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हुड्डा के राजनीतिक समीकरण बदलेगी कुलदीप की घर वापसी

Thu, 28 Apr 2016 11:23 AM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़।
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Thu, 28 Apr 2016 11:23 AM IST
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kuldeep bishnoi, bhupinder hooda, ex cm hooda, hjc, haryana congress, haryana
सदन से अनुपस्थित रहे कांग्रेस विधायक दल - फोटो : amarujala
हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई की कांग्रेस में वापसी के साथ ही सूबे के राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे। कांग्रेस में कुलदीप की वापसी का सबसे ज्यादा असर
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की राजनीति पर पड़ेगा। अभी तक प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी और कुमारी सैलजा का विरोध झेल रहे हुड्डा का विरोध करने
वाला एक और खेमा कांग्रेस में सक्रिय हो जाएगा।

कुलदीप का कांग्रेस छोड़ने का एक बड़ा कारण पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा का मुख्यमंत्री बनना भी रहा था। वर्ष 2005 में कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा विधानसभा का चुनाव पूर्व
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मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल के नेतृत्व में लड़ा था। पार्टी ने 67 सीटों पर जीत भी हासिल की थी, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने ऐन मौके पर भजनलाल की जगह भूपेंद्र सिंह
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हुड्डा को मुख्यमंत्री बना दिया था। कांग्रेस के इस फैसले का धक्का भजनलाल को लगा और वे हाशिए पर आ गए, जिसके बाद दिसंबर 2007 में कुलदीप बिश्नोई ने
भजनलाल के नेतृत्व में रोहतक में रैली का आयोजन कर हरियाणा जनहित कांग्रेस (बीएल) का गठन कर दिया।

वर्ष 2009 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान हजकां से चुनाव जीतकर आए छह विधायक कांग्रेस में चले गए और कुलदीप बिश्नोई अकेले रह गए। 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में हजकां केवल दो सीटों पर ही सिमट गई। हरियाणा में भड़की जाट आरक्षण की आग के बाद से कांग्रेस सूबे में नॉन जाट लीडर की तलाश में थी। कुलदीप के आने से कांग्रेस में यह कमी पूरी हो जाएगी। हालांकि, यह राजनीतिक हलचल ऐसे समय पर हुई है, जब प्रदेश में कोई भी बड़ा चुनाव नहीं है, लेकिन सभी राजनीतिक दल स्वयं को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने में लगे हुए हैं। इसके अलावा हजकां कार्यकर्ताओं का भी काफी समय से कुलदीप पर दबाव था। भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद हजकां कार्यकर्ता आधार तलाश रहे थे।

सोनिया और शकील से मुलाकात के बाद तय होंगी शर्तें
कुलदीप बिश्नोई की राहुल गांधी से मुलाकात हो चुकी है। हरियाणा प्रभारी शकील अहमद और सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद विलय की शर्तों और रणनीति पर विचार
किया जाएगा, जिसके बाद कभी भी विलय की घोषणा हो जाएगी। यह घोषणा कुलदीप बिश्नोई दिल्ली में करेंगे। उसके बाद हरियाणा में एक बड़ी रैली कर अपनी ताकत का
एहसास भी करवाने की कोशिश रहेगी।
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