फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Lockdown, Migrant Workers Emotional Story

बेबसीः तीन दिन पानी पीकर चलाया काम, भूख से तड़प उठा मासूम तो साइकिल बेच मिटाई भूख

Tue, 26 May 2020 05:54 PM IST
खुशबू गोयल संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला सिटी
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला सिटी Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 26 May 2020 05:54 PM IST
विज्ञापन
Lockdown, Migrant Workers Emotional Story
जौनपुर के लिए पत्नी और बेटे संग निकला प्रवासी - फोटो : अमर उजाला
पंजाब के नवां शहर से पत्नी और 10 वर्षीय बेटे के साथ जौनपुर के लिए साइकिल से निकला प्रवासी मजदूर तीन दिन का सफर कर सोमवार को अंबाला पहुंचा। चिलचिलाती धूप में भूख से तड़पता परिवार पानी के सहारे तीन दिनों तक पेट की आग बुझाता रहा, लेकिन 10 साल का मासूम जब भूख से तड़प उठा तो मजबूरी में पिता ने कबाड़ी को 200 रुपये में साइकिल बेच दी और बेटे को खाना खिलाया।
विज्ञापन


प्रशासन की ओर से तमाम प्रयास के बाद भी मजदूरों को पैदल और साइकिलों से पलायन जारी है। काम बंद होने और पैसे खत्म होने पर प्रवासी मजदूर अपने घरों की ओर कूच कर रहे है। जौनपुर के महेंद्र भी इन्हीं प्रवासी मजदूरों में से एक हैं जो तीन दिन तक साइकिल चलाकर पत्नी और बेटे को लेकर अंबाला पहुंचे थे। तीन दिनों से पूरे परिवार को खाने के लिए कुछ भी नसीब नहीं हुआ।
विज्ञापन


मां-बाप तो जैसे-तैसे भूख को दबाए रहे, लेकिन तीसरे दिन 10 वर्षीय मासूम भूख से तड़प उठा। असहाय मां-बाप ने पहले तो पानी से मासूम की भूख मिटानी चाही, लेकिन जब मासूम इसके लिए तैयार नहीं हुआ और खाने की जिद पर अड़ा रहा तो मजबूरी में पिता ने उस सवारी को ही बेच डाला जिस पर वह लुधियाना से अंबाला तक का सफर तय करके आए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

कबाड़ी ने भी मजबूरी का फायदा उठाया और साइकिल के बदले 200 रुपये प्रवासी श्रमिक को थमा दिए, लेकिन तीन दिन से भूख से तड़प रहे मासूम और पत्नी तथा खुद की एक समय की भूख मिटाने के लिए शायद यह पैसे काफी थे। यही कारण है कि इन पैसों से जैसे ही मासूम को भोजन मिला तो पिता की आंखें राहत और सुकून से छलक उठीं।

प्रवासी ही बना सहारा, साइकिल होते हुए भी दोनों परिवार पैदल जौनपुर रवाना
जगदीश भी पंजाब के नवां शहर से परिवार संग साइकिल पर सवार होकर यूपी के जौनपुर के लिए जा रहा था। जैसे ही यह परिवार तपती गर्मी से राहत पाने के लिए मंजी साहिब गुरुद्वारा फ्लाईओवर के नीचे रुका। वहीं जगदीश की मुलाकात महेंद्र से हुई। महेंद्र ने अपनी लाचारी जब जगदीश को सुनाई तो जगदीश ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया। उसने महेंद्र का सामान अपनी साइकिल पर रखवा लिया। इस तरह से यह दोनों परिवार भीषण गर्मी में पैदल ही अपनी मंजिल की ओर बढ़ गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed