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आस्था में डूबा लोहगढ़: मां चंद्रघंटा की भक्ति से गूंजा विश्वकर्मा मंदिर
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जीरकपुर। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर लोहगढ़ के श्री विश्वकर्मा सनातन धर्म मंदिर में तीसरे नवरात्र के दिन श्रद्धा और भक्ति का भव्य संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर माता रानी को चुनरी अर्पित की और भोग लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर परिसर भक्तिमय भजनों और जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में नतमस्तक हुए। भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।
मंदिर के पुजारी पंडित राकेश शर्मा ने श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन का धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा को शौर्य, साहस और सौम्यता की प्रतीक माना जाता है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है, जिस कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
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पंडित शर्मा ने कहा कि मां चंद्रघंटा की आराधना करने से भय का नाश होता है, जीवन में शांति और साहस का संचार होता है तथा भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है। मां का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी है जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।
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मंदिर परिसर भक्तिमय भजनों और जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में नतमस्तक हुए। भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।
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मंदिर के पुजारी पंडित राकेश शर्मा ने श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन का धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा को शौर्य, साहस और सौम्यता की प्रतीक माना जाता है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है, जिस कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
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पंडित शर्मा ने कहा कि मां चंद्रघंटा की आराधना करने से भय का नाश होता है, जीवन में शांति और साहस का संचार होता है तथा भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है। मां का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी है जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।