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जारी है बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़, स्कूल वाहनों में नहीं हो रहा नियमों का पालन, खुली पोल

Tue, 18 Feb 2020 01:32 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंजाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंजाब Published by: ajay kumar Updated Tue, 18 Feb 2020 01:32 AM IST
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Know the reality of school vehicles in Punjab after Sangrur accident
जालंधर से कुछ ऐसी तस्वीर आई सामने।

संगरूर के लौंगोवाल में स्कूल वैन में आग लगने की घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देश पर सोमवार सुबह से ही राज्य के ट्रांसपोर्ट विभाग ने स्कूली वाहनों की जांच-पड़ताल की मुहिम छेड़ दी। राज्य में दिन भर चली इस मुहिम में 4504 स्कूली वाहनों की जांच की गई। मोटर वाहन कानून के जरूरी मापदंड का पालन न करने पर 1649 वाहनों का चालान किया गया जबकि 253 वाहन जब्त कर लिए गए।

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सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए भविष्य में भी ऐसी मुहिम जारी रखी जाएगी। इस बीच, मुख्यमंत्री ने राज्य के आम लोगों से भी अपील की है कि वे खुद भी स्कूली बसों पर नजर रखें। जहां भी नियमों का उल्लंघन नजर आए, फौरन इलाके के डीसी, पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को जानकारी दें। मुख्यमंत्री की तरफ से पुलिस को भी हिदायत दी गई है कि नियमों के प्रति लापरवाही के हर मामले को गंभीरता से लें और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करें। 
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उल्लेखनीय है कि शनिवार को लौंगोवाल के नजदीक एक स्कूल वैन में आग लगने से चार बच्चे जिंदा जल गए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने ट्रांसपोर्ट विभाग को स्कूली वाहनों की चेकिंग के आदेश दिए थे।

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पटियालाः सीएम सिटी में नौनिहालों की जान खतरे में

संगरूर के लौगोंवाल में हुए हादसे के बाद भी सीएम सिटी में प्रशासन जागा नहीं है। सोमवार सुबह जब अमर उजाला ने शहर के प्रमुख चौक-चौराहों में जाकर बच्चों को ले जाने वाली स्कूल वाहनों का मुआयना किया तो पाया कि ज्यादातर स्कूली थ्री व्हीलरों में बच्चों को ठूस-ठूस कर भरा गया है। यहां तक कि कुछ एक थ्री व्हीलरों में तो बच्चों की टांगें भी बाहर लटक रही थीं। वहीं स्कूली बसों में तय मानकों के मुताबिक सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि वो प्राइवेट स्कूल जो फीस के नाम पर मोटी रकम अभिभावकों से वसूलते हैं, वहां बच्चों को पुरानी वैनों में ले जाया जा रहा था।

सुबह करीब साढ़े सात बजे जब अमर उजाला आर्य समाज चौक के पास पहुंचा तो क्षमता से ज्यादा भरे स्कूली बच्चों के थ्री व्हीलर गुजर रहे थे। एक थ्री व्हीलर में तो जगह बचाने को बच्चे को टांगे लटका कर पीछे की तरफ बिठा रखा था, जिससे कभी भी कोई हादसा हो सकता था। एक स्कूल के थ्री व्हीलर में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठा रखा था। 

स्कूली बसों को देखा तो कई में आग बुझाने के यंत्र व फर्स्टएड बाक्स नहीं था तो कुछ में फायर फाइटिंग सिस्टम ही नहीं था। बसों में चालक के साथ टीचर भी नहीं था। इस संबंध में जब डीसी कुमार अमित से बात की तो उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों की जान साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। जो भी स्कूल तय गाइड लाइन के मुताबिक अपने वाहनों को नहीं रखेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। 

पटियाला में 108 के चालान कटे, 25 जब्त  
पटियाला के सभी सब डिवीजनों में स्कूलों वाहनों की चेकिंग की गई। सेक्रेटरी रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी अरविंद कुमार ने बताया कि जिले में 251 स्कूल वाहनों निरीक्षण किया गया, जिसमें से 108  के चालान किए गए और 25 गाड़ियां जब्त की गईं।

