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लॉकडाउनः चंडीगढ़ से प्रवासी श्रमिकों के पलायन का असर, लोडिंग-अनलोडिंग के दाम हुए डबल
Thu, 21 May 2020 12:21 PM IST
खुशबू गोयल
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 21 May 2020 12:21 PM IST
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लोडिंग अनलोडिंग का काम
- फोटो : अमर उजाला
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प्रवासी मजदूरों के पलायन का असर अब उद्योग जगत पर दिखने लगा है। श्रमिकों के अभाव में सामानों की लोडिंग और अनलोडिंग के दाम ट्रांसपोर्टरों ने दोगुने कर दिए हैं। लॉकडाउन से पहले एक टन सामान की लोडिंग/अनलोडिंग के जहां 125 रुपये लिए जाते थे, वहीं, अब यह कीमत 225 से 250 रुपये तक हो गई है। पहले से ही भारी नुकसान झेल चुके उद्यमियों को लोडिंग/अनलोडिंग की बढ़ी कीमत झटका दे रही है। बता दें कि इंडस्ट्रियल एरिया फेज वन और टू में लगभग 2000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। यहां लगभग 25 हजार से ज्यादा श्रमिक कार्य करते हैं।
इसके अतिरिक्त ट्रांसपोर्टरों के यहां भी 5000 से ज्यादा लोडिंग/अनलोडिंग करने वाले श्रमिक कार्य करते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के रहने वाले श्रमिक दिहाड़ी पर कार्य कर रहे थे लेकिन लॉकडाउन की समय सीमा लगातार बढ़ने के कारण चंडीगढ़ से प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। चंडीगढ़ से अब तक 30 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर पलायन कर चुके हैं, जिसका सीधा असर चंडीगढ़ के उद्योग पर पड़ा है।
यदि लॉकडाउन की समय सीमा और बढ़ाई जाएगी तो जो श्रमिक अभी यहां रुके हुए हैं वह भी पलायन करने को विवश हो जाएंगे। श्रमिकों के अभाव में सामान की लोडिंग/अनलोडिंग के दामों में करीब दोगुने की वृद्धि हो गई है। इससे उद्यमी खासे परेशान हैं। उद्यमियों का कहना है कि एक तो पहले से ही उद्योग जगत बंद पड़ा है। इसके बाद कुछ छूट के बाद जो इकाईयां खुली हैं उन्हें महंगी लोडिंग/अनलोडिंग और भी नुकसान पहुंचा रही है। कुछ उद्यमियों ने बताया कि जल्द ही यूटी प्रशासन को श्रमिकों को रोकने के लिए कोई विशेष नीति बनानी होगी नहीं तो उद्योग जगत पूरी तरह से ठप हो जाएगा।
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इसके अतिरिक्त ट्रांसपोर्टरों के यहां भी 5000 से ज्यादा लोडिंग/अनलोडिंग करने वाले श्रमिक कार्य करते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के रहने वाले श्रमिक दिहाड़ी पर कार्य कर रहे थे लेकिन लॉकडाउन की समय सीमा लगातार बढ़ने के कारण चंडीगढ़ से प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। चंडीगढ़ से अब तक 30 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर पलायन कर चुके हैं, जिसका सीधा असर चंडीगढ़ के उद्योग पर पड़ा है।
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यदि लॉकडाउन की समय सीमा और बढ़ाई जाएगी तो जो श्रमिक अभी यहां रुके हुए हैं वह भी पलायन करने को विवश हो जाएंगे। श्रमिकों के अभाव में सामान की लोडिंग/अनलोडिंग के दामों में करीब दोगुने की वृद्धि हो गई है। इससे उद्यमी खासे परेशान हैं। उद्यमियों का कहना है कि एक तो पहले से ही उद्योग जगत बंद पड़ा है। इसके बाद कुछ छूट के बाद जो इकाईयां खुली हैं उन्हें महंगी लोडिंग/अनलोडिंग और भी नुकसान पहुंचा रही है। कुछ उद्यमियों ने बताया कि जल्द ही यूटी प्रशासन को श्रमिकों को रोकने के लिए कोई विशेष नीति बनानी होगी नहीं तो उद्योग जगत पूरी तरह से ठप हो जाएगा।
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हर हफ्ते हो रहा 100 करोड़ का नुकसान
लॉकडाउन के कारण बंद पड़े चंडीगढ़ के उद्योग को हर सप्ताह 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। 20 मार्च को कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से अब तक उद्यमियों को 700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। उद्यमियों ने चिंता जताई है कि यदि जल्द ही पूरी तरह से उद्योग नहीं खुलता है तो वह कंगाल हो जाएंगे।
60 प्रतिशत ही आ रहे श्रमिक
यूटी प्रशासन के द्वारा लॉकडाउन 4.0 में छूट दिए जाने के बाद चंडीगढ़ में लगभग 70 प्रतिशत ही औद्योगिक इकाईयां शुरू हो पाई हैं। वह भी आधी अधूरी तैयारियों के साथ ही शुरू हुई हैं। प्रवासी मजदूरों के पलायन के बाद इकाईयों में कुल स्टाफ में 60 प्रतिशत ही स्टाफ पहुंच पा रहा है। इससे उनके उत्पादन पर भी फर्क पड़ रहा है। हालांकि उद्यमियों ने यह संभावना जताई है कि तीन माह में हालात कुछ सामान्य हो पाएंगे।
कुछ इकाईयां तो खुल गई हैं, लेकिन श्रमिकों के अभाव में उत्पादन अभी पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाया है। प्रवासी मजदूरों को रोकने के लिए यूटी प्रशासन को कोई ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही काउंसलिंग की भी व्यवस्था करनी चाहिए।
- नवीन मंगलानी, अध्यक्ष, चैंबर आफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
60 प्रतिशत ही आ रहे श्रमिक
यूटी प्रशासन के द्वारा लॉकडाउन 4.0 में छूट दिए जाने के बाद चंडीगढ़ में लगभग 70 प्रतिशत ही औद्योगिक इकाईयां शुरू हो पाई हैं। वह भी आधी अधूरी तैयारियों के साथ ही शुरू हुई हैं। प्रवासी मजदूरों के पलायन के बाद इकाईयों में कुल स्टाफ में 60 प्रतिशत ही स्टाफ पहुंच पा रहा है। इससे उनके उत्पादन पर भी फर्क पड़ रहा है। हालांकि उद्यमियों ने यह संभावना जताई है कि तीन माह में हालात कुछ सामान्य हो पाएंगे।
कुछ इकाईयां तो खुल गई हैं, लेकिन श्रमिकों के अभाव में उत्पादन अभी पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाया है। प्रवासी मजदूरों को रोकने के लिए यूटी प्रशासन को कोई ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही काउंसलिंग की भी व्यवस्था करनी चाहिए।
- नवीन मंगलानी, अध्यक्ष, चैंबर आफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज