी लोगों के आने-जाने का सिलसिला शुरू होने वाला है। घर आई नई खुशियां कैसे मनाएंगे परिवार के लोग और क्या हैं उनके लिए लोहड़ी के मायने। ‘अमर उजाला’ ने जानी उनकी तैयारियां।