लुधियानाः बिना फिटनेस और परमिट के बेखौफ दौड़ती रही स्कूल वैन

Know the reality of school vehicles in Punjab after Sangrur accident
ऑटो में ले जा रहे बच्चे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

लौंगोवाल हादसे के बाद जिला प्रशासन की नींद खुल गई है। रविवार देर रात स्कूल वैन जांच घोषणा के बाद प्रशासन ने 125 टीमों को मैदान में उतार दिया। इस दौरान सोमवार को कुल 918 स्कूली वाहन जांचे गए। इनमें 308 के चालान काटे गए और 36 वाहनों को इंपाउंड किया गया है। रोचक बात रही कि इस कार्रवाई की भनक स्कूल वैन चालकों को पहले से लग चुकी थी, इसलिए ज्यादातर बिना परमिट वाली वैन सड़कों पर उतारी ही नहीं। लुधियाना में निजी और सरकारी स्तर के लगभग 1350 स्कूल चल रहे है। इन स्कूल में बच्चों को लाने के लिए लगभग 35 सौ स्कूली वाहनों को चलाया जा रहा है।

सोमवार को शहर में जितनी भी स्कूल वैन सड़कों पर उतरी कोई भी उप टू डेट नहीं दिखी। हर स्कूल वैन में कुछ न कुछ खामी जरूर मिली। किसी में फिटनेस का परमिट नहीं था तो किसी में सीसीटीवी कैमरा, अटेंडेंट, फस्ट एड किट और अग्निशमक यंत्र भी वाहनों से गायब दिखे। वहीं जिन बसों में अग्निशमक यंत्र लगे थे वो भी खराब हो चुके थे। 

जालंधर में स्कूल बसों का ऐसा हाल
जालंधर में जब स्कूल बसों की जांच की गई तो पाया गया कि काफी हद तक स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर तो लगे थे लेकिन खराब थे। बसों में फर्स्ट एड बाक्स तो था लेकिन उनमें दवाएं और सामान नहीं था। कई स्कूल बसें तो ऐसी थीं, जिनमें जरूरत से ज्यादा बच्चे बैठे पाए गए। इसके अलावा कुछ स्कूल वालों ने स्कूल बसों के पीछे अपनी स्कूल दाखिले के बोर्ड लगा रखे थे, जिस कारण स्कूल बस के पीछे लिखे गए स्कूल, पुलिस, बस ड्राइवर व अन्य नंबर गायब थे। जो सरेआम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। 

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि लौंगोवाल हादसे के बाद भी स्कूल बच्चों को ले जाने वाले ऑटो खचाखच बच्चों से भरे चलते रहे। इनमें 15 तक बच्चे बैठे पाए गए। यहां तक की ऑटो चालक की आगे की सीट पर भी 2 बच्चे बैठे मिले। जो किसी भी समय हादसे का शिकार हो सकते थे। ये ऑटो सरेआम पुलिस के लगाए नाकों से गुजर रहे थे लेकिन पुलिस ने इन्हें रोककर इन पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। 

पुरानी वैनों को पीला रंग करके दौड़ा रहे स्कूल

फिरोजपुर। लौंगोवाल हादसे के बाद सोमवार को कंडम स्कूल बसे विद्यार्थियों को स्कूल ले जाती नजर नहीं आईं। वैन चालकों को पता चल गया था कि आरटीओ विभाग की ओर से सुबह चेकिंग की जानी है। इस कारण कंडम वैन वाले विद्यार्थियों को ऑटो पर स्कूल छोड़ने पहुंचे।

सोमवार सुबह सवा आठ बजे से लेकर सवा नौ बजे तक शहर के विभिन्न स्कूलों व चौकों का निरीक्षण किया गया।  स्वामी विवेकानंद चौक (आर्य अनाथालय चौक) पर सुबह साढ़े आठ बजे तक देखने को मिला जो कंडम वैनें व आटो बच्चों को लेकर रोजाना पहुंचते थे वो सोमवार सुबह नहीं दिखे। बहुत से वैनों के मालिक विद्यार्थियों को आटो पर स्कूल छोड़कर गए और कई वैन चालकों ने अभिभावकों को टेलीफोन कर बच्चों को खुद छोड़ने की गुहार लगाई।

कई आटो चालकों ने स्कूली बच्चों को अपनी सीट पर ही बैठाया हुआ था और बच्चे आटो में ठूसे हुए थे। बस्ती टैंकावाली चौक के पास कई ऐसे आटो देखने को मिले जिन्होंने विद्यार्थियों को पिछली सीट पर बैठाकर पर्दा किया हुआ था ताकि आटो में बच्चों की संख्या न पता चल सके।

अभिभावक बच्चों के प्रति नहीं है चिंतित
स्कूल वैनों के कई चालकों का कहना है कि अभिभावक प्रति माह 500 से 600 रुपये ही प्रति बच्चा देते हैं। जब उनसे अधिक पैसों की मांग करते हैं तो वैन हटा लेते हैं। इतने कम पैसों में न तो वैन में कंडक्टर रख सकते हैं और न ही सीसीटीवी कैमरा लगा सकते हैं। नई वैन के लिए कई चालकों के पास पैसे तक नहीं है। चंडीगढ़, लुधियाना व अन्य शहरों से पुरानी मारुति वैन व अन्य वाहन खरीद कर उसे रंग-रोगन कर चलाते हैं। फिरोजपुर में बहुत कम चालकों के पास कंडम वैनें होंगी। ज्यादातर ने सूमो रखी हुई है।

आरटीओ ने 42 स्कूल वैनों के काटे चालान, 18 को किया बंद
आरटीओ तरलोचन सहोता का कहना है कि स्कूल वैनों की चेकिंग के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं। सोमवार सुबह जिले के विभिन्न स्कूलों की 120 स्कूल वैनों की चेकिंग की गई। इसमें 42 वैनों के चालान काटे गए और 18 वैनों को बंद किया गया है। उक्त टीमें रूटीन में चेकिंग करेगी। जिन वैनों की हालत बहुत ही खस्ता है उनके चालक के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
 

स्कूल संचालकों और ड्राइवरों में छाया रहा कार्रवाई का खौफ

पठानकोट में  संगरूर स्कूल वैन हादसे के बाद सीएम अमरिंदर सिंह के सख्त आदेशों के चलते पठानकोट के प्राइवेट स्कूल संचालकों और ऑटो/वैन चालकों में पहली बार पुलिस और प्रशासन का खौफ दिखा। वहीं पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कार्रवाई में गंभीरता दिखाई। सुबह तड़के से सड़कों पर खड़े पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का खौफ इस कदर दिखा कि कई ऑटो चालक सुबह बच्चों को स्कूल लेकर गए पर बाद में अभिभावकों को फोन कर बता दिया कि दोपहर को वह नहीं आ पाएंगे।

इसके अलावा स्कूल संचालकों के होश भी पूरा दिन फाख्ता रहे। जिला पुलिस और बाल सुरक्षा विभाग कीटीमों ने शहर में 20 से अधिक स्थानों पर नाके लगाकर 198 स्कूली वाहनों को चेक किया और जिले में स्कूली वाहनों के 36 चालान काटे, जबकि दो वाहनों को इंपाउंड किया गया। अधिकारियों के अनुसार स्कूलों का परिवहन सिस्टम बीमार है, जिले में चेकिंग कर पता चला कि गिनती के न ही सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी का पालन करते हैं। जबकि अधिकतर में नियमों की धज्जियां ही उड़ाई जा रही हैं।

चेकिंग के दौरान स्कूली बच्चों को ला रहे वाहनों के दस्तावेज जांचे गए और वाहनों में बैठे बच्चों की गिनती की गई। इस दौरान एक ऑटो जिसमें 7 बच्चे बैठे थे और उसके पास लाइसेंस, ओवरलोड, आरसी, इंश्योरेंस सहित कोई कागजात नहीं थे। जिसके चलते उसे इंपाउंड किया गया। डीसीपीओ ऊषा ने बताया कि अधिकतर वाहन सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी के नॉर्म्स पूरे नहीं करते, विभाग की ओर से हर सोमवार और बुधवार को चेकिंग ड्राइव चलाई जाती है। हालांकि कई स्कूल संचालकों ने वाहनों में काफी सुधार किया है। ड्राइव जारी रहेगी।

मुक्तसर: नियम ताक पर, कई वैनों पर स्कूल के नाम ही नहीं

ज्यादातर स्कूल वाहनों में न सीसीटीवी कैमरे, न अग्निशमन यंत्र, जहां थे वो हो चुके थे एक्सपायर, न वाहन चालकों ने पहनी हुई थी वर्दियां। अनेकों स्कूल वैनों पर तो डीटीओ दफ्तर का नंबर, कंप्लेट नंबर या स्कूल प्रबंधकों का नंबर होना तो दूर, स्कूल का नाम भी लिखा नहीं था। अनेकों स्कूलों के चालक तो खटारा आटो में ही बच्चों को घरों से ले जाते नजर आ रहे थे। अनेकों स्कूल वैन पुरानी मॉडल की थीं।

अमर उजाला ने सोमवार की सुबह स्कूल वैनों का जायजा लिया। वैनों में ऐसी अनेकों खामियां नजर आईं। स्कूल प्रबंधकों ने नियम ताक पर रख छोड़े हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। टिब्बी साहिब रोड पर कई स्कूलों के खटारा नजर आ रहे आटो पर ही बच्चों कोले जाया जा रहा था। आटो पर स्कूल का नाम नहीं लिखा था। एक आटो का पिछला डाला (ताकी) खुला ही था। जब बिना वर्दी आटो चला रहे चालक की फोटो खींची जाने लगी तब कही जाकर उसने डाला बंद करना मुनासिब समझा।

मुक्तसर में सोमवार को स्कूल वैनों की प्रशासनिक जांच दौरान भी कहीं वैनों में फर्स्टएड किट नहीं थी। कई वैनों में तो इमरजेंसी डोर ही नहीं लगे थे। ज्यादातार गाड़ियां 2003 व 2004 मॉडल की ही चली जा रही थीं। डीटीओ दफ्तर की ओर से आखिर ऐसे पुराने वाहनों को मंजूरी कैसे दे दी गई है। किसी भी स्कूल वाहन चालक के साथ महिला कर्मी तो नहीं नजर आईं। जबकि जिस वैन में छात्राएं जा रही हों, उसमें नियमानुसार एक महिला अटेंडेंट का होना लाजमी है। अनेकों वैनों में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे थे।

 73 वाहनों के कटे चालान, छह जब्त: डीसी
डिप्टी कमिश्नर एमके अराविंद कुमार के अनुसार जिले में कुल 73 वाहनों के चालान काटे गए हैं। पांच वाहन जब्त कर लिए गए हैं। एसडीएम मुक्तसर वीरपाल कौर के अनुसार दो स्कूलों में करीब 65 वाहनों की जांच की गई। इनमें से सुरक्षा मानदंडों पर खरा न उतर पाने पर 41 वाहनों के चालान काटे गए। मलोट एसडीएम गोपाल सिंह के अनुसार 11 वाहनों के चालान काटे गए। दो वाहन जब्त किए गए। गिद्दड़बाहा में भी 21 चालान करने के साथ तीन वाहन जब्त किए गए हैं।

कीरतपुर साहिब : 24 वाहनों के काटे गए चालान, तीन इंपाउंड

लौंगोवाल हादसे के बाद प्रशासन ने सड़कों पर दौड़ रहे 24 वाहनों के चालान काटे। दस्तावेज ना दिखा पाने की सूरत में तीन वाहनों को इंपाउंड कर कब्जे में ले लिया गया है। सोमवार सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर एसडीएम श्री आनंदपुर साहिब के नेतृत्व में एसएचओ आनंदपुर साहिब व ट्रैफिक इंचार्ज ने स्कूल सेफ्टी वाहन के नियमों की अवहेलना करने वाले नामवर स्कूलों की बसों के चालान काटे। तीन बसों को कब्जे में ले लिया गया है।

एसडीएम कन्नू गर्ग ने बताया कि मुख्यमंत्री पंजाब और डीसी के निर्देशानुसार स्कूल सेफ्टी वाहन नियमों की अवहेलना करने वाले प्राइवेट स्कूलों की लगभग 24 बसों के चालान काटे गए हैं। तीन बसों को इंपाउंड किया गया है। तहसीलदार राम किशन के नेतृत्व में करीब दस वाहनों के चालान काटकर एक वाहन बाउंड कर दिया गया है।

