हाईकोर्ट की तीन बड़ी खबरें: पूर्व विधायक जीरा ने सुरक्षा में कटौती को दी चुनौती, मजीठिया की याचिका पर फैसला सुरक्षित
एनडीपीएस मामले में गिरफ्तार अकाली नेता बिक्रम मजीठिया की नियमित जमानत की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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पंजाब सरकार द्वारा 400 से अधिक लोगों की सुरक्षा में कटौती के बाद से ही लगातार इसे चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिकाएं पहुंच रही हैं। इसी क्रम में अब कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा ने याचिका दाखिल कर सुरक्षा कम करने के पंजाब सरकार के फैसले को चुनौती दी है। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 2 जून के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जीरा ने याचिका में कहा है कि उन्हें पंजाब में आतंकवाद के दौरान 1985 से जान के खतरे को देखते हुए सुरक्षा मिली थी। उस समय दी गई सुरक्षा अभी तक सभी सरकारों ने जारी रखी थी। पंजाब में नई सरकार बनने के बाद सरकार ने बिना सोचे समझे व खतरे का आंकलन किए 400 से अधिक लोगों की सुरक्षा में कटौती कर दी है।
याची ने बताया कि उसकी सुरक्षा को भी बिना जानकारी और सुनवाई का कोई मौका दिए कम कर दिया गया। ऐसे में उसकी जान को खतरा है और उसकी सुरक्षा में कटौती का जो आदेश है उसे वापस लिया जाए। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर अब पंजाब सरकार से जवाब मांग लिया है। इस याचिका पर सुरक्षा को लेकर लंबित अन्य याचिकाओं के साथ सुनवाई होगी।
मजीठिया के एनडीपीएस मामले में नियमित जमानत की मांग पर फैसला सुरक्षित
उधर, एनडीपीएस मामले में गिरफ्तार अकाली नेता बिक्रम मजीठिया की नियमित जमानत की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया है। मजीठिया के खिलाफ पंजाब की पूर्व सरकार के समय में एनडीपीएस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद मजीठिया को गिरफ्तार कर लिया गया था। मजीठिया ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को चुनाव लड़ने के लिए जमानत दे दी थी।
चुनाव संपन्न होने के बाद मजीठिया ने 24 फरवरी को सरेंडर कर दिया था। इसके बाद मजीठिया ने फिर से नियमित जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। अब मजीठिया ने जमानत के लिए नया आधार बनाते हुए फिर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नियमित जमानत की मांग की है। हाईकोर्ट ने अब सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मंगलवार को याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।
बाजाखाना गोलीकांड मामला: आरोपी पुलिस अधिकारियों की याचिका पर फैसला सुरक्षित
बाजाखाना गोली कांड मामले की अब तक की जांच की पंजाब सरकार द्वारा सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट और याची व पंजाब सरकार की दलीलों को सुनने के बाद मंगलवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी पुलिस अधिकारियों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुमेध सिंह सैनी ने अपने खिलाफ दाखिल चार्जशीट और बाजाखाना मामले में निलंबित आईजी परमराज उमरानंगल ने खुद पर दर्ज एफआईआर में आगे कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर याचिकाएं दाखिल की थीं। इनके अलावा इस मामले के आरोपी अन्य पुलिस अधिकारियों ने भी याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले की अब तक की गई जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी।
पंजाब सरकार की तरफ से एसआईटी के मुखिया आईजी नौनिहाल सिंह ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया था कि इस मामले की जांच पहले तत्कालीन आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह की एसआईटी कर रही थी। हाईकोर्ट ने गत वर्ष अप्रैल में इस एसआईटी को भंग कर नए सिरे से एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। साथ ही यह आदेश भी दिया था कि नई एसआईटी अपनी जांच किसी से साझा नहीं करेगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बहिबल कलां/बाजाखाना मामले की जांच के लिए उनकी अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई है। बीते सप्ताह से लगातार हाईकोर्ट इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। अब सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित कर लिया है।