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चंडीगड़ः लगातार गिर रहा भूजल स्तर, जमीन को छलनी कर 200 ट्यूबवेल से पेयजल की आपूर्ति
Sat, 08 Aug 2020 02:00 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 08 Aug 2020 02:00 PM IST
सार
- कजौली से अतिरिक्त पानी आने के बावजूद बंद नहीं हुए ट्यूबवेल
- जलशक्ति अभियान में ज्यादातर ट्यूबवेल निगम को करने थे बंद
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
चंडीगढ़ का भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। जलशक्ति अभियान के तहत गिरते भू-जल स्तर वाले शहरों में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल है। इसके बावजूद 200 ट्यूबवेल जमीन को छलनी कर शहर में पेयजल सप्लाई कर रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब कजौली वाटर वर्क्स के छह फेजों से 90 एमजीडी पानी शहर में सप्लाई हो रहा है।
बीते साल भू-जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देशभर के 254 ऐसे जिलों की सूची तैयार की थी, जहां पर तेजी से भू-जल स्तर गिर रहा था। उसमें चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था। शहर में कुल 287 ट्यूबवेल थे, जिसमें से निगम ने 56 तो बंद कर दिए, वहीं 31 ट्यूबवेल अस्थायी रूप से बंद हैं। 200 ट्यूबवेल अभी भी जमीन से पानी खींच रहे हैं।
हालांकि, निगम ने दावा किया था कि कजौली वाटर वर्क्स से पांचवें और छठे फेज का पानी आने के बाद ज्यादातर ट्यूबवेल को बंद कर देंगे, लेकिन इन दोनों फेजों से पानी आने के बाद भी निगम ने मात्र कुछ ट्यूबवेल ही बंद किए हैं। इस कारण जितना पानी भूमि से निकाला जा रहा है, उतना भूमि के अंदर नहीं जा पा रहा है। इससे भू-जल स्तर पर गिरावट आ रही है।
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केंद्र की रिपोर्ट आने के बाद एडवाइजर मनोज परिदा ने डीसी मनदीप सिंह बराड़ और निगम कमिश्नर केके यादव के साथ मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए कहा था। इसके लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रीयूज वाटर, वाटर बॉडी को फिर से रीजनरेट करना, मास अवेयरनेस, प्लांटेशन ड्राइव के माध्यम से भू-जल स्तर बढ़ाने की कोशिश करने को कहा था।
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बीते साल भू-जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देशभर के 254 ऐसे जिलों की सूची तैयार की थी, जहां पर तेजी से भू-जल स्तर गिर रहा था। उसमें चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था। शहर में कुल 287 ट्यूबवेल थे, जिसमें से निगम ने 56 तो बंद कर दिए, वहीं 31 ट्यूबवेल अस्थायी रूप से बंद हैं। 200 ट्यूबवेल अभी भी जमीन से पानी खींच रहे हैं।
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हालांकि, निगम ने दावा किया था कि कजौली वाटर वर्क्स से पांचवें और छठे फेज का पानी आने के बाद ज्यादातर ट्यूबवेल को बंद कर देंगे, लेकिन इन दोनों फेजों से पानी आने के बाद भी निगम ने मात्र कुछ ट्यूबवेल ही बंद किए हैं। इस कारण जितना पानी भूमि से निकाला जा रहा है, उतना भूमि के अंदर नहीं जा पा रहा है। इससे भू-जल स्तर पर गिरावट आ रही है।
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केंद्र की रिपोर्ट आने के बाद एडवाइजर मनोज परिदा ने डीसी मनदीप सिंह बराड़ और निगम कमिश्नर केके यादव के साथ मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए कहा था। इसके लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रीयूज वाटर, वाटर बॉडी को फिर से रीजनरेट करना, मास अवेयरनेस, प्लांटेशन ड्राइव के माध्यम से भू-जल स्तर बढ़ाने की कोशिश करने को कहा था।
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की रिपोर्ट भी अब तक नहीं मिली
भूमि में जल के स्तर को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाया जाए। एडवाइजर ने कहा था कि जिन इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है, प्रशासन व निगम उन्हें चिह्नित करे।
उसके बाद देखे कि कहां यह सिस्टम चालू है और कहां बेकार है। उसके बाद सभी सरकारी व निजी इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करें। शहर में देखरेख के अभाव में ज्यादातर वाटर हार्वेस्टिंग बेकार पड़े हैं। कई स्कूलों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा है। अब तक इनकी रिपोर्ट नहीं मिल सकी है।
पानी को रीयूज करने के लिए पांच एसटीपी का किया जा रहा टेंडर
