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चंडीगढ़ के शराब ठेकों की नीलामी फिर रद्द
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Oct 2013 10:00 AM IST
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आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर बुधवार को छठी बार कराई जाने वाली 77 शराब के ठेकों की नीलामी को रद्द कर किया। बता दें कि प्रशासन ने 57 अंग्रेजी और 20 देसी शराब के ठेकों के लिए आवेदन मांगे थे और मंगलवार को आवेदन करने का अंतिम दिन था। लेकिन, एक भी आवेदन न आने से विभाग ने नीलामी रद्द कर दी। प्रशासन ने रिजर्व प्राइस में कमी की थी। इसके बावजूद भी कोई भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई।
प्रशासन की ओर से बुधवार को छठी बार शराब के ठेकों की नीलामी की जानी थी। लेकिन, प्रशासन की ओर से नीलामी की शर्तें कठिन करने से किसी ने भी इन ठेकों को लेने के लिए आवेदन नहीं किया। नई शर्तों के अनुसार, ठेका लेने के लिए आवेदकों को अर्नेस्ट मनी (अग्रिम राशि) के तौर पर 35 लाख रुपये जमा कराने थे, जबकि पहले ठेकों के स्थान के महत्व के अनुसार सात से 25 लाख रुपये जमा कराने पड़ते थे।
इससे पहले प्रशासन को पांचवीं नीलामी भी आवेदन नहीं आने के कारण नीलामी रद्द करनी पड़ी थी। बता दें कि पहले चार बार हुई नीलामी भी फ्लॉप रही थी। पहली बार प्रशासन ने 23 अप्रैल को ठेकों की नीलामी की थी।
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इस दौरान शहर में 217 में से सिर्फ 103 देसी और अंग्रेजी शराब ठेकों की बोली हो सकी थी। इसके बाद 114 ठेकों के लिए दोबारा टेंडर निकाले गए। इस बार सिर्फ 21 ठेके ही नीलाम हो सके। तीसरी बार में सिर्फ 12 ठेके ही नीलाम हुए, तो चौथी बार सिर्फ सात ठेके नीलाम हुए थे।
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प्रशासन की ओर से बुधवार को छठी बार शराब के ठेकों की नीलामी की जानी थी। लेकिन, प्रशासन की ओर से नीलामी की शर्तें कठिन करने से किसी ने भी इन ठेकों को लेने के लिए आवेदन नहीं किया। नई शर्तों के अनुसार, ठेका लेने के लिए आवेदकों को अर्नेस्ट मनी (अग्रिम राशि) के तौर पर 35 लाख रुपये जमा कराने थे, जबकि पहले ठेकों के स्थान के महत्व के अनुसार सात से 25 लाख रुपये जमा कराने पड़ते थे।
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इससे पहले प्रशासन को पांचवीं नीलामी भी आवेदन नहीं आने के कारण नीलामी रद्द करनी पड़ी थी। बता दें कि पहले चार बार हुई नीलामी भी फ्लॉप रही थी। पहली बार प्रशासन ने 23 अप्रैल को ठेकों की नीलामी की थी।
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इस दौरान शहर में 217 में से सिर्फ 103 देसी और अंग्रेजी शराब ठेकों की बोली हो सकी थी। इसके बाद 114 ठेकों के लिए दोबारा टेंडर निकाले गए। इस बार सिर्फ 21 ठेके ही नीलाम हो सके। तीसरी बार में सिर्फ 12 ठेके ही नीलाम हुए, तो चौथी बार सिर्फ सात ठेके नीलाम हुए थे।