फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Last date for nomination for Chandigarh mayor election 

चंडीगढ़ मेयर चुनाव : हर साल बगावत के भंवर में फंसती है भाजपा, आखिरी समय में खुलते हैं पत्ते

Mon, 04 Jan 2021 10:31 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 04 Jan 2021 10:31 AM IST
विज्ञापन
Last date for nomination for Chandigarh mayor election 
चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख चार जनवरी है। भाजपा ने अब तक उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की है, क्योंकि उसे बगावत का डर सता रहा है। हर साल मेयर चुनाव में भाजपा में कलह जरूर होती है। यही कारण है कि भाजपा अंतिम समय तक अपने पत्ते नहीं खोलती। नामांकन से कुछ समय पूर्व ही पार्टी उम्मीदवारों के नाम घोषित करती है। 
विज्ञापन

 
आठ जनवरी को चंडीगढ़ को नया मेयर मिलेगा। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस की ओर से देवेंद्र सिंह बबला को मेयर, रविंदर कौर गुजराल को सीनियर डिप्टी मेयर और सतीश कैंथ डिप्टी मेयर पद का उम्मीदवार बनाया गया है।   
विज्ञापन



भाजपा में हर साल होती है बगावत
  • 2020 में महिला सीट आरक्षित होने के कारण भाजपा की ओर से राजबाला मलिक, हीरा नेगी, सुनीता धवन और आशा जसवाल का नाम चर्चा में थे। टिकट राजबाला मलिक को मिला। इस पर भाजपा पार्षद चंद्रवती शुक्ला ने बगावत कर दी और मेयर के चुनाव के लिए पर्चा भरने की तैयारी शुरू कर दी। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने किसी तरह मामला संभाला। इसे लेकर मेयर दफ्तर में भाजपा व कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में हाथापाई तक हो गई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने चंद्रवती शुक्ला को अंदर कमरे में बंद कर काफी समझाया। तब जाकर मामला सुलझा।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • 2019 में भाजपा ने राजेश कालिया को अपना उम्मीदवार बनाया तो पार्षद सतीश कैंथ ने बगावत कर दी और निर्दलीय तौर पर कांग्रेस के समर्थन से मेयर चुनाव में कूद गए। बेशक वह चुनाव हार गए  लेकिन वह भाजपा के आठ पार्षदों के वोट क्रॉस करवाने में कामयाब रहे। राजेश कालिया चुनाव जीत गए लेकिन भाजपा की शहर में काफी किरकिरी हुई। लोकसभा चुनाव से पहले सतीश कैंथ भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।
  • 2018 में पार्टी ने पूर्व सांसद सत्यपाल जैन गुट के देवेश मोदगिल को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया। उस समय भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन गुट की आशा जसवाल ने बगावत करते हुए अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ नामांकन भर दिया। मतदान से एक दिन पहले टंडन गुट की मांग पर मोदगिल से माफीनामा लिखवाया गया। इसके बाद आशा जसवाल ने नामांकन वापस लिया। उस समय भी आशा जसवाल को 12 भाजपा पार्षदों ने समर्थन दिया था।
  • 2017 में नगर निगम में वित एवं अनुबंध कमेटी के पांच सदस्यों के लिए चुनाव हुआ जिसमें एक सीट पर सांसद किरण खेर गुट की पार्षद हीरा नेगी को खड़ा किया लेकिन गुटबाजी के कारण हीरा नेगी चुनाव हार गईं। जबकि भाजपा के पास नेगी को जीत दिलवाने का पूर्ण बहुमत था। इसके लिए खेर गुट ने टंडन गुट की हाईकमान को शिकायत भी की थी।
  • 2015 में सांसद किरण खेर के दबाव के कारण पार्टी ने हीरा नेगी को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया जबकि टंडन गुट आशा जसवाल को मेयर बनवाना चाहता था, लेकिन टंडन गुट की उम्मीदवार तय करते नहीं चली। जिसके बाद क्रॉस वोटिंग करते हुए हीरा नेगी को मेयर का चुनाव हरवा दिया। उस समय कांग्रेस के आठ पार्षद होने के बावजूद पूनम शर्मा चुनाव जीत गईं।
  • 1998 में भाजपा ने अपनी ही पार्टी द्वारा तय उम्मीदवार को हरवाकर बागी उम्मीदवार केवल कृष्ण आदिवाल को मेयर का चुनाव जितवा दिया था। 

पिछले साल भी अंतिम समय में तय हुआ था नाम

भाजपा में बगावत का डर ऐसा रहा है कि पिछले साल भी उम्मीदवार का नाम अंतिम समय में तय किया गया था। पिछली बार तो संगठन ने स्पष्ट कह दिया था, जिसने क्रॉस वोटिंग की, उसे भविष्य में टिकट मिलना मुश्किल होगा। ऐसे में भाजपा इस बार जीत से ज्यादा क्रॉस वोटिंग रोकने का प्रयास कर रही है। क्योंकि भाजपा नेताओं को लगता है कि उनके उम्मीदवार की जीत तय है लेकिन क्रॉस वोटिंग रोक कर वह इस बार एकजुटता का मैसेज हाईकमान को दे।

भाजपा के पास जीत के आंकड़े  
इस समय भाजपा के पास जीत के आंकड़े से ज्यादा मत हैं। नगर निगम में भाजपा के कुल 20 पार्षद हैं जबकि एक अकाली पार्षद व कांग्रेस के 5 पार्षद हैं। पिछले चुनाव तक अकाली दल का समर्थन भाजपा को था। इस बार दोनों दलों के बीच कुछ दूरियां बनी हुई हैं। एक मत सांसद का होता है। वह भी भाजपा के पक्ष में है। कुल मिलाकर भाजपा के पास जीत दर्ज करने के लिए पूरी क्षमता है। 

कांग्रेस को फिर बगावत का इंतजार 
इस समय कांग्रेस के पास जीत के आंकड़े भले ही न हों, लेकिन वह कुछ पार्षदों को भाजपा से तोड़ लेते हैं तो इसे भी वह अपनी जीत मानते हैं इसीलिए कांग्रेस उम्मीदवार भी अंतिम समय मे ही नामांकन भरते हैं ताकि कोई बागी पार्षद कांग्रेस में शामिल हो तो उसे तत्काल किसी पद के लिए उम्मीदवार बनाकर फॉर्म भरवा सकें। इसलिए इस बार कांग्रेस की नजर दावेदारी करने वाले पार्षदों पर रहेगी ताकि वह समय आने पर किसी को अपने पक्ष में कर सकें।  

यह साल दोनों पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण
इस साल का मेयर चुनाव महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि अगले साल नगर निगम चुनाव हैं इसलिए सत्ताधारी पार्टी वोट बैंक की चाह में हर संभव विकास कार्य कराने का प्रयास करेगी। वहीं विपक्ष सत्ता पक्ष की कमियों को जनता के सामने लाकर मुद्दा बनाने का प्रयास करेगा। हालांकि इस साल आम आदमी पार्टी और फिलहाल अलग चुनाव लड़ने वाली अकाली दल पूरी दमखम के साथ मैदान में उतरे तो भाजपा व कांग्रेस दोनों को कड़ी टक्कर मिलेगी।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed