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पंजाब सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब सिर्फ ये लोग ही दे सकते हैं किसानों को कर्ज
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 24 Aug 2018 11:53 AM IST
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पंजाब मंत्रीमंडल
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पंजाब सरकार ने किसानों के पेशगी उधार को प्रति एकड़ भूमि के अनुसार तय करने और ब्याज दर की सीमाएं निर्धारित करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य किसानों को दिए जाने वाले कर्जों के सिस्टम में सुधार लाना है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में पंजाब कृषि कर्ज निपटारा बिल 2018 को मंजूरी दी गई। इसे शुक्रवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
इस बिल का उद्देश्य राज्य के किसानों को कर्ज की बुराई से छुटकारा दिलाना है। इसके तहत कुछ सिलसिलेवार कदम उठाए गए हैं, जिनमें किसानों को ब्याज से सुरक्षित करना और अनाधिकृत साहूकारों के शिकंज़े से बचाना है। क्योंकि इन किसानों को कर्ज के तौर पर किसी सीमा से तक राशि देकर सीमा से अधिक ब्याज वसूला जाता है।
इस बिल के कानून बनने से न सिर्फ लाइसेंसशुदा साहूकारों को ही पेशगी उधार देने की अनुमति होगी बल्कि गैर लाइसेंसशुदा साहूकारों द्वारा दिया पेशगी उधार अवैध करार दिया जाएगा। लाइसेंसशुदा साहूकारों द्वारा दिया कर्ज ही केवल कर्ज निपटारा फोरम के क्षेत्र में आएगा, जिनका नेतृत्व कमिश्नर करेंगे। साहूकारों द्वारा किसान को दी गई राशि के सबूत पेश करना भी अपेक्षित होगा।
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कर्ज निपटारा फोरमों की संख्या घटाने का फैसला
प्रवक्ता के अनुसार, इसके साथ ही कर्ज निपटारा फोरमों की कुल संख्या घटाने का फै सला किया गया है। साल 2016 में पास किए एक्ट के अनुसार इनकी संख्या 22 है जो अब सिर्फ 5 फोरम रहेंगे। नए फोरम डिवीजन स्तर पर गठित की जाएंगी। किसानी कर्जों संबंधी मौजूदा कानूनों को सुधारने का फैसला कृषि कर्जों के बढ़ रहे रुझान पर नकेल डालने के लिए लिया गया है, जो कृषि वस्तुओं की कीमतों और फसलों के कम से कम समर्थन मूल्य में अंतर के नतीजे के तौर पर बढ़े़ हैं।
संस्थागत और गैर संस्थागत स्रोतों से कर्ज लेते हैं
किसानों द्वारा दोनों संस्थागत और गैर संस्थागत स्रोतों से कर्ज लिया जा रहा है। संस्थागत कर्ज उपलब्ध करवाने वाली संस्थाओं के प्रबंधन को विशेष विधानों द्वारा नियंत्रित किया गया है लेकिन गैर संस्थागत कर्ज प्राथमिक तौर पर अनियमित हैं जिनके निपटारे के लिए आसानी के साथ पहुंच करने के लिए कोई रूपरेखा नहीं है। इस संदर्भ में सरकार ने पंजाब कृषि कर्ज निपटारा एक्ट 2016 संशोधित किया है, जो कृषि कर्जों को नियमित करने और उनके निपटारे के लिए रूपरेखा उपलब्ध करवाएगा।
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इस बिल का उद्देश्य राज्य के किसानों को कर्ज की बुराई से छुटकारा दिलाना है। इसके तहत कुछ सिलसिलेवार कदम उठाए गए हैं, जिनमें किसानों को ब्याज से सुरक्षित करना और अनाधिकृत साहूकारों के शिकंज़े से बचाना है। क्योंकि इन किसानों को कर्ज के तौर पर किसी सीमा से तक राशि देकर सीमा से अधिक ब्याज वसूला जाता है।
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इस बिल के कानून बनने से न सिर्फ लाइसेंसशुदा साहूकारों को ही पेशगी उधार देने की अनुमति होगी बल्कि गैर लाइसेंसशुदा साहूकारों द्वारा दिया पेशगी उधार अवैध करार दिया जाएगा। लाइसेंसशुदा साहूकारों द्वारा दिया कर्ज ही केवल कर्ज निपटारा फोरम के क्षेत्र में आएगा, जिनका नेतृत्व कमिश्नर करेंगे। साहूकारों द्वारा किसान को दी गई राशि के सबूत पेश करना भी अपेक्षित होगा।
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कर्ज निपटारा फोरमों की संख्या घटाने का फैसला
प्रवक्ता के अनुसार, इसके साथ ही कर्ज निपटारा फोरमों की कुल संख्या घटाने का फै सला किया गया है। साल 2016 में पास किए एक्ट के अनुसार इनकी संख्या 22 है जो अब सिर्फ 5 फोरम रहेंगे। नए फोरम डिवीजन स्तर पर गठित की जाएंगी। किसानी कर्जों संबंधी मौजूदा कानूनों को सुधारने का फैसला कृषि कर्जों के बढ़ रहे रुझान पर नकेल डालने के लिए लिया गया है, जो कृषि वस्तुओं की कीमतों और फसलों के कम से कम समर्थन मूल्य में अंतर के नतीजे के तौर पर बढ़े़ हैं।
संस्थागत और गैर संस्थागत स्रोतों से कर्ज लेते हैं
किसानों द्वारा दोनों संस्थागत और गैर संस्थागत स्रोतों से कर्ज लिया जा रहा है। संस्थागत कर्ज उपलब्ध करवाने वाली संस्थाओं के प्रबंधन को विशेष विधानों द्वारा नियंत्रित किया गया है लेकिन गैर संस्थागत कर्ज प्राथमिक तौर पर अनियमित हैं जिनके निपटारे के लिए आसानी के साथ पहुंच करने के लिए कोई रूपरेखा नहीं है। इस संदर्भ में सरकार ने पंजाब कृषि कर्ज निपटारा एक्ट 2016 संशोधित किया है, जो कृषि कर्जों को नियमित करने और उनके निपटारे के लिए रूपरेखा उपलब्ध करवाएगा।