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Punjab: धान की आवक ने पकड़ी रफ्तार, उठान नहीं पकड़ पाया जोर... खन्ना मंडी में सिर्फ 932 मीट्रिक टन धान की खरीद

Fri, 11 Oct 2024 03:38 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 11 Oct 2024 03:38 PM IST
सार

पंजाब की कुल 1818 मंडियों को धान की खरीद के लिए अधिसूचित किया हुआ है। इसके अलावा 64 अस्थायी यार्ड भी बनाए गए हैं। अब तक 2.16 लाख मीट्रिक टन धान की मंडियों में आवक हो चुकी है, लेकिन 1.47 लाख मीट्रिक धान का उठान नहीं हो पाया है।

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Lifting of paddy is slow in Punjab
मंडी में पड़ी धान - फोटो : संवाद

विस्तार

पंजाब सरकार के प्रयास के बाद मंडियों में धान की आवक ने तो रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन खरीद का काम अभी भी जोर नहीं पकड़ पाया है। यहां तक कि पंजाब की सबसे बड़ी मंडी खन्ना भी अभी भी पीछे चल रही है। यहां धान की आवक भी अन्य मंडियों के मुकाबले कम है। खन्ना मंडी में 1460 मीट्रिक टन की आवक हुई है, जबकि खरीद सिर्फ 932 मीट्रिक धान की हुई है।

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प्रदेश की अन्य कई मंडियां इससे फिर भी आगे चल रही हैं। अकेले अमृतसर की राय्या मंडी में ही अब तक 4899 मीट्रिक टन धान पहुंची है और अब तक 4813 मीट्रिक टन धान की खरीद भी हो चुकी है। राइस मिलर्स पीआर-126 जैसी अन्य हाइब्रिड धान की किस्में खरीदने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। उनका कहना है कि इसका उत्पादन अनुपात यानी मिलिंग के बाद उपज कम है, जिससे उनको घाटा होने की संभावना है।
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खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार 1.55 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है और उठान प्रक्रिया पर भी तेजी से काम चल रहा है।

खन्ना के बाद अगर सबसे बड़ी अनाज मंडी की बात की जाए तो वह राजपुरा में है। यहां अब तक 9360 मीट्रिक टन धान की आवक हुई थी, जबकि 8137 मीट्रिक टन की खरीद हुई है। संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि खन्ना व राजपुरा दोनों ही प्रमुख मंडियां हैं। यहां धान की आवक व खरीद पर जोर देने के लिए काम किया जाना चाहिए। अगर किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो उसे तुरंत दूर किया जाना चाहिए। धान की मंडियों से 48 घंटे में लिफ्टिंग जरूरी है, जो नहीं हो रही है। किसानों को इस कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने पीआर-126 लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया और बीज प्रदान करवाया। अब शैलर इसे लेने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। ऐसे में ये पूरी तरह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इसके उठान व खरीद को सुनिश्चित करें।
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इसी तरह जालंधर की मेहतपुर मंडी में 1686 मीट्रिक धान पहुंचा है, जबकि खरीद 1616 मीट्रिक टन धान की हुई है। फाजिल्का मंडी में 1503 मीट्रिक टन धान पहुंची है, जबकि 1130 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हुई है। पंजाब में 1 अक्तूबर से धान की खरीद शुरू होनी थी, लेकिन आढ़ती व राइस शेलर्स अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे, जिसके चलते मंडियों में धान की खरीद व उठान का काम शुरू नहीं हो पा रहा था। इस कारण किसानों में काफी रोष था। पंजाब सरकार ने आढ़तियों व राइस शेलर के साथ बैठकें की थी, जिसके बाद ही धान की खरीद व उठान का रास्ता साफ हुआ था। आढ़ती 2.5 प्रतिशत आढ़त की मांग कर रहे थे, जबकि शेलर धान की स्टोरेज का मुद्दा उठा रहे थे। सरकार के भरोसे के बाद ही उन्होंने अपनी हड़ताल समाप्त की थी।

इन मंडियों की यह स्थिति  

मंडी                         आवक                    खरीद (मीट्रिक टन)
बटाला                      1155                         1155
खडूर साहिब               2568                         2226
होशियारपुर                  615                          615
कपूरथला                   3624                         3524

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