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Hindi News ›   Chandigarh ›   Kushan kali Stairs Found in Sitasar Sarovar at Sunam Udham Singh Wala, Sangrur

संगरूरः सीतासर सरोवर के किनारे पर मिलीं कुषाणकालीन सीढ़ियां, पहले भी मिल चुके हैं पुराने सिक्के

Wed, 12 Feb 2020 01:53 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)
सुशील कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 12 Feb 2020 01:53 PM IST
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Kushan kali Stairs Found in Sitasar Sarovar at Sunam Udham Singh Wala, Sangrur
कुषाणकालीन सीढ़ियां - फोटो : अमर उजाला
प्राचीन सीतासर सरोवर के पास कुषाणकालीन सीढ़ियां मिली हैं। एक फीट लंबी और चौड़ी ईंटों से बनीं ये सीढ़ियां सरोवर के अंदर दबी मिली। इनको एएसआई ने उठाई खुदाई करवाने की मांग। जानकारी के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व की तैयारी को लेकर हो रही सफाई के दौरान मंदिर के सेवकों ने इन सीढ़ियों को देखा और तुरंत इसकी जानकारी प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों और इतिहासकार रामेश्वर दास जिंदल को दी। पुरातत्वविद जिंदल ने कहा कि इन सीढ़ियों का संबंध कुषाणकाल से हैं।
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वहीं यहां पर बार बार कुषाणकाल और आदिकाल से संबंधित अवशेष मिलते रहते हैं। ऐसे में पुरातत्वविभाग सर्वे ऑफ इंडिया को इस क्षेत्र की खुदाई करनी चाहिए। बता दें कि सीतासर मंदिर व सरोवर में इससे पहले भी कई बार प्राचीन अवशेष मिल चुके हैं। वहीं यहां पर कई वर्ष पहले सप्तऋषी घाट और करीब तीन हजार साल पुराने सिक्के मिले थे। जिंदल ने कहा कि सरोवर में देशभर से श्रद्धालु स्नान करने आते थे और स्नान के बाद सिक्के डालना हिंदू प्रथा रही है।
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करीब तीन हजार पुराने सिक्कों का सरोवर से मिलना भी यह प्रमाणित करता है कि इसका इतिहास काफी पुराना है। लेकिन जानकारी के अभाव के कारण मंदिर कमेटी ने खुदाई नहीं की और इन घाटों को मिट्टी में ही दबा दिया। उस समय एएसआई से आग्रह किया था कि मंदिर व सरोवर की खुदाई करके प्राचीन इतिहास खोजा जाए। जिंदल ने कहा कि सरोवर के आसपास किसी प्राचीन मंदिर के दबे होने के आसार नजर आ रहे हैं। यह पूरा स्थल हजारों वर्ष पहले आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है और इसका विवरण कई प्राचीन ग्रंथों में दर्ज है।
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धूल फांक रहे हैं कुषाणकालीन अवशेष

मंदिर के आसपास बिखरे पडे़ प्राचीन अवशेष धूल फांकते हुए नजर आ रहे हैं। कुषाणकालीन इंटें तो सरोवर के चारों तरफ बिखरी पड़ी हैं। सरोवर के एक किनारे पर स्थित प्राचीन मौहने पौंड़ियां मंदिर और दूसरे किनारे पर स्थित शनिदेव मंदिर के आसपास कुषाणकालीन अवशेष समय की मार से नष्ट हो रहे हैं।

मंदिर कमेटी के प्रतिनिधि हरिदेव गोयल ने कहा कि करीब आधी सदी से यहां प्राचीन अवशेष मिलने का सिलसिला जारी है। एएसआई की टीम यहां कई बार विजिट कर चुकी है और विजिट के आधार पर रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि यहां कुषाणकाल के अवशेष मौजूद हैं। लेकिन इन अवशेषों को सुरक्षित नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि इस अति दुर्लभ व प्राचीन मंदिर के इतिहास को उजागर करके पूरी दुनिया को इससे रूबरू करवाया जाए।
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