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कैग रिपोर्ट में खुलासा: शराब पीने योग्य है या नहीं, प्रमाणपत्र बाद में मिल रहा, पहले ही बिक जाती मदिरा

Fri, 12 Aug 2022 02:12 AM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 12 Aug 2022 02:12 AM IST
सार

पंजाब डिस्टलरीज नियम, 1932 के नियम 17 में यह प्रावधान है कि लाइसेंस धारक डिस्टलरी में तैयार होने वाली शराब और स्प्रिट के नमूनों की जांच कराएगा। नकली और मिलावटी शराब की बिक्री रोकने के लिए यह अनिवार्य है।

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Liquor being sold before completion of chemical test in Haryana
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

सुरा के दीवाने सावधान हो जाएं! हरियाणा में शराब की बिक्री रासायनिक जांच पूरी होने से पहले की जा रही है। शराब पीने योग्य है या नहीं, इसका प्रमाणपत्र बाद में मिल रहा है, जबकि लोग इसे पहले ही गटक चुके होते हैं। शराब डिस्टिलरी में 55 लाख होलोग्राम का दुरुपयोग होने की भी आशंका है। डिस्टलरी और प्लांट में क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरे नहीं लगे हैं, फ्लो मीटर का अभाव है।

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भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक यानी कैग की जांच में यह खुलासा हुआ है। विधानसभा में सदन पटल पर रखी गई रिपोर्ट के अनुसार कैग ने पांच डिस्टलरी के शराब उत्पादन के 2019-21 के दस्तावेजों की जांच की। देशी और भारत में निर्मित विदेशी शराब के 10729 नमूनों को रासायनिक जांच के लिए परीक्षकों के पास भेजा गया, जिनमें से चार डिस्टलरी के 9194 नमूनों की रिपोर्ट 28 से 312 दिन बाद प्राप्त हुई। जबकि, रासायनिक प्रमाणपत्र शराब बनने के एक से सात दिनों के भीतर लेना जरूरी है।
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आबकारी एवं कराधान अधिकारियों और निरीक्षकों ने न तो जांच प्रमाण समयबद्ध तरीके से करने की अवधि को सख्ती से लागू कराया न ही रासायनिक परीक्षक की अनिवार्य रिपोर्ट के बिना डिस्टलरी से शराब की आपूर्ति और बिक्री रोकी। जांच में यह भी पाया गया कि डिस्टलरी को होलोग्राम जारी करने और संबंधित दस्तावेजों का समय पर मिलान करने के लिए कोई तंत्र नहीं है। 

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आबकारी एवं कराधान उपायुक्त व आयुक्त की तरफ से जारी होलोग्राम की मात्रा और स्टाक में काफी अंतर पाया गया। कैग ने करनाल की एक डिस्टिलरी में  54.70 लाख होलोग्राम का दुरुपयोग होने की आशंका जताई है। उसके मुताबिक उस डिस्टिलरी को 2019-21 तक 16.22 करोड़ होलोग्राम तक दिए गए, जबकि उसके स्टाक रजिस्टर में 15.68 करोड़ होलोग्राम का ही रिकॉर्ड मिला। 

मिलावटी शराब की बिक्री रोकने के लिए यह जरूरी
पंजाब डिस्टलरीज नियम, 1932 के नियम 17 में यह प्रावधान है कि लाइसेंस धारक डिस्टलरी में तैयार होने वाली शराब और स्प्रिट के नमूनों की जांच कराएगा। नकली और मिलावटी शराब की बिक्री रोकने के लिए यह अनिवार्य है।

विभाग और डिस्टलरी के अपने तर्क
आबकारी एवं कराधान विभाग ने कहा है कि सभी डिस्टिलरी की पूरी निगरानी कर रहे हैं। फ्लो मीटर लगाने की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरे लगाने का काम प्रगति पर है। होलोग्राम मामले की जांच कराने कराई जा रही  है। शराब डिस्टलरी के अधिकारियों ने कैग को बताया कि रासायनिक प्रमाणपत्र देरी से मिलने की स्थिति में शराब की बिक्री रोकी नहीं जा सकती। इससे शराब की बिक्री बुरी तरह प्रभावित होगी। 

होलोग्राम जरूरी क्यों
होलोग्राम शराब को पहचानने का आधार है। इलेक्ट्रॉनिक मोड में 10 अंकों की संख्या बनाकर होलोग्राम पर मुद्रित की जाती है। मिलावटी शराब से बचाव के लिए होलोग्राम की कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू की गई है। शराब को पूरी तरह जांचने-परखने के बाद ही होलोग्राम लगाया जाता है। लेकिन, हरियाणा में बिना जांच प्रमाणपत्र के होलोग्राम शराब की बोतलों पर चिपकाए जा रहे हैं। 

बीते साल 15 करोड़ से अधिक बोतल बिकीं

  • अंग्रेजी शराब की 12 करोड़ बोतल
  • देशी शराब की 2.88 करोड़ बोतल
  • विदेशी शराब की 75 लाख बोतल 
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