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कोठी का विवाद गहराया, एडवाइजर को लिखित शिकायत, जानिए मामला
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 29 Jul 2016 10:05 AM IST
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चंडीगढ़ हाउसिंह बोर्ड की सरकारी कोठी को लेकर विवाद
- फोटो : फाइल फोटो
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सीएचबी के कोटे की सरकारी कोठी का विवाद गहरा गया है। पूर्व सीईओ ने अब सीएचबी चेयरमैन के खिलाफ एडवाइजर से पत्र लिखकर शिकायत की है। कोठी का चार्ज छोड़ने के बावजूद पूर्व सीईओ दीपक कुमार को यूटी पूल में ट्रांसफर करने के एक दिन बाद ही चेयरमैन मनिंदर सिंह ने आपत्ति दर्ज करा दी है।
सीएचबी चेयरमैन मनिंदर सिंह बैंस ने सलाहकार परिमल राय को पत्र लिखकर कहा है कि यह कोठी यूटी पूल में तब तक ट्रांसफर न की जाए, जब तक पूर्व सीईओ द्वारा 24 लाख रुपये की राशि वापस नहीं कर दी जाती। यह 24 लाख रुपये की राशि बोर्ड के सरकारी फंड से खर्च की गई है। सलाहकार को लिखे पत्र में चेयरमैन ने कहा है कि दीपक कुमार ने सीईओ पद पर रहते हुए सेक्टर-16 में अलॉट सरकारी कोठी की रेनोवेशन, फिटिंग, फर्नीचर और अन्य आइटम पर 24 लाख रुपये का खर्चा किया।
चार्ज छोड़ने के बाद दीपक कुमार ने 12 लाख रुपये मूल्य के आइटम और फर्नीचर वापस कर दिए। उनको जल्द ही बोर्ड की ओर से नीलाम किया जाएगा। अभी 12 लाख रुपये कीमत के सामान दीपक कुमार से वापस लेने हैं। ऐसे में बोर्ड से मकान लेकर यूटी पूल में ट्रांसफर तब तक रोक देनी चाहिए जब तक उनसे पूरा 24 लाख रुपये वापस न मिल जाएं, ताकि बोर्ड को वित्तीय नुकसान न हो।
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मालूम हो कि बिना मंजूरी के सरकारी फंड से खर्चा करने और चेयरमैन और आईएएस दीपक कुमार के बीच विवाद बढ़ने के बाद 14 जुलाई को प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी ने दीपक कुमार से बोर्ड के सीईओ का चार्ज वापस ले लिया था।
बोर्ड की बैठक अब 5 अगस्त को
सीएचबी की बैठक फिर टाल दी गई है। अब यह 5 अगस्त को होगी। पहले वीरवार को बैठक होनी थी। बैठक में बिना मंजूरी के पूर्व सीईओ द्वारा फर्नीचर और मकान की रेनोवेशन करने पर रिकवरी चार्ज वसूलने का फैसला लिया जा सकता है। दीपक कुमार के पास प्रशासन के हाउस अलाटमेंट कमेटी के सचिव और आईटी के विशेष सचिव का चार्ज है।
उन्हें मंगलवार को बोर्ड के पूल से अलॉट मकान को यूटी पूल में ट्रांसफर करके दिया गया है। बोर्ड के मनोनीत सदस्य प्रेम कौशिक का कहना है कि पूर्व सीईओ की ओर से सामान वापस नहीं लेना चाहिए बल्कि पूरी 24 लाख की रिकवरी लेनी चाहिए। उनका कहना है कि 5 अगस्त को होने वाली बोर्ड की बैठक में यह मामला उठाया जाएगा।
सरकारी फंड को ऐसे खर्च किया
सचिव की ओर की ओर से की गई जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि 5 लाख रुपये फर्नीचर खरीदने के लिए खर्च किए गए थे। अकेले पर्दों पर डेढ़ लाख का खर्च आया था। जबकि 64 हजार रुपये की राशि बाथरूम फिटिंग पर खर्च की गई। टॉयलेट्स में ग्लास के काम पर 85 हजार 530 रुपये खर्च आया।
