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चंडीगढ़ मेयर चुनाव: सीक्रेट बैलेट पेपर से नहीं, हाथ खड़ा कराकर चुना जाएगा मेयर, पिछली बार हुई थी धांधली

Wed, 30 Oct 2024 11:46 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Wed, 30 Oct 2024 11:46 AM IST
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Mayor will be elected by show of hands in Chandigarh
चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : अमर उजाला
इस वर्ष के शुरू में मेयर चुनाव में हुई धांधली से सीख लेते हुए नगर निगम ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया बदलने की फैसला किया है। यह चुनाव सीक्रेट बैलेट पेपर की जगह पार्षदों से हाथ खड़े कराकर करने का एजेंडा पास किया गया है। आप-कांग्रेस के पार्षदों ने मंजूरी दे दी है लेकिन भाजपा ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि वह वोट देने में सीक्रेसी को मेंटेन रखने के पक्ष में है।
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आम आदमी पार्टी के पार्षद योगेश ढींगरा ने यह प्रस्ताव सदन में रखा। कहा कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में जो कुछ हुआ, उससे पूरे चंडीगढ़ की बदनामी हुई है। हर बार मेयर चुनाव के समय खरीद-फरोख्त होती है। पार्षदों को अपने घर से दूर रहना पड़ता है। अगर चुनाव में एक भी वोट क्रॉस हो जाए तो सभी पार्षदों पर दाग लगता है। उन्हें शक की नजर से देखा जाता है, इसलिए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव प्रक्रिया में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने सदन में कहा कि चंडीगढ़ में पंजाब म्युनिसिपल एक्ट को फॉलो किया जाता है। वर्ष 1991 में जब चंडीगढ़ नगर निगम का गठन भी नहीं हुआ था, तब सीक्रेट बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव करने की बात कही गई थी। यह चंडीगढ़ में भी लागू हो गया लेकिन 19 अप्रैल 2001 को सुप्रीम कोर्ट ने गुरदीप सिंह बनाम पंजाब के केस में एक ऐतिहासिक फैसला दिया और कहा कि चुनाव बैलेट पेपर के बजाय हाथ खड़े करके भी कर सकते हैं।
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ढींगरा ने कुलदीप नैयर बनाम भारत सरकार के केस का भी हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने ओपन वोट को जस्टिफाई किया था और कहा था कि इससे पारदर्शिता आएगी और खरीद-फरोख्त बंद होगी। यह केस राज्यसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया को लेकर था। ढींगरा ने विभिन्न तर्क देते हुए प्रस्तावित किया कि मेयर का चुनाव हाथ उठाकर ही किया जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने सहमति जता दी। हालांकि, भाजपा ने विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष कंवरजीत राणा ने कहा कि वह वोट देने में सीक्रेसी को मेंटेन रखने के पक्ष में हैं। वह चाहते हैं कि जैसे पहले चुनाव होता था, वैसे ही होते रहें।
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संसद से पास कराने की जरूरत नहीं, प्रशासक के स्तर पर ही होंगे बदलावः ढींगरा
सदन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि क्या यह संशोधन संसद से होगा या स्थानीय स्तर पर संभव है। योगेश ढींगरा ने पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट-1976 (एक्सटेंडेड टू द चंडीगढ़) के सेक्शन 398 का हवाला देते हुए कहा कि इसे स्थानीय स्तर पर ही लागू कराया जा सकता है। मेयर ने सदन के अंदर ही निगम के लॉ ऑफिसर से पूछा कि क्या यह संभव है। लॉ ऑफिसर ने भी कहा कि सेक्शन-398 सदन को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह एजेंडा पास कर सकते हैं। इसे मंजूरी के लिए प्रशासक को भेजा जाएगा। अगर वह मंजूर करते हैं तो इसे लागू किया जा सकता है।

दल बदल विरोधी कानून भी होना चाहिए लागूः महेशइंदर सिंह सिद्धू
भाजपा के पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि नगर निगम सदन ने कुछ वर्ष पहले दल-बदल विरोधी कानून को चंडीगढ़ में लागू करने को लेकर भी एजेंडा पास किया था और इसे केंद्र सरकार को भेजा गया था। उन्होंने कहा कि नगर निगम को बताना चाहिए कि उसका स्टेटस क्या है। इस पर आयुक्त अमित कुमार ने अधिकारियों से जानकारी मांगी है। बता दें कि दल बदल विरोधी कानून का उद्देश्य है कि राजनीतिक दलों के सदस्यों को एक दल से दूसरे दल में बिना किसी ठोस कारण के जाने से रोकना। यह कानून भ्रष्टाचार को कम करने और लोकतंत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।


अब आगे क्या
सदन में एजेंडा पास होने के बाद अब अगले महीने होने वाली सदन की बैठक में इसके मिनट्स लाए जाएंगे और पार्षद उसे पास करेंगे। मिनट्स पास करने के बाद नगर निगम की तरफ से विभिन्न एक्ट का हवाला देते हुए चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को प्रस्ताव भेजा जाएगा। अगर प्रशासक मंजूरी देते हैं तो उसकी नोटिफिकेशन जारी की जाएगी। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में अभी काफी समय लगेगा। अगला मेयर चुनाव जनवरी में है, तब तक लागू होना मुश्किल है।
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