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आग लगाकर पति की हत्या करने के मामले में पत्नी और बेटे को उम्रकैद, जानिए क्या था मामला
Tue, 25 Feb 2020 11:06 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Feb 2020 11:06 AM IST
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आग लगाकर पति की हत्या करने के मामले में दोषी पत्नी और बेटे को जिला अदालत ने सोमवार को उम्रकैद सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। बीते 18 फरवरी को अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। एफआईआर के मुताबिक, मामला 29 जून, 2017 का है। मरने से पहले पीड़ित राजकुमार के बयान पर सेक्टर-31 थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था। पीड़ित ने बयान दिया था कि पत्नी उषा और बेटे विक्की ने घर में पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।
खुद को बचाने के लिए वह पिछले दरवाजे की ओर भागा लेकिन दरवाजा बंद था। वह मुख्य दरवाजे से भी बाहर नहीं निकल सका। बचने के लिए उसने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। इस दौरान वह बुरी तरह झुलस गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे अस्पताल में भर्ती कराया। पीड़ित ने बयान में कहा कि पत्नी उषा और बेटे विक्की ने साजिश के तहत आग लगाकर उसे मारने की कोशिश की। राजकुमार के बयान पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद तीन जुलाई को इलाज के दौरान राजकुमार की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास के मामले को हत्या की धारा में तब्दील कर दिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया था कि दोनों पर झूठा मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता खुद गलत था, जिसने अपने परिवार के सदस्यों को जलाकर मारने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता ने घटना की तारीख को पंप से पेट्रोल खरीदा। उसके बाद घर, पत्नी उषा, परिवार के सदस्यों और खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली।
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शिकायतकर्ता ने आग से बचने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, लेकिन वह बुरी तरह झुलस गया। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपियों का अपराध करने का कोई मकसद नहीं है। पुलिस ने मामले में किसी भी पड़ोसी को गवाह नहीं बनाया। न ही आग बुझाने वाले फायर ब्रिगेड कार्यालय का रिकॉर्ड पेश किया। अदालत ने तर्कों को सुनने के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया। इसके बाद सोमवार को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
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खुद को बचाने के लिए वह पिछले दरवाजे की ओर भागा लेकिन दरवाजा बंद था। वह मुख्य दरवाजे से भी बाहर नहीं निकल सका। बचने के लिए उसने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। इस दौरान वह बुरी तरह झुलस गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे अस्पताल में भर्ती कराया। पीड़ित ने बयान में कहा कि पत्नी उषा और बेटे विक्की ने साजिश के तहत आग लगाकर उसे मारने की कोशिश की। राजकुमार के बयान पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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इसके बाद तीन जुलाई को इलाज के दौरान राजकुमार की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास के मामले को हत्या की धारा में तब्दील कर दिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया था कि दोनों पर झूठा मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता खुद गलत था, जिसने अपने परिवार के सदस्यों को जलाकर मारने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता ने घटना की तारीख को पंप से पेट्रोल खरीदा। उसके बाद घर, पत्नी उषा, परिवार के सदस्यों और खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली।
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शिकायतकर्ता ने आग से बचने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, लेकिन वह बुरी तरह झुलस गया। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपियों का अपराध करने का कोई मकसद नहीं है। पुलिस ने मामले में किसी भी पड़ोसी को गवाह नहीं बनाया। न ही आग बुझाने वाले फायर ब्रिगेड कार्यालय का रिकॉर्ड पेश किया। अदालत ने तर्कों को सुनने के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया। इसके बाद सोमवार को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।