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जन्माष्टमी पर साड़ियों का क्रेज : कुट्टू और कड़ियाल बॉर्डर की साड़ी बनी महिलाओं की पहली पसंद
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चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। हर कोई त्योहार को खास बनाने में जुटा है। खासकर महिलाएं पर्व को लेकर ज्यादा दिलचस्पी दिखा रही हैं। इस बार बाजार में साड़ियों का क्रेज देखा जा रहा है। मॉल हो या मार्केट सभी जगह सिल्क साड़ियों की मांग बढ़ गई है। किसी को कुट्टू यानि चौड़े बार्डर की साड़ी तो किसी को कड़ियाल बॉर्डर वाली सिल्क साड़ी पसंद आ रही है।सेक्टर-15 स्थित लाजपत राय भवन में सिल्क साड़ियों की प्रदर्शनी में तमिलनाडु से आए कारीगर अफरोज का कहना है कि युवतियों में सिल्क की साड़ियों का काफी क्रेज है। उनकी पसंद को ध्यान में रखकर ही नए प्रयोग किए जा रहे हैं। मौजूदा समय में कांजीवरम, पोचमपल्ली, कांता सिल्क, उप्पड़ा सिल्क, मैसूर सिल्क, कोकोन सिल्क, टसर सिल्क, रियल कांचीपुरम सिल्क, कॉटन सिल्क की खरीदारी की जा रही है। ये साड़ियां 4500 से 80 हजार रुपये की कीमत में अलग-अलग डिजाइन में उपलब्ध हैं।
एक-एक बूटी बेहद महत्वपूर्ण
कारीगर गंगाधर का कहना है कि ट्रेडिशनल डिजाइन, बूटी डिजाइन, एक हजारा बूटी को भी युवतियां ज्यादा पसंद कर रही हैं। एक हजारा बूटी की खास बात यह है कि इसमें चौकड़ी बिठाकर गिनती करके एक-एक बूटी बनाई जाती है। इसमें चौकड़ी और लहरिया डिजाइन एकसाथ नजर आते हैं। वहीं, सिल्क के डार्क और लाइट शेड दोनों ही तरह की साड़ियों को पसंद किया जा रहा है।
साड़ी पहने तो इन बातों का रखें ख्याल
जरी वर्क और हैंड-वीविंग की वजह से ज्यादातर सिल्क की साड़ियां ड्राई क्लीन कराना ठीक होता है। इसके अलावा अगर आपकी साड़ी पर दाग याह धब्बे लग गए हैं तो सिल्क की साड़ी को कभी मशीन में नहीं धोना चाहिए। इससे साड़ी का फैब्रिक खराब हो जाता है। इसे हमेशा हाथों से धोएं और बेहद कम डिटर्जेंट पाउडर या शैंपू का इस्तेमाल करें। कुछ देर के लिए इसे शैंपू के पानी में भिगोकर रखें। उसके बाद इसे सामान्य पानी से धो लें।
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- सिल्क की साड़ी को कभी लंबे समय तक एक तह में नहीं रखना चाहिए। समय-समय पर रिफोल्ड करते रहें। इसके अलावा साड़ी को सीधे तौर पर हैंगर में न लटकाएं। इसे सूती कपड़े में बांधकर या फिर साड़ी कवर में डालकर रखें।
- सिल्क की साड़ी को प्रेस करते समय प्रेस के तापमान को सिल्क पर सेट करें। नीचे कॉटन का कपड़ा बिछाएं। साड़ी पर कभी भी पानी के छींटे नहीं मारने चाहिएं उससे दाग पड़ सकते हैं। साड़ी को उल्टा करके प्रेस करें।
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एक-एक बूटी बेहद महत्वपूर्ण
कारीगर गंगाधर का कहना है कि ट्रेडिशनल डिजाइन, बूटी डिजाइन, एक हजारा बूटी को भी युवतियां ज्यादा पसंद कर रही हैं। एक हजारा बूटी की खास बात यह है कि इसमें चौकड़ी बिठाकर गिनती करके एक-एक बूटी बनाई जाती है। इसमें चौकड़ी और लहरिया डिजाइन एकसाथ नजर आते हैं। वहीं, सिल्क के डार्क और लाइट शेड दोनों ही तरह की साड़ियों को पसंद किया जा रहा है।
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साड़ी पहने तो इन बातों का रखें ख्याल
जरी वर्क और हैंड-वीविंग की वजह से ज्यादातर सिल्क की साड़ियां ड्राई क्लीन कराना ठीक होता है। इसके अलावा अगर आपकी साड़ी पर दाग याह धब्बे लग गए हैं तो सिल्क की साड़ी को कभी मशीन में नहीं धोना चाहिए। इससे साड़ी का फैब्रिक खराब हो जाता है। इसे हमेशा हाथों से धोएं और बेहद कम डिटर्जेंट पाउडर या शैंपू का इस्तेमाल करें। कुछ देर के लिए इसे शैंपू के पानी में भिगोकर रखें। उसके बाद इसे सामान्य पानी से धो लें।
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- सिल्क की साड़ी को कभी लंबे समय तक एक तह में नहीं रखना चाहिए। समय-समय पर रिफोल्ड करते रहें। इसके अलावा साड़ी को सीधे तौर पर हैंगर में न लटकाएं। इसे सूती कपड़े में बांधकर या फिर साड़ी कवर में डालकर रखें।
- सिल्क की साड़ी को प्रेस करते समय प्रेस के तापमान को सिल्क पर सेट करें। नीचे कॉटन का कपड़ा बिछाएं। साड़ी पर कभी भी पानी के छींटे नहीं मारने चाहिएं उससे दाग पड़ सकते हैं। साड़ी को उल्टा करके प्रेस करें।