वहीं एसएचओ भारत भूषण द्वारा माउंट कार्मल जिंदवड़ी, रयात कालेज जैसे नामवर सकूल व कालेज के वाहनों के दस्तावेज ना दिखाने पर दो वाहनों को इंपाउंड किया गया। दशमेश अकादमी श्री तेग बहादुर खालसा कालेज श्री आनंदपुर साहिब, रयात बाहरा, दा रेनीसेंस स्कूल भनुपली, माउंट कारमल, सेंट मैरी भनुपली, डीएवी स्कूल गंगुवाल, भाई नंदलाल पब्लिक स्कूल व रयात बाहरा, खालसा कालेज जैसे स्कूल-कॉलेजों के वाहनों के चालान काटे।

स्कूल बसों की चेकिंग के दौरान सोमवार को प्राइवेट स्कूलों के मालिकों व बस, वैन चालकों में हड़कंप मच गया। चेकिंग का पता चलते ही आनन-फानन में वाहनों को स्कूल से भगा लिया गया। प्रशासन की नजरों से दूर खाली प्लाट व सुनसान स्थानों पर वाहन लगा दिए गए।

इन स्कूल बसों में मिलीं खामियां

- पीबी-08एवाई -9773, समय सुबह 8:38 पर वर्कशाप चौक के पास स्कूली बस का स्पीड गवर्नर खराब मिला।
- पीबी-08 डीएस-3707, समय 7:39 सुबह, गाजीगुल्ला फाटक के पास बस छात्रों से खचाखच भरी नजर आई।
- केएमवी संस्कृत स्कूल की बस सुबह के वक्त टांडा फाटक के समीप विज्ञापन से ढकी मिली। न तो चालक का नंबर दिख रहा था और न ही अधिकारियों का।

जो आम दिक्कतें दिखाई दीं
- अधिकतर बसों में खराब मिले स्पीड गवर्नर।
- बसों में बने फर्स्ट एड बाक्स में नहीं मिलीं दवाएं।
- बस के पीछे लिखे गए स्कूल, ड्राइवर व पुलिस के नंबर दिखे नदारद।
- कई स्कूल बसों में स्कूल टीचर नहीं मिले।
- बसों में नहीं मिले अग्निशामक यंत्र, जो मिले वो एक्सपायरी डेट के थे।
- बसों से नदारद दिखे शिकायत बाक्स, कई बसें बेहद खस्ता हालत में पाई गईं।
- खस्ताहाल स्कूल बसों में पेंट कर चलाया जा रहा काम।

दौड़ रहे 20 साल से अधिक पुराने स्कूल वाहन

मोगा। शिक्षा विभाग के रिकार्ड के अनुसार जिले भर में कुल 500 के करीब स्कूल हैं, जिनमें 250 सरकारी स्कूल व 250 के करीब मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं। हरेक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को घर से लाने व छोड़ने के लिए पांच से आठ बसें व अन्य वाहन चलाए जा रहें है। इस हिसाब से जिले भर में 700 से अधिक स्कूल बसें सड़कों पर दौड़ रहीं है। अधिकतर स्कूलों के पास 20 साल से अधिक पुरानी बसें हैं।

स्कूल वाहनों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट समेत पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त गाइड लाइन भी जारी कर रखी हैं, लेकिन बावजूद इसेफ स्कूल वाहन योजना के तहत जिला प्रशासन द्वारा खानापूर्ति के नाम पर काम किया जाता है। जिले भर में सात सौ से अधिक स्कूल बसें चल रही है और इनके चालकों में से 80 फीसदी के करीब चालकों के पास एचएमवी (हैवी मोटर व्हीकल) का ड्राइविंग लाइसेंस तक नही है। जिला प्रशासन के परिवहन विभाग से लिए गए रिकार्ड के अनुसार स्कूल बस चलाने के लिए अभी तक उनसे किसी भी चालक ने हैवी लाइसेंस नही लिया है।

