फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Literature Programme in UT Guest House

दुनिया जहान से आए यहां, बस अपने ही पहुंचे

Sun, 12 Jan 2014 01:41 PM IST
श्ांकर सिंह
श्ांकर सिंह Updated Sun, 12 Jan 2014 01:41 PM IST
विज्ञापन
Literature Programme in UT Guest House
यूटी गेस्ट हाउस में साहित्य अकादमी द्वारा ‘जुबिलेशन इन जनवरी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें साहित्य जगत से जुडे़ बड़े नामों ने शिरकत की, जिनमें मनोरमा जफा, बुलबुल शर्मा, सागरी छाबड़ा और सोनेट मंडल शामिल थे।
विज्ञापन


कार्यक्रम में साहित्य से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-चर्चा भी हुई। याद रहे कि चंडीगढ़ साहित्य अकादमी हर साल देश भर अच्छे लेखकों को बुलाती है, लेकिन शहर के थियेटर ग्रुप इसमें शिरकत क्यों नही करते?
विज्ञापन


यह सवाल जब उठा तो अकादमी अध्यक्ष कमल अरोड़ा से कोई संतुष्टी भरी जवाब नहीं मिला, हालांकि थियेटर के लिए शहर में नाटक कला अकादमी बनी है लेकिन जब इतना खर्चा करके इन सभी आर्टिस्ट को बुलाया गया है तो शहर के कलाकार इसमें भाग क्यों नहीं लेते?

भावनाएं नहीं बदलतीं : मनोरमा
 
बच्चों के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा में साहित्य लिखने वाली दिल्ली की लेखिका मनोरमा जफा ने अपनी किताबों के साथ-साथ बच्चों के लिए लिखे साहित्य पर रोशनी डाली।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनका मानना है कि आजकल बच्चे टेक्नोलॉजी से जुड़ रहे हैं। टेक्नोलॉजी बदलती रहती है, लेकिन भावनाएं वही रहती हैं। इसीलिए आजकल जो लिख रही हूं वह टेक्नोलॉजी से नहीं बल्कि भावनाओं से ज्यादा जुड़ा है। वे अब तक युवाओं के लिए 11 नॉवेल लिखे हैं और चंडीगढ़ में लेखन पर वर्कशाप लगाने का भी भी वे मन बना रही है।  

अंग्रेजी-हिंदी के लेखकों को देना होगा बेहतर साहित्य : छाबड़ा
 
डॉक्यूमेंटरी मेकर और फ्रीलांस राइटर सागरी छाबड़ा की बातों से देश से जुड़े कई मुद्दों का साहित्य द्वारा एक ही समाधान निकलता है। वह है अंग्रेजी और हिंदी के लेखकों का मिलकर बेहतर साहित्य लिखना।

उन्होंने कहा कि लिखने की दुनिया आजकल बहुत व्यापक है। आप के पास ब्लॉग है और इंटरनेट से जुड़े साधन हैं। सागरी ने अपनी डॉक्युमेंटरी ‘असली आजादी’ से भारत की आजादी से पहले और उसके बाद के भारत में महिलाओं और उनके बलिदान की व्यथा को भी दर्शाया। सागरी ने बताया की अगर अच्छा लिखना है तो दिल से लिखो।
                             
बुलबुल का ब्रश से पेन तक का सफर
बुलबुल शर्मा एक पेंटर के रूप में न्यूजपेपर में कार्टून डिजाइन करती थीं। एक दिन उन्होंने एडिटर को अपने कार्टून की सीरीज पर स्टोरी लिखने को कहा तो एडिटर ने उन्हें ही इस पर लिखने कि जिम्मेवारी सौंप दी। बस उसके बाद लिखना शुरू हो गया।

एक बार बंगाल से ट्रेन में आते वक्त कुछ महिलाएं साथ थीं, जिन्होंने पूरी ट्रेन में इतना शोर मचाया हुआ था कि मुझे लगा कि इनके ऊपर भी एक किताब लिखूं और मैने ‘द सेंटेंड विमेन’ किताब लिख डाली।

मेरी किताब फू ड एंड विमेन को 8 भाषा में प्रकाशित किया जा चुका है। इन दिनों ‘करीस और बर्ड्स’ नामक इनवार्यमेंटल किताब लिख रही हूं।                     


भारत में लेखक कमा नहीं पाते : मंडल

25 साल की छोटी उम्र में सबसे यंगेस्ट अवार्ड विनर सोनेट मंडल ने अपने अनुभव के बारे में बताया कि मैं एक इंजीनियर था, लेकिन लिखने का शौक यहां तक ले आया। मैंने 2005 से लिखना शुरू किया था और ‘फ्युजन ऑफ सोनेट्स ऑफ ट्वंटी फर्स्ट सेंचुरी’ ने मुझे पहचान दी। अभी फिलहाल अमेरिका के लिए लिख रहा हूं। भारत में सिर्फ लिखने से आप कमा नहीं सकते, पर लिखने का स्कोप बहुत अच्छा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed