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राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस: हरियाणा में तीन साल में सबसे कम जली पराली, मगर प्रदूषण से जंग जीतना बाकी

Sat, 02 Dec 2023 12:07 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 02 Dec 2023 12:07 AM IST
सार

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लगातार बोर्ड कदम उठा रहा है। हम कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रहे हैं, जिनके परिणाम आने में अभी समय लग सकता है। हमारा पहला फोकस पराली जलाने के मामलों में कमी लाना था।

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Less stubble burning cases recorded this season compared to last three years in Haryana
पराली की समस्या।

विस्तार

हरियाणा में पिछले तीन साल की तुलना में इस बार पराली जलाने के मामले सबसे कम सामने आए हैं। साल 2023 में 15 सितंबर से 30 नवंबर तक पराली जलाने के 2303 मामले दर्ज किए गए। जो 2022 के मुकाबले 37 फीसदी, 2021 के मुकाबले 67 फीसदी और 2020 की तुलना में 45 फीसदी कम है। यह आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा ने पराली जलाने के मामलों में अंकुश लगाने के लिए काफी हद तक सफलता प्राप्त कर ली है। मगर वायु प्रदूषण की जंग में कोई खास कामयाबी नहीं मिली। 

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मानसून बीतने के बाद सात अक्तूबर से ही वायु प्रदूषण ने हरियाणा के 11 शहरों को अपने चपेट में ले लिया था। दिवाली से ठीक एक दिन पहले हुई बारिश के बाद मिली राहत को छोड़ दिया जाए तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक निरंतर वायु प्रदूषण हावी रहा। लगभग 50 दिन हरियाणा के 11 से 15 शहर ऑरेंज और रेड जोन की चपेट में रहे हैं। यह स्थिति तब थी, जब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेप-तीन और चार के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू कर रखा था। ऑरेज जोन में एक्यूआई 200 से 300 के बीच और रेड जोन में एक्यूआई 300 से 400 के बीच रहता है।

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कई मोर्चों पर एक साथ कर रहे हैं काम: राव

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लगातार बोर्ड कदम उठा रहा है। हम कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रहे हैं, जिनके परिणाम आने में अभी समय लग सकता है। हमारा पहला फोकस पराली जलाने के मामलों में कमी लाना था। इस बार काफी कम मामले आए हैं। हमारा अगला लक्ष्य शहरों के प्रदूषण को कम करना है। इसके लिए हम हरियाणा के शहरों का अध्ययन करवा रहे हैं। यह स्टडी अगले साल अगस्त तक पूरी हो पाएगी। उसके जो भी परिणाम आएंगे, उस पर काम करेंगे।

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दो महीने में दो करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया

हरियाणा सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और प्रदूषण को रोकने के लिए बनाए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर दो महीने (अक्तूबर-नवंबर) में दो करोड़ 76 लाख 18 हजार 400 रुपये का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना खुले में कूड़ा जलाने, निर्माण गतिविधियों के दौरान धूल को नियंत्रित नहीं करने, ग्रेप का पालन नहीं करने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाया गया है। हरियाणा सरकार ने यह जानकारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान दी।

फरीदाबाद सबसे प्रदूषित शहर

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि राज्य में सबसे प्रदूषित शहर फरीदाबाद है। इस शहर का एक्यूआई लगातार 300 के आसपास बना हुआ है। पीक समय में शहर के कुछ इलाकों का एक्यूआई 400 के ऊपर भी दर्ज किया गया है। उसके बाद गुरुग्राम दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा है। बोर्ड का कहना है कि इन शहरों में प्रदूषण फैलने का एक कारण यह भी है कि शहर और उसके आसपास निर्माण गतिविधियां काफी जोरों पर चल रही है। इसके अलावा सोनीपत और पानीपत सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में एक हैं।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह उठाए जा रहे हैं कदम

बोर्ड के मुताबिक राज्य के 100 हॉटस्पॉट को ग्रीन स्पॉट बदलने का काम चल रहा है। इन जगहों पर बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाने हैं। कुछ हॉटस्पॉट पर लगाए जा चुके हैं। सड़क की धूल नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण जंक्शनों पर एंटी स्मॉग गन स्थापित करने और सड़कों की सफाई आधुनिक मशीन से करवाने का प्रस्ताव सरकार को सौंपा जा चुका है। प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। एक साल के भीतर हरियाणा में 375 इलेक्ट्रिक बसों को दौड़ाया जाएगा। प्रदूषण की निगरानी के लिए वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम बढ़ाए जा रहे हैं। एनसीआर से लगते शहरों में वायु प्रदूषण के स्रोतों को जानने के लिए स्टडी करवाई जा रही है।

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