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लिटराटी-2024 का आगाज, रतन टाटा: ए लाइफ पुस्तक में बताए 26/11 के अनसुने किस्से
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चंडीगढ़। सुखना लेक क्लब पर दो दिवसीय चंडीगढ़ लिट फेस्ट (सीएलएफ) के 12वें संस्करण की शुरुआत हुई। इसे साहित्य, कला, रचनात्मकता और बौद्धिकता का जीवंत उत्सव मनाया जा रहा है। इसमें साहित्यकारों से लेकर साहित्य प्रेमी शामिल हो रहे हैं। सीएलएफ लिटराटी 2024 सुखना झील के खूबसूरत और शांत बैकग्राउंड में चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी (सीएलएस) की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित सुभाष घोष की ओर से आकर्षक संगीतमय प्रस्तुति से हुई। फेस्ट के औपचारिक उद्घाटन के बाद सीएलएफ लिटराटी 2024 की फेस्टिवल डायरेक्टर और सीएलएस की चेयरपर्सन आईएएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने दर्शकों का स्वागत किया। उद्घाटन के बाद उद्योगपति रतन टाटा पर आधारित पुस्तक रतन टाटा: ए लाइफ का विमोचन किया गया। इसे लेकर मैथ्यू थोमस और रचना सिंह के बीच एक दिलचस्प वार्तालाप का सेशन हुआ।
इस दौरान मैथ्यू ने बताया कि जब वह रतन टाटा से पहली बार मिले तो वह मुलाकात बिल्कुल अनियोजित थी। वह बेहद विनम्र और सादा जीवन जीने वाले व्यक्ति थे। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और दूसरों की मदद करने की भावना से भरा था। इस दौरान उन्होंने 26/11 के आतंकवादी हमले की दिलचस्प घटना भी शेयर की। उन्होंने बताया कि जिस समय अंदर हमला हो रहा था तो रतन टाटा अंदर जाना चाहते थे, जिस पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। वह तब तक होटल के बाहर ही खड़े रहे, जब तक सभी को सुरक्षित होटल से बाहर नहीं निकाल लिया गया।
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हमले का एक आौर किस्सा उन्होंने साझा किया, जिसमें बताया कि हमले में एक महिला ऐसी थी, जिसने अपने पति को खो दिया था। मरने वाला व्यक्ति पर ही पूरा परिवार आश्रित था। रतन टाटा की ओर से चलाए जा रहे टाटा ट्रस्ट की ओर से उनकी बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाया गया, जिसके बाद वह पायल बनी।
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कार्यक्रम की शुरुआत पंडित सुभाष घोष की ओर से आकर्षक संगीतमय प्रस्तुति से हुई। फेस्ट के औपचारिक उद्घाटन के बाद सीएलएफ लिटराटी 2024 की फेस्टिवल डायरेक्टर और सीएलएस की चेयरपर्सन आईएएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने दर्शकों का स्वागत किया। उद्घाटन के बाद उद्योगपति रतन टाटा पर आधारित पुस्तक रतन टाटा: ए लाइफ का विमोचन किया गया। इसे लेकर मैथ्यू थोमस और रचना सिंह के बीच एक दिलचस्प वार्तालाप का सेशन हुआ।
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इस दौरान मैथ्यू ने बताया कि जब वह रतन टाटा से पहली बार मिले तो वह मुलाकात बिल्कुल अनियोजित थी। वह बेहद विनम्र और सादा जीवन जीने वाले व्यक्ति थे। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और दूसरों की मदद करने की भावना से भरा था। इस दौरान उन्होंने 26/11 के आतंकवादी हमले की दिलचस्प घटना भी शेयर की। उन्होंने बताया कि जिस समय अंदर हमला हो रहा था तो रतन टाटा अंदर जाना चाहते थे, जिस पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। वह तब तक होटल के बाहर ही खड़े रहे, जब तक सभी को सुरक्षित होटल से बाहर नहीं निकाल लिया गया।
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हमले का एक आौर किस्सा उन्होंने साझा किया, जिसमें बताया कि हमले में एक महिला ऐसी थी, जिसने अपने पति को खो दिया था। मरने वाला व्यक्ति पर ही पूरा परिवार आश्रित था। रतन टाटा की ओर से चलाए जा रहे टाटा ट्रस्ट की ओर से उनकी बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाया गया, जिसके बाद वह पायल बनी।