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स्मार्टफोन में आधार हेल्पलाइन नंबर को लेकर एयरटेल, गूगल व यूआईडीएआई को नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 09 Aug 2018 04:30 PM IST
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मोबाइल फोन में आधार हेल्पलाइन नंबर ऑटो सेव होने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने एयरटेल, गूगल इंडिया, टीआरएआई और यूआईडीएआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई की अगली तारीख 13 सितंबर तय की गई है।
बता दें कि अधिवक्ता पंकज चांदगोठिया ने सोमवार को इस मामले में शिकायत दायर कर कहा था कि वह एयरटेल कंपनी के दो मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते हैं। तीन अगस्त को दोनों में ही उन्होंने यूआईडीएआई हेल्पलाइन के नाम से एक नंबर अपने कांटेक्ट लिस्ट में सेव पाया जो उन्होंने कभी भी इस्तेमाल नहीं किया था।
इस तरह से बिना उपभोक्ता की जानकारी के किसी का नंबर सेव होने का मतलब है कि या तो सर्विस प्रोवाइडर या कोई अन्य संस्था उनके मोबाइल डाटा से छेड़छाड़ कर रहे हैं। चांदगोठिया ने कहा कि उनकी बिना जानकारी के उन्हीं के मोबाइल में कोई भी नंबर डाला जा सकता है तो ऐसा करने वाली संस्था उनके डाटा का गलत इस्तेमाल भी कर सकती है। उनका डाटा की चोरी भी कर सकती है।
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ऐसे नंबर सेव होने से पहले न तो कोई मैसेज आया और न ही उन्हें सावधान किया गया। चांदगोठिया ने अपनी शिकायत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राइट ऑफ प्राइवेसी को संवैधानिक दर्जा दिया है। बिना उपभोक्ता के जानकारी के उनके मोबाइल डाटा से छेड़छाड़ उनके मौलिक अधिकार का हनन करता है।
चांदगोठिया ने इस कार्रवाई को सेवा में कोताही कहते हुए अपनी शिकायत में एयरटेल कंपनी, गूगल इंडिया, टीआरएआई और यूआईडीएआई को पार्टी बनाते हुए उन सभी से 19 लाख रुपये से अधिक की मुआवजे की मांग की है।
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बता दें कि अधिवक्ता पंकज चांदगोठिया ने सोमवार को इस मामले में शिकायत दायर कर कहा था कि वह एयरटेल कंपनी के दो मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते हैं। तीन अगस्त को दोनों में ही उन्होंने यूआईडीएआई हेल्पलाइन के नाम से एक नंबर अपने कांटेक्ट लिस्ट में सेव पाया जो उन्होंने कभी भी इस्तेमाल नहीं किया था।
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इस तरह से बिना उपभोक्ता की जानकारी के किसी का नंबर सेव होने का मतलब है कि या तो सर्विस प्रोवाइडर या कोई अन्य संस्था उनके मोबाइल डाटा से छेड़छाड़ कर रहे हैं। चांदगोठिया ने कहा कि उनकी बिना जानकारी के उन्हीं के मोबाइल में कोई भी नंबर डाला जा सकता है तो ऐसा करने वाली संस्था उनके डाटा का गलत इस्तेमाल भी कर सकती है। उनका डाटा की चोरी भी कर सकती है।
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ऐसे नंबर सेव होने से पहले न तो कोई मैसेज आया और न ही उन्हें सावधान किया गया। चांदगोठिया ने अपनी शिकायत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राइट ऑफ प्राइवेसी को संवैधानिक दर्जा दिया है। बिना उपभोक्ता के जानकारी के उनके मोबाइल डाटा से छेड़छाड़ उनके मौलिक अधिकार का हनन करता है।
चांदगोठिया ने इस कार्रवाई को सेवा में कोताही कहते हुए अपनी शिकायत में एयरटेल कंपनी, गूगल इंडिया, टीआरएआई और यूआईडीएआई को पार्टी बनाते हुए उन सभी से 19 लाख रुपये से अधिक की मुआवजे की मांग की है।