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भाजपा का दांव पड़ा उलटा: चुनाव से पहले पार्टी का दामन थामने वाले दिग्गज भी नहीं बचा सके साख, हिंदू मतदाता भी खिसके

Sun, 13 Mar 2022 04:13 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 13 Mar 2022 04:13 PM IST
सार

अकाली दल के पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ को पार्टी में शामिल कर जालंधर कैंट से उम्मीदवार बनाया गया। मक्कड़ 15 हजार 946 मत हासिल कर चौथे नंबर पर रहे।

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Leaders who joined BJP in Punjab lost elections
भाजपा - फोटो : एएनआई

विस्तार

पंजाब में पहली बार दमखम से उतरी भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में अच्छे प्रदर्शन की पूरी उम्मीद थी और केंद्र सरकार ने अपने ताकतवर वजीरों को पंजाब चुनाव में तैनात किया था। इन वजीरों का पूरा गणित उलटा पड़ गया। कांग्रेस से आकर भाजपा में फ्रंट कतार में बैठने वाले पूर्व मंत्री राणा सोढ़ी व विधायक फतेहजंग बाजवा जैसे नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा। 

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पार्टी ने सिख चेहरों को आगे कर पंजाब में राजनीति की बिसात बिछाई लेकिन हुआ यह कि हिंदू वोट बैंक छिटक गया। पंजाब में भाजपा ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मीनाक्षी लेखी, हरदीप पुरी, दुष्यंत गौतम को खास तौर पर तैनात किया था। पीएम मोदी ने जहां पंजाब में तीन बड़ी रैलियां कीं, वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी पूरी ताकत झोंकी।  
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मगर पंजाब में भाजपा का गणित गड़बड़ा गया। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह ललपुरा को पंजाब में श्री आनंदपुर साहिब विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया और वहां पर ललपुरा महज 10 हजार वोट जुटा सके। इकबाल सिंह ललपुरा पुलिस अधिकारी भी रहे हैं। पार्टी ने पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए उनको राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया था। 

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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन विजय सांपला को फगवाड़ा से मैदान में उतारा गया था। वह महज 15 हजार के करीब ही मत हासिल कर सके। हालांकि यह इलाका उनके कट्टर विरोधी केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश का है लेकिन सांपला के भतीजे आशू सांपला फगवाड़ा सीट पर लंबे समय से जुटे थे। वोटरों ने सांपला को 12 फीसदी मत ही दिए और वह चौथे स्थान पर रहे। सांपला पंजाब भाजपा के प्रधान, केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। उनके निकटवर्ती कहते हैं कि वहां पर भितरघात हुआ और सांपला को हराया गया है। 

भाजपा ने पंजाब के कद्दावर मंत्री गुरमीत सिंह सोढ़ी को पार्टी ज्वाइन करवाई और उनको फ्रंट कतार में बैठाकर कई फैसले उन पर छोड़े। पार्टी को उम्मीद थी कि राणा सोढी मालवा में कमल का जादू चला देंगे और भाजपा मालवा से जबरदस्त सीटें लेकर सत्ता के निकट होगी पर मालवा से भाजपा को एक सीट नहीं मिली। राणा सोढ़ी करीब 24 हजार मत पा सके और उनके विरोधी आप के उम्मीदवार रणवीर सिंह 48 हजार मत हासिल कर जीत गए। राणा सोढ़ी तीसरे नंबर पर रहे। 

भाजपा ने माझा में अपना जनाधार व सीट हासिल करने के लिए पीपीसीसी के पूर्व प्रधान प्रताप बाजवा के भाई फतेहजंग बाजवा को पार्टी में शामिल किया। फतेहजंग बाजवा को भाजपा ने बटाला सीट पर उतारा, जो भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन फतेहजंग बाजवा 13 हजार 879 वोट ही हासिल कर सके। फतेहजंग बाजवा चौथे नंबर पर रहे हैं।

अकाली दल के पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ को पार्टी में शामिल कर जालंधर कैंट से उम्मीदवार बनाया गया। मक्कड़ 15 हजार 946 मत हासिल कर चौथे नंबर पर रहे। हालांकि इस सीट पर हिंदू मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है और पार्टी को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी कि सिख चेहरे को मैदान में उतारकर हिंदू व सिख दोनों के मत हासिल होंगे। भाजपा ने पंजाब में सिख चेहरों को आगे लाना शुरू कर दिया था। मनजिंदर सिंह सिरसा के बाद पंजाब में प्रो. सरचांद सिंह जैसे नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था। 

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