हैवी लाइसेंस लेने के लिए आवेदनकर्ता को कम से कम पांच साल तक का अनुभव होना अनिवार्य है। अभिभावक खुद स्कूल बसों के लिए बनाए गए नियम कानून से जागरूक नहीं है। यही कारण है किसी आज तक किसी अभिभावक ने अपने बच्चों को स्कूल बस में बैठाने से पहले यह जानने का प्रयास नही किया कि चालक के पास सही लाइसेंस है भी या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के क्या हैं आदेश

1) स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए व उसमें नीली पट्टी लगी होना जरूरी है।
2) शिक्षण संस्थानों की बसों पर शिक्षा संस्थान का नाम व स्कूल बस लिखा जाना जरूरी है और अगर किराए की बस है तो उस पर भी स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए।
3) बस चालक का नाम बस के पीछे मोटे अक्षरों में लिखा होना चाहिए। इसके साथ ही बस चालक वर्दी में होना चाहिए।
4) 12 साल से पुरानी बस सड़क पर नही चलाई जा सकती।
5) बस में विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह के अलावा बैग रखने के लिए भी योग्य स्थान होना चाहिए।
6) बस में फर्स्टएड बाक्स के साथ आग बुझाने वाला यंत्र भी लगा होना चाहिए।
7) हरेक स्कूल बस में एक सहायक होना अनिवार्य है जोकि बच्चों को बस से उतारने व सड़क पार करवाने का जिम्मेदार हो।
8) स्कूल बस की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नही होनी चाहिए।
9) बस में गति को चैक करने के लिए स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए।
10) एसी बस चालक के पास कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए।
11) पिछले दो साल में बस चालक का दो बार से अधिक चालान न किया गया हो।
12) बस चालक किसी गंभीर अपराध का अभियुक्त न हो।
13) ड्यूटी के समय स्कूल बस किसी भी फोर व्हीलर को क्रास न करे।
14) बस के आगे व पीछे स्कूल का नाम व फोन नंबर स्पष्ट शब्दों में लिखा हो।
15) बस की खिड़कियों पर ग्रिल लगी होनी चाहिए व बस के दरवाजे सही ढंग से लॉक होने वाले हों।
16) बस में टेप रिकार्ड आदि नही होने चाहिए।
17) सुप्रीम कोर्ट ने एसी बस में सफर करने वाले बच्चों के लिए भी नियम बनाएं हैं, इन नियमों को लागू करने के लिए बस चालक व उसके सहायक को जिम्मेदार बनाया गया है। उलंघन करने पर कार्रवाई का प्रावधान भी है।
18) स्कूल वाहन पंजीकरण के साथ साथ ड्राइवर का पंजीकरण होना भी जरूरी है।
19) ड्राइवर के पास पांच वर्ष पुराना एचएमवी लाइसेंस होना जरूरी है।
20) स्कूल बस में दो इमरजेंसी गेट की व्यवस्था होना भी अनिवार्य है।

बसों में न फर्स्ट एड किट, न अटेंडेंट, कई के फायर सेफ्टी सिलिंडर तक खराब

मोहाली। जिला संगरूर में स्कूल वैन में आग लगने से हुई चार बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद सोमवार को जिला प्रशासन की भी नींद खुल गई। सुबह और शाम को स्पेशल नाके लगाकर स्कूल बसों और ऑटो की चेकिंग की गई। इस दौरान बसों में कई तरह की खामियां सामने आईं। बसों में फर्स्ट एड किट से लेकर अटेंडेंट तक गायब मिले। इतना ही नहीं कई बसों में लगे फायर सेफ्टी सिलिंडर तक खराब मिले।

इस दौरान 68 वाहनों की जांच की गई। वहीं, 50 वाहनों के चालान काटे गए जबकि 18 वाहनों को जब्त किया गया। डीसी गिरीश दयालन ने कहा कि किसी को भी ट्रैफिक नियम तोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि स्कूल बस ऑपरेटरों ने प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। उन्होंने फेज-आठ के दशहरा ग्राउंड में प्रशासन के खिलाफ मंगलवार को एकजुट होने का फैसला लिया है। इसके बाद संघर्ष की रणनीति तय होगी।