बोर्ड की ओर से टाटा स्काई कनेक्शन के लिए 6900 रुपये, बिजली की प्रेस पर 1800 और 2500 रुपये एयरटेल के 4 जी कनेक्शन के लिए दिए गए हैं। एलईडी की खरीद पर एक लाख 44 हजार 900 रुपये खर्च हुए हैं। दोलाख 32 हजार 990 रुपये से 5 एसी खरीदे गए हैं। साथ ही फैंसी लाइट्स पर 44 हजार 793 रुपये खर्च किए गए हैं।
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सीएचबी चेयरमैन मनिंदर सिंह बैंस ने सलाहकार परिमल राय को पत्र लिखकर कहा है कि यह कोठी यूटी पूल में तब तक ट्रांसफर न की जाए, जब तक पूर्व सीईओ द्वारा 24 लाख रुपये की राशि वापस नहीं कर दी जाती। यह 24 लाख रुपये की राशि बोर्ड के सरकारी फंड से खर्च की गई है। सलाहकार को लिखे पत्र में चेयरमैन ने कहा है कि दीपक कुमार ने सीईओ पद पर रहते हुए सेक्टर-16 में अलॉट सरकारी कोठी की रेनोवेशन, फिटिंग, फर्नीचर और अन्य आइटम पर 24 लाख रुपये का खर्चा किया।
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चार्ज छोड़ने के बाद दीपक कुमार ने 12 लाख रुपये मूल्य के आइटम और फर्नीचर वापस कर दिए। उनको जल्द ही बोर्ड की ओर से नीलाम किया जाएगा। अभी 12 लाख रुपये कीमत के सामान दीपक कुमार से वापस लेने हैं। ऐसे में बोर्ड से मकान लेकर यूटी पूल में ट्रांसफर तब तक रोक देनी चाहिए जब तक उनसे पूरा 24 लाख रुपये वापस न मिल जाएं, ताकि बोर्ड को वित्तीय नुकसान न हो।
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मालूम हो कि बिना मंजूरी के सरकारी फंड से खर्चा करने और चेयरमैन और आईएएस दीपक कुमार के बीच विवाद बढ़ने के बाद 14 जुलाई को प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी ने दीपक कुमार से बोर्ड के सीईओ का चार्ज वापस ले लिया था।
बोर्ड की बैठक अब 5 अगस्त को
सीएचबी की बैठक फिर टाल दी गई है। अब यह 5 अगस्त को होगी। पहले वीरवार को बैठक होनी थी। बैठक में बिना मंजूरी के पूर्व सीईओ द्वारा फर्नीचर और मकान की रेनोवेशन करने पर रिकवरी चार्ज वसूलने का फैसला लिया जा सकता है। दीपक कुमार के पास प्रशासन के हाउस अलाटमेंट कमेटी के सचिव और आईटी के विशेष सचिव का चार्ज है।
उन्हें मंगलवार को बोर्ड के पूल से अलॉट मकान को यूटी पूल में ट्रांसफर करके दिया गया है। बोर्ड के मनोनीत सदस्य प्रेम कौशिक का कहना है कि पूर्व सीईओ की ओर से सामान वापस नहीं लेना चाहिए बल्कि पूरी 24 लाख की रिकवरी लेनी चाहिए। उनका कहना है कि 5 अगस्त को होने वाली बोर्ड की बैठक में यह मामला उठाया जाएगा।
सरकारी फंड को ऐसे खर्च किया
सचिव की ओर की ओर से की गई जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि 5 लाख रुपये फर्नीचर खरीदने के लिए खर्च किए गए थे। अकेले पर्दों पर डेढ़ लाख का खर्च आया था। जबकि 64 हजार रुपये की राशि बाथरूम फिटिंग पर खर्च की गई। टॉयलेट्स में ग्लास के काम पर 85 हजार 530 रुपये खर्च आया।
बोर्ड की ओर से टाटा स्काई कनेक्शन के लिए 6900 रुपये, बिजली की प्रेस पर 1800 और 2500 रुपये एयरटेल के 4 जी कनेक्शन के लिए दिए गए हैं। एलईडी की खरीद पर एक लाख 44 हजार 900 रुपये खर्च हुए हैं। दोलाख 32 हजार 990 रुपये से 5 एसी खरीदे गए हैं। साथ ही फैंसी लाइट्स पर 44 हजार 793 रुपये खर्च किए गए हैं।