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Punjab: कई पुश्तों से चले आ रहे जमीनी-संपत्ति विवाद, सरकारों के एक्शन प्लान अब भी आम जनता की पहुंच से दूर
Mon, 08 Apr 2024 03:12 PM IST
निवेदिता वर्मा
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 08 Apr 2024 03:12 PM IST
सार
पंजाब में 2014 और 2019 में तत्कालीन सरकारों ने अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री के लिए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू की थी। हालांकि इस स्कीम के तहत भी एनओसी की अनिवार्यता समाप्त नहीं की गई थी लेकिन अवैध कालोनियों के लोगों की ओर से सहयोग न देने पर 12 दिसंबर 2019 को रजिस्ट्री के लिए एनओसी की अनिवार्यता खत्म कर दी थी।
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विस्तार
पंजाब में संपत्तियों से जुड़े विवाद पुश्तैनी चले आ रहे हैं। पुश्तैनी जमीनी और अन्य संपत्तियों के जुड़े प्रशासनिक विवादित मामलों ने प्रदेश की जनता को आर्थिक संकट की ओर धकेल दिया है। लंबे समय से इसका खामियाजा केवल प्रदेश की जनता ही नहीं, बल्कि सरकारें भी उठाती आ रही हैं। सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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सबसे बड़े विवाद के रूप में रिहायशी संपत्तियों के नक्शे पास करवाने और इनकी रजिस्टरी को लेकर सामने आते हैं। पंजाब की मौजूदा सरकार ने लंबे समय से चल रही इन समस्याओं के निस्तारण के लिए नई पहल की घोषणा कर दी है, लेकिन धरातल पर अभी इसकी रूपरेखा तैयार होकर लागू होना बाकी है।
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हाल ही में पंजाब सरकार ने नक्शा पास करवाने के लिए एनओसी की शर्त को खतम करने की घोषणा थी, इस फैसले के अंतर्गत अब आर्किटेक्ट नक्शा अप्रूव कर उसकी कॉपी सरकार को ऑनलाइन जमा करा सकेगा। लेकिन इस संदर्भ में सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी नहीं की गई है। कॉमर्शियल और इंडस्टि्रयल संपत्तियों में भी कई प्रकार की एनओसी, लीज डीड ट्रांसफर और अन्य समस्यों को लेकर कई उद्योगपति एवं कारोबारी वर्ग नई नीतियों की लंबे समय से बाट जोह रहा है।
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पंजाब में 14 हजार अवैध कॉलोनियां
पंजाब की मौजूदा सरकार ने लोगों को संपत्ति के मामलों में बड़ी राहत देने को लेकर एक अहम कदम उठाया था। पंजाब सरकार ने 2019 में बिना एनओसी सूबे में अवैध कॉलोनियों में सेल डीड की अनुमति संबंधी अधिसूचना जारी की थी। इसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अगर ऐसी अनुमति दी गई तो पंजाब अवैध कॉलोनियों से भर जाएगा।
गौरतलब है कि पंजाब में इस समय 14 हजार अवैध कॉलोनियां हैं, जिन्हें नियमित करने के उद्देश्य से एनओसी के बगैर रजिस्ट्री करने की प्रक्रिया लागू की गई थी।
एनआरआई के नाम लैंड रेवेन्यू रिकॉर्ड से हो रहे गायब
मूल रूप से पंजाब के बाशिंदे जो अब विदेश जाकर बस चुके हैं, उनकी जमीनों और नामों को लैंड रेवेन्यू रिकॉर्ड से गायब कर हड़पा जा रहा है। इसके पीछे पंजाब के कई बड़े भू-माफिया और प्रॉपर्टी डीलर शामिल है। पंजाब सरकार के साथ बीते कुछ महीनों पहले ही एनआईआर मिलनी कार्यक्रम हुआ था, जहां खुद एनआरआई सभा और लोगों ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया था। इस मामले में पंजाब सरकार ने कई बड़े बदलाव को लेकर एनआरआई समूल काे आश्वासन दिया है, देखना है कि एनआरआई सभा आने वाले समय में सरकार के बंदोबस्त से संतुष्ट नजर आता है या नहीं। वैसे पंजाब सरकार ने एनआरआई की मदद के लिए राजस्व विभाग के कामकाज संबंधित शिकायत हेल्पलाइन नंबर 81849-00002 और प्रवासी भारतीय की शिकायत 94641-00168 के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।
5,773 गांवों में जमीन की रजिस्ट्री की एनओसी की शर्त हटाई थी
पंजाब सरकार ने जनवरी 2023 में सूबे के 22 जिलों में 5773 गांवों के लोगों को जमीनों की रजिस्ट्री करवाने के लिए एनओसी की शर्त में छूट दी थी। हालांकि सरकार की सूची में मोहाली जिले का एक भी गांव शामिल नहीं था। सरकार ने गैरकानूनी कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए राजस्व विभाग की तरफ से कुछ समय पहले विकास अथॉरिटी या लोकल बॉडी के अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए एनओसी जरूरी कर दिया था। यह फैसला गांवों की रेवेन्यू लैंड पर भी लागू हो गया था, जिससे जमीन मालिकों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री करवाने से पहले एनओसी जरूरी हो गया था।
पंजाब में जमीन-जायदाद की रजिस्टरियों से जुड़ी समस्यों का हमारी सरकार ने निदान किया है। बीते तीन वर्षों के मुकाबले सरकार को रिकॉर्ड आमदन भी हुई है। वित्तीय साल 2023- 24 के फरवरी महीने तक खजाने में 3912. 67 करोड़ रुपए आ चुके हैं। बीते दो वर्षों में यह आमदान 3515. 27 और 3299.35 करोड़ रुपए रुपये रही थी। - ब्रह्म शंकर जिम्पा, राजस्व मंत्री, पंजाब सरकार।