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Chandigarh News: माई के भावे लाल चुनरिया पर भक्ति के रंग में रंगे श्रोता
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माई के भावे लाल चुनरिया पर भक्ति के रंग में रंगे श्रोता
मालिनी अवस्थी के लोकगीतों पर झूमे श्रोता, देवी गीतों से राम जन्म की बधाइयों तक सजा मंच
कला महोत्सव के चौथे दिन नवरंग थिएटर में सुखी बराड़ ने भी पंजाबी लोकगायन से बांधा समां
चंडीगढ़। माई के भावे लाल चुनरिया जैसे देवी गीतों पर श्रोता भक्ति के रंग में रंग गए। शनिवार को बाल भवन के नवरंग थिएटर में पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देवी गीतों, राम जन्म की बधाइयों, चैती और कजरी से कला महोत्सव की शाम यादगार बना दी। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव के चौथे दिन पंजाबी लोक गायिका और अकादमी की चेयरपर्सन डॉ. सुखमिंदर कौर बराड़ ने भी लोकगीतों से समां बांधा। उन्होंने पंजाब की मिट्टी से जुड़ी प्रस्तुति के साथ धार्मिक गीत मां गुजरी दे लाल और प्रसिद्ध लोकगाथा मिर्जा सुनाकर लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा को सामने रखा।
इसके बाद मालिनी अवस्थी ने सदा भवानी दाहिने, सम्मुख होत गणेश से गायन शुरू किया। माई के भावे लाल चुनरिया सहित देवी गीतों ने माहौल भक्तिमय कर दिया। नवरात्र की आहट के बीच उन्होंने भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़ी पारंपरिक बधाइयां और सोहर भी सुनाए। ‘बाजत अवध बधइयां’ और दशरथ के घर राम जन्म की खुशी से जुड़े गीतों ने श्रोताओं को राम जन्मोत्सव के उल्लास से जोड़ा। उन्होंने चैती, कजरी समेत अन्य लोकगीत भी प्रस्तुत किए।
मालिनी अवस्थी ने चंडीगढ़ के प्रति लगाव जताते हुए कहा कि वह यहां आने के लिए बेकरार रहती हैं। पंजाबी गीतों पर खुद भी थिरकने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रंग जमाना आसान नहीं होता। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं चंडीगढ़ के पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन, अकादमी के वाइस चेयरमैन डॉ. अमित गंगानी और सचिव राजिंदर कुमार मौजूद रहे।
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मालिनी अवस्थी के लोकगीतों पर झूमे श्रोता, देवी गीतों से राम जन्म की बधाइयों तक सजा मंच
कला महोत्सव के चौथे दिन नवरंग थिएटर में सुखी बराड़ ने भी पंजाबी लोकगायन से बांधा समां
चंडीगढ़। माई के भावे लाल चुनरिया जैसे देवी गीतों पर श्रोता भक्ति के रंग में रंग गए। शनिवार को बाल भवन के नवरंग थिएटर में पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देवी गीतों, राम जन्म की बधाइयों, चैती और कजरी से कला महोत्सव की शाम यादगार बना दी। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव के चौथे दिन पंजाबी लोक गायिका और अकादमी की चेयरपर्सन डॉ. सुखमिंदर कौर बराड़ ने भी लोकगीतों से समां बांधा। उन्होंने पंजाब की मिट्टी से जुड़ी प्रस्तुति के साथ धार्मिक गीत मां गुजरी दे लाल और प्रसिद्ध लोकगाथा मिर्जा सुनाकर लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा को सामने रखा।
इसके बाद मालिनी अवस्थी ने सदा भवानी दाहिने, सम्मुख होत गणेश से गायन शुरू किया। माई के भावे लाल चुनरिया सहित देवी गीतों ने माहौल भक्तिमय कर दिया। नवरात्र की आहट के बीच उन्होंने भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़ी पारंपरिक बधाइयां और सोहर भी सुनाए। ‘बाजत अवध बधइयां’ और दशरथ के घर राम जन्म की खुशी से जुड़े गीतों ने श्रोताओं को राम जन्मोत्सव के उल्लास से जोड़ा। उन्होंने चैती, कजरी समेत अन्य लोकगीत भी प्रस्तुत किए।
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मालिनी अवस्थी ने चंडीगढ़ के प्रति लगाव जताते हुए कहा कि वह यहां आने के लिए बेकरार रहती हैं। पंजाबी गीतों पर खुद भी थिरकने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रंग जमाना आसान नहीं होता। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं चंडीगढ़ के पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन, अकादमी के वाइस चेयरमैन डॉ. अमित गंगानी और सचिव राजिंदर कुमार मौजूद रहे।
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