सोमवार को डीसी गिरीश दयालन के आदेश पर सोमवार सुबह छह बजे से ही जिले के अधिकारी व एसडीएम सड़कों पर उतर गए थे। इस दौरान विभिन्न जगहों पर नाके लगाकर स्कूल बसों की पड़ताल की गई। आरटीए सुखविंदर कुमार ने बताया कि मोहाली में 25 वाहनों की जांच की गई। इनमें से 11 वाहनों को कब्जे में ले लिया गया। वहीं 14 वाहनों के चालान किए गए।

एसडीएम खरड़ हिमांशु जैन ने चार और एटीओ सिमरन सरां ने 14 वाहनों के चालान किए। इसके साथ ही उन्होंने चार वाहनों को कब्जे में लिया। एसडीएम मोहाली जगदीप सहगल ने 11 वाहनों के चालान काटे व एक वाहन को कब्जे में लिया। एसडीएम डेराबस्सी कुलदीप बावा ने सात वाहनों के चालान काटे व दो वाहनों को कब्जे में लिया।

ट्रैफिक पुलिस ने भी काटे चालान
सेफ स्कूल वाहन स्कीम कमेटी ने जिले में पड़ते स्कूलों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले वाहनों की जांच की। कमेटी ने प्रबंधकों से कहा कि स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहन बढ़िया स्थिति में होने चाहिएं और हर बस में सहायक जरूर होना चाहिए। वाहनों में लगे सुरक्षा उत्पाद ठीक हालात में होने चाहिएं।

बसों में यह खामियां मिलीं
मोहाली शहर की अधिकतर स्कूल बसों के बाहर रिफ्लेक्टर तक नहीं लगे थे। वहीं, बसों के ड्राइवर उचित यूनिफॉर्म में नहीं थे। इसके अलावा कई बसों में अटेंडेंट तक नहीं है। वहीं बसों में बच्चों के लिए सीट बेल्ट तक नहीं है। यही नहीं कई बसों में तो कैमरे तक काम नहीं कर रहे थे।  प्रशासन का कहना था कि बसों में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जएगा।

स्कूल बसों में कैमरों की जांच के लिए कमेटी गठित
स्कूल बसों में कैमरे काम कर रहे हैं या नहीं। इस काम की जांच के लिए एक स्पेशल कमेटी जिला प्रशासन द्वारा कुछ समय समय पहले ही तय की गई थी। यह कमेटी दस दिन में अपनी रिपोर्ट पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को देगी।

2013 में लागू हुई थी सेफ स्कूल वाहन योजना

पंजाब सरकार की ओर से 2013 में स्कूली बसों के लिए सेफ स्कूल वाहन स्कीम तो लागू की गई, लेकिन इस पर गंभीरता से आज तक अमल नहीं हो सका। नतीजतन बच्चों के लिए स्कूली बसों में यात्रा हमेशा जोखिम भरी बनी रही और बच्चे हादसों का शिकार होते रहे। स्कीम के तहत जिला स्तर पर गठित कमेटियों की बैठकों का कोई रिकार्ड ट्रांसपोर्ट विभाग के पास नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि जिलों में स्कूली बसों के परिचालन में कितनी गंभीरता से नजर रखी गई थी।

स्कूली बसों में बच्चों की यात्रा सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों पर, 7 नवंबर 2013 को पंजाब सरकार ने सेफ स्कूल वाहन स्कीम लागू की थी। ट्रांसपोर्ट विभाग के मार्फत लागू गई स्कीम के तहत जहां स्कूली बसों के लिए निर्धारित मापदंड अनिवार्य किए गए, वहीं स्कूली बसों के सुरक्षित परिचालन के सुनिश्चित करने के लिए स्कूल प्रबंधकों, जिला प्रशासन, यातायात पुलिस के लिए जिम्मेदारियां तय की गई थीं।

