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Bathinda: चार सैनिकों के हत्यारे सहकर्मी को आजीवन कारावास, कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के बाद सेना की सेवा से बर्खास्त

Sun, 04 Aug 2024 08:20 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब) Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 04 Aug 2024 08:20 PM IST
सार

गनर देसाई मोहन ने अप्रैल 2023 में बठिंडा की हाई सिक्योरिटी सैनिक छावनी में अपने सहकर्मियों सागर बन्ने, कमलेश आर, संतोष नागरल, व योगेश कुमार की हत्या कर दी थी। 

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Life imprisonment to colleague who killed four soldiers, dismissed from army service after Court of Inquiry
Court Room - फोटो : ANI

विस्तार

सेना के एक जवान को जनरल कोर्ट मार्शल के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उसने अप्रैल 2023 में बठिंडा की हाई सिक्योरिटी सैनिक छावनी में अपने ही चार सहयोगियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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मामले में दोषी ठहराए गए गनर देसाई मोहन ने अपने सहकर्मियों सागर बन्ने, कमलेश आर, संतोष नागरल, व योगेश कुमार की हत्या की थी। ये सभी सेना के तोपखाने की 80 मीडियम रेजिमेंट की मेस में कार्यरत थे। वारदात को उस समय अंजाम दिया गया, जब सभी सैनिक मेस के पास अपने कमरे में सो रहे थे। हादसे की जांच में बठिंडा पुलिस को घटनास्थल से गोलियों के 19 खोल मिले थे, जिससे साबित हुआ कि आरोपी ने साथियों पर अंधाधुंध फायरिंग की।
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हत्याकांड के बाद सेना ने इसी साल जनवरी में (जनरल कोर्ट मार्शल) जीसीएम का गठन किया था। इसमें आरोपी के खिलाफ सुनाई हुई। देसाई मोहन को चार सैनिकों की हत्या के अलावा सैन्य स्टेशन से हथियार व गोला-बारूद चुराने का भी आरोपी बनाया गया। इन हथियारों का इस्तेमाल आरोपी ने हत्याकांड को अंजाम देने में किया था। कर्नल एस. दुसेजा की अध्यक्षता में जीसीएम ने दोषी देसाई मोहन को हत्या के चार मामलों व सरकारी संपत्ति की चोरी में दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए सेवा से भी बर्खास्त कर दिया। कोर्ट मार्शल में जवान का प्रतिनिधित्व दो वकील राजेश शर्मा और नवजिंदर सिंह ने किया, जबकि अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व ब्रिगेडियर एनके ओहरी (सेवानिवृत्त) ने किया।
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शुरू में झूठी कहानी सुनाता रहा मोहन

अप्रैल 2023 को कैंट पुलिस स्टेशन में एफआईआर के अनुसार, मोहन ने दावा किया कि उसने अपराध स्थल के पास सफेद कुर्ता-पायजामा में दो नकाबपोश लोगों को देखा था। मामला 80 मीडियम रेजिमेंट के मेजर आशुतोष शुक्ला की शिकायत पर दर्ज किया था, जिन्होंने मोहन की जानकारी का हवाला देते हुए कहा था कि हमलावरों में से एक के पास इंसास राइफल और दूसरे के पास कुल्हाड़ी थी। एफआईआर में कहा गया है कि 9 अप्रैल को सेना की एक इकाई से एक इंसास राइफल और 28 कारतूस वाली एक मैगजीन चोरी हो गई थी। बठिंडा पुलिस को बाद में राइफल और मैगजीन मिली। मोहन ने कहा था कि उसने दो लोगों को राइफल और कुल्हाड़ी ले जाते हुए देखा था, लेकिन चारों जवानों के शव परीक्षण में किसी तेज धार वाले हथियार की चोट का पता नहीं चला, जिसके बाद गहन पूछताछ पर मामले का खुलासा हुआ और देसाई मोहन ही हत्यारा पाया गया।
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