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देवीलाल के बारे में ये बात भी जानिए
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)
Updated Tue, 23 Sep 2014 02:30 PM IST
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देवीलाल का सरल स्वभाव ही उनकी ताकत थी। राजनीति का उनका अपना ही एक अनोखा अंदाज था। चुनाव के समय टिकट के चाहने वालों से सवाल पूछा करते थे। सवालों का उचित जवाब देने वाले को टिकट दी जाती थी।
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इसके साथ देवी लाल पहले चुनाव प्रचार घोड़ों या ऊंट से किया करते थे। इसके बाद उन्होंने प्रचार के लिए एक जीप खरीदी। जिसका नंबर 501 था।
टिकट वितरण के मामले में देवीलाल की अपनी ही शैली थी। टिकट के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार का इंटरव्यू वे खुद लेते थे। उनके सवाल होते थे कि हलके में गांव कितने हैं? कितने शहर आते हैं?, हलके में वोटरों की संख्या क्या है? इसमें महिला, पुरुषों की संख्या क्या है? हलके की मुख्य समस्या क्या है?
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इन सब सवालों का जवाब बेशक टिकट के चाहने वाले दे देते लेकिन वे देवीलाल के आखिरी सवाल पर अटक जाते। देवीलाल का आखिरी सवाल होता कि राजनीति में आने की उनकी मंशा क्या है?
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रवि चौटाला ने बताया कि उनके दादा देवीलाल गर्मियों में चार बजे उठते थे। करीब तीन से चार किलोमीटर सैर करते थे। सर्दियों में सुबह 5 बजे उठकर सैर पर निकल जाते थे। पगड़ी उनकी शान थी। वे खुद पगड़ी बांधते थे।
बाद में लोगों के बीच आ जाते थे। सबसे पहले वे पंचायत की समस्या सुलझाते थे। बाद में निजी कार्यों के लिए आने वाले लोगों की बात सुनते थे। मुख्यमंत्री या उपप्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने कभी अपनी दिनचर्या नहीं बदली थी।