स्मार्ट सिटी के तहत शहर के पांच एसटीपी को अपग्रेड कराया जा रहा है। क्यों कि चंडीगढ़ में काफी पानी उपयोग होता है। एसटीपी के माध्यम से इस पानी को फिर से उपयोग योग्य बनाया जा सकता है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पानी में डायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (डीओडी) को कम करेगा।
एनजीटी के निर्देशानुसार इस प्रोेजेक्ट में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी का डीओडी पांच से कम करना है। हालांकि, 10 से कम डीओडी भी खतरनाक नहीं है। इसके अलावा नाइट्रेट व फॉस्फोरस की मात्रा भी काफी कम हो जाएगी। किशनगढ़ के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में डीओडी 2 से कम रहेगा। इस प्लांट से निकलने वाले पानी को लेक में भी उपयोग करने की योजना है।
उसके बाद देखे कि कहां यह सिस्टम चालू है और कहां बेकार है। उसके बाद सभी सरकारी व निजी इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करें। शहर में देखरेख के अभाव में ज्यादातर वाटर हार्वेस्टिंग बेकार पड़े हैं। कई स्कूलों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा है। अब तक इनकी रिपोर्ट नहीं मिल सकी है।
पानी को रीयूज करने के लिए पांच एसटीपी का किया जा रहा टेंडर
स्मार्ट सिटी के तहत शहर के पांच एसटीपी को अपग्रेड कराया जा रहा है। क्यों कि चंडीगढ़ में काफी पानी उपयोग होता है। एसटीपी के माध्यम से इस पानी को फिर से उपयोग योग्य बनाया जा सकता है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पानी में डायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (डीओडी) को कम करेगा।
एनजीटी के निर्देशानुसार इस प्रोेजेक्ट में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी का डीओडी पांच से कम करना है। हालांकि, 10 से कम डीओडी भी खतरनाक नहीं है। इसके अलावा नाइट्रेट व फॉस्फोरस की मात्रा भी काफी कम हो जाएगी। किशनगढ़ के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में डीओडी 2 से कम रहेगा। इस प्लांट से निकलने वाले पानी को लेक में भी उपयोग करने की योजना है।
तालाबों को गोद लेने की योजना ठंडे बस्ते में
केंद्र से भूमि का जलस्तर गिरने की रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम और प्रशासन ने शहर व गांव के तालाबों को गोद लेने की योजना बनाई थी ताकि इन्हें फिर से जीवित किया जा सके। नगर निगम ने खुड्डा अलीशेर में दो एकड़ में बने तालाब को गोद लिया था। वहीं, प्रशासन ने सेक्टर 42 की न्यू लेक को गोद लिया था। दोनों में हालत यह है कि मात्र थोड़ा सा पानी एक गड्ढे में भरा हुआ है। जब अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं होंगे तो भू जल स्तर तो नीचे जाएगा ही।
ग्रामीणों के सहयोग से तालाब में पानी भरवाया गया था। समय-समय पर तालाब में ट्यूबवेल से पानी भरा जाता है। हालांकि, अभी तालाब में पानी कम बचा है। आगे इसके लिए व्यवस्था कराएंगे।
- शैलेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर
जब नगर निगम की ओर से सूचना मिलती है तो गांव वालों के साथ मिलकर तालाब में पानी भरवाया जाता है। इसमें निगम ने सहयोग की भी बात की थी। फिलहाल निगम की ओर से ऐसा कोई सहयोग तो नहीं मिला।
- हुकुमचंद, पूर्व सरपंच, खुड्डाअलीशेर
ग्रामीणों के सहयोग से तालाब में पानी भरवाया गया था। समय-समय पर तालाब में ट्यूबवेल से पानी भरा जाता है। हालांकि, अभी तालाब में पानी कम बचा है। आगे इसके लिए व्यवस्था कराएंगे।
- शैलेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर
जब नगर निगम की ओर से सूचना मिलती है तो गांव वालों के साथ मिलकर तालाब में पानी भरवाया जाता है। इसमें निगम ने सहयोग की भी बात की थी। फिलहाल निगम की ओर से ऐसा कोई सहयोग तो नहीं मिला।
- हुकुमचंद, पूर्व सरपंच, खुड्डाअलीशेर
खास बातें
- 256 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की खपत
- 30 प्रतिशत पानी लीकेज में होता है बर्बाद
- 06 फेज से पानी सप्लाई होता है शहर में
- 90 एमजीडी पानी मिलता है शहर को
- 110 एमजीडी पानी की है खपत
- 200 ट्यूबवेल से 22 एमजीडी पानी होता है सप्लाई
- 42 हजार नल के उपभोक्ता हैं शहर में
- 40 करोड़ के बिल विवादित हैं निगम के
- 03 समय पेयजल सप्लाई होती है शहर में
- 115 एमजीडी तक खपत बढ़ जाती है गर्मियों में
- 30 प्रतिशत पानी लीकेज में होता है बर्बाद
- 06 फेज से पानी सप्लाई होता है शहर में
- 90 एमजीडी पानी मिलता है शहर को
- 110 एमजीडी पानी की है खपत
- 200 ट्यूबवेल से 22 एमजीडी पानी होता है सप्लाई
- 42 हजार नल के उपभोक्ता हैं शहर में
- 40 करोड़ के बिल विवादित हैं निगम के
- 03 समय पेयजल सप्लाई होती है शहर में
- 115 एमजीडी तक खपत बढ़ जाती है गर्मियों में