सात साल बीत जाने के बाद भी न जिलास्तरीय कमेटियां गठित हुईं, न स्कूल प्रबंधकों ने ही स्कूली बसों में गंभीरता से सुधार किए। स्कीम में मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत स्कूली बसों के लिए मापदंड तय किए गए थे ताकि बच्चों की यात्रा सुरक्षित हो सके। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित आटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड कमेटी (एआईएस) द्वारा स्कूली बसों के लिए तैयार ड्राफ्ट को आधार बनाते हुए पंजाब मोटर व्हीकल रूल्स 1989 के नियम 39 के अधीन स्कूल बसों की बॉडी डिजाइन की गई थी।

बसों के लिए स्टाप सिग्नल अलार्म, स्पीड गवर्नर जरूरी
स्कूली बसों में स्टाप सिग्नल अलार्म लगाया अनिवार्य है, जो सड़क पर अन्य वाहन चालकों को यह संकेत देता कि स्कूली बस बच्चों को चढ़ाने या उतारने के लिए रुकने वाली है। स्पीड गवर्नर से स्कूली बसों की गति सीमा भी निर्धारित की गई थी। बसों में रिट्रेक्टिंग स्टैप भी होना चाहिए, जिसका उपयोग बच्चों को बस में चढ़ाने के समय किया जाएगा और जब सभी बच्चे बस में बैठ जाएंगे, तब यह स्टैप सड़क से उठाया जाता है।

सभी स्कूल बसों का बाहरी रंग गोल्डन पीला तय किया गया है, जिसके साथ बसों की खिड़की सी नीचे 150एमएम की एक काले रंग की पट्टी भी लगाई जानी है। बस ड्राइवर और कंडक्टर का वर्दी में होना लाजिमी किया गया है। स्कूली छात्राओं के लिए बस में महिला केयरटेकर की नियुक्ति भी अनिवार्य है। स्कूली बसों में फर्स्ट एड बाक्स और अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा बस के बाहर संबंधित स्कूल का नाम और फोन नंबर भी लिखा जाना जरूरी है।

बच्चों की दी जानी चाहिए इमरजेंसी द्वार से निकलने की ट्रेनिंग
सभी स्कूल बसों में दाहिने हाथ की तरफ बस के पिछले भाग में एक आपातकालीन दरवाजा होगा। इसके अलावा, एक आपातकालीन निकास बस के पीछे की तरफ होगा। आपातकालीन द्वार का निचला किनारा बस के तल के स्तर पर होगा और ऊपरी छोर खिड़की के ऊपरी किनारे के स्तर पर होगा। जब भी बस का यात्री द्वार या आपातकालीन द्वार या पीछे आपातकालीन निकास खुलता है तो बस रुक जानी चाहिए। आपातकालीन दरवाजे को सामान्य स्थिति में बंद रखा जाएगा और इन दरवाजों को संचालित करने के लिए बच्चों को भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

राज्यस्तरीय अंतर विभागीय कमेटी
स्कूली बच्चों की यात्रा को ओर सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से, हाईकोर्ट द्वारा 29 सितंबर 2012 को जारी निर्देश में एक राज्यस्तरीय अंतर विभागीय कमेटी का गठन करने को कहा था। दरअसल हाईकोर्ट ने पाया था कि स्कूली बसों के आवागमन को लेकर ट्रांसपोर्ट विभाग या पुलिस प्रशासन द्वारा कोई विशेष सेट या विभाग नहीं बनाया गया है। सरकार ने सचिव (शिक्षा) के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया, जिसमें पुलिस, ट्रांसपोर्ट, लोकल बाडी विभागों के अधिकारियों को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। इस कमेटी को यह अधिकार दिए गए थे कि वह स्कूली बसों के लिए निर्धारित मापदंड को लागू कराए।

इसके अलावा एसडीएम के नेतृत्व में जिला स्तरीय कमेटियों का गठन भी किया गया, जिसमें जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, एसपी ट्रैफिक, कार्यकारी अधिकारी (म्युनिसिपल कारपोरेशन या म्युनिसिपल कमेटी) और असिस्टेंट मैकेनिकल इंजीनियर (पंजाब रोडवेज) को सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही, संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल, हेडमास्टर, हेड मिस्ट्रेस को लेकर एक स्कूली अथारिटी के गठन किया गया, जिसे बसों में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को यकीनी बनाने के उपायों पर नजर रखने की जिम्मेदारी थी।
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