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अब स्नैचिंग करके दिखाएं, 14 साल के लिए जेल की हवा खानी पड़ेगी, लिया गया बड़ा फैसला
Wed, 18 Dec 2019 01:46 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 18 Dec 2019 01:46 PM IST
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अब स्नैचिंग करने वालों की खैर नहीं, क्योंकि अब कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल के लिए जेल की हवा खानी पड़ेगी। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर हरियाणा द्वारा वर्ष 2014 में स्नैचिंग के अपराध पर नकेल कसने के लिए बनाए गए कानून के सीआरपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 को चंडीगढ़ में लागू कर दिया है। अब स्नैचिंग करने वाले झपटमारों पर धारा 379बी और ए लगेगी। 379बी में कम से कम 10 साल और अधिकतम 14 साल जबकि 379ए में कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।
इसके अलावा 25 हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है। स्नैचिंग केसों की सुनवाई भी अब सेशन कोर्ट में की जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की इस अधिसूचना के बाद अब चंडीगढ़ में भी हरियाणा का स्नैचिंग कानून पूर्ण रूप से लागू हो गया है। पहले मई 2019 में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से सिर्फ आईपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 को चंडीगढ़ में लागू किया गया था। चंडीगढ़ प्रशासन ने सीआरपीसी को लागू करने के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा, जिसकी वजह से केंद्रीय सरकार की तरफ से अधूरा कानून ही लागू किया गया।
यूटी प्र्रशासन की इस भूल का फायदा उन स्नैचरों को हुआ है, जो मई 2019 और 16 दिसंबर के बीच गिरफ्तार किए गए हैं। क्योंकि अधूरे कानून की अधिसूचना की वजह से बीते साढ़े 6 महीने में गिरफ्तार किए गए स्नैचरों पर धारा 356 और 379 लगाई गई है, जिसके तहत दोषी को अधिक से अधिक तीन साल की सजा का ही प्रावधान है। अगर पहले ही केंद्र सरकार की तरफ से आईपीसी और सीआरपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 को चंडीगढ़ में लागू कर दिया जाता तो पकड़े गए स्नैचरों पर धारा 379बी और ए लगाई जाती।
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इसके अलावा 25 हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है। स्नैचिंग केसों की सुनवाई भी अब सेशन कोर्ट में की जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की इस अधिसूचना के बाद अब चंडीगढ़ में भी हरियाणा का स्नैचिंग कानून पूर्ण रूप से लागू हो गया है। पहले मई 2019 में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से सिर्फ आईपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 को चंडीगढ़ में लागू किया गया था। चंडीगढ़ प्रशासन ने सीआरपीसी को लागू करने के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा, जिसकी वजह से केंद्रीय सरकार की तरफ से अधूरा कानून ही लागू किया गया।
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यूटी प्र्रशासन की इस भूल का फायदा उन स्नैचरों को हुआ है, जो मई 2019 और 16 दिसंबर के बीच गिरफ्तार किए गए हैं। क्योंकि अधूरे कानून की अधिसूचना की वजह से बीते साढ़े 6 महीने में गिरफ्तार किए गए स्नैचरों पर धारा 356 और 379 लगाई गई है, जिसके तहत दोषी को अधिक से अधिक तीन साल की सजा का ही प्रावधान है। अगर पहले ही केंद्र सरकार की तरफ से आईपीसी और सीआरपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 को चंडीगढ़ में लागू कर दिया जाता तो पकड़े गए स्नैचरों पर धारा 379बी और ए लगाई जाती।
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स्नैचिंग पर सख्ती बरतने वाला चंडीगढ़ बना पहला यूटी
चंडीगढ़ देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है, जहां पर चेन स्नैचिंग करने वाले अपराधियों पर 10 साल की सजा का प्रावधान लागू कर दिया गया है। हरियाणा सरकार ने वर्ष 2014 में चेन स्नैचिंग को लेकर दस साल की सजा का कानून बनाया था। इस एक्ट को चंडीगढ़ में लागू कराने का प्रस्ताव यूटी प्रशासन की ओर से भेजा गया था। यूटी प्रशासन के अनुरोध पर गृह मंत्रालय ने मई 2019 में हरियाणा के स्नैचिंग विरोधी कानून के आईपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 का विस्तार किया।
यूटी की तरफ से सीआरपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 को लागू करने का प्रस्ताव भेजा ही नहीं गया। बाद में प्रशासन को अधूरे कानून का ध्यान आया तो जून 2019 में सीआरपीसी को भी लागू करने का प्रस्ताव भेजा। अब जाकर केंद्र ने इसे भी चंडीगढ़ में लागू कर दिया है। गौरतलब है कि अपराध की परिभाषा तब तक पूरी नहीं होती जब तक उसके साथ प्रोसीजर नहीं लगता इसलिए आईपीसी और सीआरपीसी दोनों साथ-साथ चलती हैं।
इसलिए चंडीगढ़ में जरूरी था यह कानून
चंडीगढ़ में 1 जनवरी से पांच दिसंबर 2019 के बीच 118 चेन स्नैचिंग की वारदातें हुई हैं। कई वारदातों में पीड़ित को चोट भी आई है। इसके अलावा वर्ष 2018 में करीब 162 स्नैचिंग की वारदातें हुई थीं। कम सजा के प्रावधान की वजह से आरोपी जल्द ही जमानत पर बाहर आ जाते थे और फिर से स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देते थे।
आज से स्नैचिंग पर यह दोनों धाराएं लगेंगी
379ए: इस धारा केअंतर्गत कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा। 25000 रुपये तक जुर्माना भी होगा।
379बी: इस धारा केअंतर्गत कम से कम 10 वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा। 25000 रुपये तक जुर्माना भी होगा।
यूटी की तरफ से सीआरपीसी (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2014 को लागू करने का प्रस्ताव भेजा ही नहीं गया। बाद में प्रशासन को अधूरे कानून का ध्यान आया तो जून 2019 में सीआरपीसी को भी लागू करने का प्रस्ताव भेजा। अब जाकर केंद्र ने इसे भी चंडीगढ़ में लागू कर दिया है। गौरतलब है कि अपराध की परिभाषा तब तक पूरी नहीं होती जब तक उसके साथ प्रोसीजर नहीं लगता इसलिए आईपीसी और सीआरपीसी दोनों साथ-साथ चलती हैं।
इसलिए चंडीगढ़ में जरूरी था यह कानून
चंडीगढ़ में 1 जनवरी से पांच दिसंबर 2019 के बीच 118 चेन स्नैचिंग की वारदातें हुई हैं। कई वारदातों में पीड़ित को चोट भी आई है। इसके अलावा वर्ष 2018 में करीब 162 स्नैचिंग की वारदातें हुई थीं। कम सजा के प्रावधान की वजह से आरोपी जल्द ही जमानत पर बाहर आ जाते थे और फिर से स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देते थे।
आज से स्नैचिंग पर यह दोनों धाराएं लगेंगी
379ए: इस धारा केअंतर्गत कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा। 25000 रुपये तक जुर्माना भी होगा।
379बी: इस धारा केअंतर्गत कम से कम 10 वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा। 25000 रुपये तक जुर्माना भी होगा।