फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   lawyer who addresses my lord, Punjab and haryana highcourt

जज को माय लॉर्ड बोलने पर नहीं दी जा सकती वकील को सजा: हाईकोर्ट

Sat, 24 Jun 2017 09:24 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 24 Jun 2017 09:24 AM IST
विज्ञापन
lawyer who addresses my lord, Punjab and haryana highcourt
Court
जजों के संबोधन को लेकर बनी दुविधा की स्थिति के बीच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे लेकर अहम आदेश जारी किए हैं। जस्टिस राजेश बिंदल पर आधारित खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जज को माय लॉर्ड संबोधित करने वाले वकील पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही यह संबोधन बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के खिलाफ है लेकिन नियमों में कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
विज्ञापन


इस मामले में याचिका दाखिल करते हुए अमृतसर निवासी याचिकाकर्ता ने कहा था कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के पार्ट 4 चैप्टर 3 ए के तहत विभिन्न स्तर पर जज को संबोधित करने के तरीके का वर्णन है। इसके अनुसार उच्च न्यायपालिका के जज को योर ऑनर या ऑनरेबल कोर्ट कहकर संबोधित किया जाना चाहिए और निचली अदालतों के जजों को सर कहकर संबोधित किया जा सकता है। याची ने कहा कि इन नियमों के खिलाफ जज को संबोधित करने के लिए माय लॉर्ड योर लॉर्डशिप संबोधन का प्रयोग किया जा रहा है। नियमों के खिलाफ होने के कारण इस संबोधन का प्रयोग करने वाले वकील के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
विज्ञापन


जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने याची पक्ष की दलील को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के पार्ट 4 चैप्टर 3 ए के तहत संबोधन का तो जिक्र है लेकिन इस बात का कहीं उल्लेख नहीं है कि इसकी पालना न करने पर वकील के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में इस याचिका को आधारहीन मानते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या है माय लॉड से जुड़ा विवाद

lawyer who addresses my lord, Punjab and haryana highcourt
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
क्या है माय लॉड से जुड़ा विवाद
जज को माय लॉर्ड या योर लॉर्डशिप को लेकर विवाद है। माय लॉर्ड व योर लॉर्डशिप को औपनिवेशिक पदों के अवशेष के रूप में देखा जाता है जो दूसरे शब्दों में गुलामी का प्रतीक है। देश की कई बार काउंसिल प्रस्ताव लाकर यह तय कर चुकी हैं कि जज को यह कहकर संबोधित नहीं करेंगी।

मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस के चंद्रू ने 2009 में अपनी कोर्ट में माय लॉर्ड संबोधन को बैन कर दिया था। 2014 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एचएल दत्तू व जस्टिस एसए बोबडे ने एडवोकेट शिव सागर तिवारी की जनहित याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि माय लॉर्ड, योर लॉर्डशिप संबोधन अनिवार्य नहीं है। यदि सर कहा जाए तो भी मंजूर, योर ऑनर भी मंजूर, माय लॉर्ड भी मंजूर है कोई भी संबोधन हो बस सम्मान के साथ होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed