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हरियाणा: सुनील जाखड़ के बाद कुलदीप बिश्नोई भी दे सकते हैं कांग्रेस को झटका, भविष्य की राजनीति गढ़ने में जुटे, कयासबाजी शुरू
Fri, 20 May 2022 01:28 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 20 May 2022 01:28 AM IST
सार
कयास यह भी हैं कि अगर कांग्रेस में कुलदीप की दाल न गली तो वह पुरानी साथी रही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। मुख्यमंत्री के साथ कुलदीप के पुराने राजनीतिक संबंध हैं।
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- फोटो : @bishnoikuldeep
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विस्तार
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष न बनने से नाराज चल रहे आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई भविष्य की राजनीति गढ़ने में जुट गए हैं। कांग्रेस में बड़ा ओहदा या मान-सम्मान न मिलने पर आने वाले समय में उनकी राह कांग्रेस से इतर हो सकती है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ बुधवार शाम गुरुग्राम में हुई बिश्नोई की मुलाकात ने इस संभावना को और बल दिया है।
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काम भले विधानसभा क्षेत्र की पंचायत से जुड़ा हो लेकिन सियासी चर्चा में खिचड़ी कुछ और ही पकी है। कुलदीप क्षेत्र के काम के बहाने राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर साफ किया है मुख्यमंत्री के साथ उनकी राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई है। इसके सियासी गलियारों में अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
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कयास यह भी हैं कि अगर कांग्रेस में कुलदीप की दाल न गली तो वह पुरानी साथी रही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। मुख्यमंत्री के साथ कुलदीप के पुराने राजनीतिक संबंध हैं। उन्हें वह अपना, बेटे, पत्नी और समर्थक नेताओं का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने में भुना सकते हैं। 10 जून को प्रदेश में दो राज्यसभा सीटों के लिए भी चुनाव होना है। एक सीट भाजपा तो दूसरी कांग्रेस के खाते में जा सकती है।
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सत्तारूढ़ भाजपा ने अगर कांग्रेस के खेमे में सेंध लगा डाली तो दोनों सीटों पर उसका कब्जा हो सकता है। कांग्रेस के इस समय 31 विधायक हैं। अगर यह संख्या राज्यसभा चुनाव की वोटिंग में 30 से नीचे आई तो कांग्रेस का गणित गड़बड़ा जाएगा। कुलदीप पहले ही कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा के राज्यसभा प्रत्याशी न होने पर भाजपा उनके समर्थक विधायकों को भी तोड़ सकती है।
कुलदीप को अभी तक राहुल गांधी ने मुलाकात का समय नहीं दिया है। अगर दस जून से पहले दोनों नेताओं की मुलाकात न हुई तो कुछ भी संभव है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष उदयभान का कहना है कि कुलदीप बिश्नोई पार्टी से नाराज नहीं हैं। उनके कुछ मतभेद हैं, जिन्हें जल्द दूर कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री के साथ विधायक अपने क्षेत्र के कामों को लेकर मिलते रहते हैं, इसे अन्यथा नहीं लेना चाहिए।