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पैसों का अभाव, कोरोना का संकट.. इटली में फिलहाल नहीं खुलेगा पीयू यूबीएस का सेंटर
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के यूबीएस विभाग का इटली में खुलने वाला सेंटर फिलहाल नहीं खुलेगा। पीयू के पास पैसे का अभाव है। इसके अलावा कोरोना भी एक कारण बना हुआ है। हालांकि यह सेंटर पहले खुल जाता तो पीयू के पास इस समय विदेशी मुद्रा आ सकती थी, क्योंकि इस समय पर पढ़ाई पूरी तरह ऑनलाइन ही चल रही है। यहां के शिक्षक विदेशी विद्यार्थियों को ऑनलाइन कोर्स करवा सकते थे। इससे पीयू की माली हालत में भी सुधार हो जाता। अब 2022 तक ही इस सेंटर की स्थापना के बारे में सोचा जाएगा।
पीयू अंतरराष्ट्रीय जगत में अपनी साख बेहतर करने में जुटी हुई है। इसी को ध्यान में रखकर पिछले साल इटली के पेगासो यूनिवर्सिटी में एक सेंटर खोलने की तैयारी चल रही थी। इस सेंटर के जरिए एमबीए की ऑनलाइन कक्षाएं लगनी थीं। इसके लिए सिलेबस आदि पर काम चल रहा था। पीयू की एक टीम ने वहां का दौरा किया। टीम ने पाया था कि वहां के कामकाजी लोगों के पास समय का अभाव है। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन कोर्सेज करवाकर जोड़ा जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा भी पीयू के खजाने में आएगी। पीयू वीसी प्रो. राजकुमार भी इस कार्य के लिए विदेश गए थे। उन्होंने पूरा खाका तैयार करवाया। पिछले साल दिसंबर में इसे अंतिम रूप दिया जाना था, लेकिन इसमें देरी हो गई। इस समय कोरोना चल रहा है। ऐसे में सेंटर की स्थापना नहीं की जा सकती। सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव लगभग एक साल के लिए टाल दिया गया है। पीयू के महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक है। हालांकि स्थिति अप्रैल से जून तक भी ठीक होगी तो इस सेंटर की स्थापना के बारे में सोचा जा सकता है।
तीन अन्य देशों में भी खुलेंगे पीयू के सेंटर
इटली के अलावा थाईलैंड, स्विट्जरलैंड, मैक्सिको में भी पीयू अपने सेंटर खोलने की तैयारी कर रही है। यह प्रस्ताव पुराना ही है, लेकिन इस पर तैयारी चल रही है। इन देशों में कैसे और कहां पर सेंटर स्थापित हो सकते हैं, इसके लिए एक टीम ऑनलाइन ही दूसरे विश्वविद्यालयों से संपर्क साध रही है। इटली सेंटर की स्थापना के बाद इस पर काम होगा। यदि चार सेंटर पीयू स्थापित करने में सफल रही तो फिर उसके पास पैसे का अभाव नहीं होगा, क्योंकि ऑनलाइन कोर्सेज के लिए विदेशी मुद्रा बड़ी संख्या में आएगी। हालांकि पीयू को अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिलेबस बनाना होगा। इसके लिए मेहनत करनी होगी। इन देशों में जाकर यह भी पता लगाना होगा कि वहां के बाजार की जरूरतें क्या-क्या हैं। रोजगार किन क्षेत्रों में अधिक मिल रहा है या मिलने की संभावनाएं हैं। उसी के हिसाब से पीयू की टीम फिर कार्य करेगी।
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यूबीएस की रैंकिंग विश्व स्तर पर बेहतर
पीयू के यूबीएस की रैंकिंग विश्व स्तर पर बेहतर है। पिछले वर्षों में इस विभाग ने 15वीं रैंक एमबीए की हासिल की थी। यानी यहां से पढ़ाई करने वालों की डिमांड अधिक है और प्लेसमेंट भी बेहतर है। यहां का प्लेसमेंट पैकेज आईआईएम की तरह ही है। 50 लाख से अधिक का पैकेज विद्यार्थियों का यहां मिला है। इसी को ध्यान में रखते हुए विदेशों में इस विभाग का सेंटर स्थापित किया जा रहा था।
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पीयू अंतरराष्ट्रीय जगत में अपनी साख बेहतर करने में जुटी हुई है। इसी को ध्यान में रखकर पिछले साल इटली के पेगासो यूनिवर्सिटी में एक सेंटर खोलने की तैयारी चल रही थी। इस सेंटर के जरिए एमबीए की ऑनलाइन कक्षाएं लगनी थीं। इसके लिए सिलेबस आदि पर काम चल रहा था। पीयू की एक टीम ने वहां का दौरा किया। टीम ने पाया था कि वहां के कामकाजी लोगों के पास समय का अभाव है। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन कोर्सेज करवाकर जोड़ा जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा भी पीयू के खजाने में आएगी। पीयू वीसी प्रो. राजकुमार भी इस कार्य के लिए विदेश गए थे। उन्होंने पूरा खाका तैयार करवाया। पिछले साल दिसंबर में इसे अंतिम रूप दिया जाना था, लेकिन इसमें देरी हो गई। इस समय कोरोना चल रहा है। ऐसे में सेंटर की स्थापना नहीं की जा सकती। सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव लगभग एक साल के लिए टाल दिया गया है। पीयू के महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक है। हालांकि स्थिति अप्रैल से जून तक भी ठीक होगी तो इस सेंटर की स्थापना के बारे में सोचा जा सकता है।
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तीन अन्य देशों में भी खुलेंगे पीयू के सेंटर
इटली के अलावा थाईलैंड, स्विट्जरलैंड, मैक्सिको में भी पीयू अपने सेंटर खोलने की तैयारी कर रही है। यह प्रस्ताव पुराना ही है, लेकिन इस पर तैयारी चल रही है। इन देशों में कैसे और कहां पर सेंटर स्थापित हो सकते हैं, इसके लिए एक टीम ऑनलाइन ही दूसरे विश्वविद्यालयों से संपर्क साध रही है। इटली सेंटर की स्थापना के बाद इस पर काम होगा। यदि चार सेंटर पीयू स्थापित करने में सफल रही तो फिर उसके पास पैसे का अभाव नहीं होगा, क्योंकि ऑनलाइन कोर्सेज के लिए विदेशी मुद्रा बड़ी संख्या में आएगी। हालांकि पीयू को अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिलेबस बनाना होगा। इसके लिए मेहनत करनी होगी। इन देशों में जाकर यह भी पता लगाना होगा कि वहां के बाजार की जरूरतें क्या-क्या हैं। रोजगार किन क्षेत्रों में अधिक मिल रहा है या मिलने की संभावनाएं हैं। उसी के हिसाब से पीयू की टीम फिर कार्य करेगी।
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यूबीएस की रैंकिंग विश्व स्तर पर बेहतर
पीयू के यूबीएस की रैंकिंग विश्व स्तर पर बेहतर है। पिछले वर्षों में इस विभाग ने 15वीं रैंक एमबीए की हासिल की थी। यानी यहां से पढ़ाई करने वालों की डिमांड अधिक है और प्लेसमेंट भी बेहतर है। यहां का प्लेसमेंट पैकेज आईआईएम की तरह ही है। 50 लाख से अधिक का पैकेज विद्यार्थियों का यहां मिला है। इसी को ध्यान में रखते हुए विदेशों में इस विभाग का सेंटर स्थापित किया जा रहा था।