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Hindi News ›   Chandigarh ›   Know Everything About Punjab Congress Dispute  Captain Amarinder Singh and Navjot Sidhu 

पंजाब का संकट: अपनी ही सरकार से लड़ रहे सिद्धू क्या आखिरी बॉल पर होंगे क्लीन बोल्ड, जानें क्या है कैप्टन-सिद्धू विवाद

Fri, 16 Jul 2021 10:18 AM IST
Nivedita verma निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 16 Jul 2021 10:18 AM IST
सार

2014 से पूरे देश में शुरू हुई मोदी लहर के बीच 2017 में पंजाब ने कांग्रेस को चुना। पूरे देश में अस्तित्व की जंग लड़ रही कांग्रेस के लिए सरहदी सूबे से जो राहत की खबर आई, उसके सिरमौर कैप्टन अमरिंदर सिंह बने। 'चाउंदा है पंजाब, कैप्टन दी सरकार' नारे ने 'हर हर मोदी घर घर मोदी' के नारे को ध्वस्त किया और तत्कालीन सत्ताधारी शिअद-भाजपा को घुटने टेकने पर मजूबर कर दिया।

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Know Everything About Punjab Congress Dispute  Captain Amarinder Singh and Navjot Sidhu 
कैप्टन-सिद्धू तकरार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

2015 के बेअदबी प्रकरण और कोटकपूरा गोलीकांड ने पंजाब में अकालियों की हार की पृष्ठभूमि तैयार कर दी थी, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आरोपियों को सजा दिलाने के अपने वादे से उस पर जीत की बुलंद इमारत खड़ी कर दी। इसके अलावा नशे की समस्या से जूझ रहे पंजाबियों को कैप्टन ने नशा मुक्त पंजाब बनाने का सपना दिखाया। इसके लिए कसम तक उठा ली। कांग्रेस सत्ता में आई और वादे के अनुसार कोटकपूरा गोलीकांड की जांच तेजी से शुरू हो गई। लेकिन साथ ही पार्टी में अंदरूनी दिक्कतें भी शुरू हो गई।
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पार्टी की जीत के साथ ही विवाद भी हुए शुरू
आज पंजाब कांग्रेस जिस समस्या से जूझ रही है, उसकी शुरुआत 2017 चुनाव में पार्टी की जीत के साथ ही हुई थी। दरअसल नवजोत सिंह सिद्धू 2017 चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। बेबाक अंदाज वाले सिद्धू राहुल और प्रियंका वाड्रा की पसंद थे। पार्टी जीती तो सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चाएं तेज हो गई। लेकिन जब कैप्टन सीएम बने तो उन्होंने साफ कर दिया कि पंजाब को डिप्टी सीएम की जरूरत नहीं है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि अति महत्वाकांक्षी सिद्धू के लिए ये पहला झटका था और कैप्टन सिद्धू विवाद की शुरुआत यहीं से हो गई थी। 
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जब सिद्धू ने कहा-मेरे कैप्टन राहुल गांधी हैं
दूसरी बार अगस्त 2018 में विवाद उठा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बने तो उन्होंने अपने यार सिद्धू को शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया। कैप्टन सिद्धू के पाकिस्तान जाने के खिलाफ थे। इसके बावजूद सिद्धू पाकिस्तान गए और वहां पाक सेना प्रमुख कमर बाजवा के गले मिले। इसके बाद पूरे देश में उनकी आलोचना हुई। कैप्टन ने कहा कि सिद्धू को अभी समझ नहीं है। बवाल बढ़ा तो सिद्धू ने मामले पर सफाई दी। इसके बाद नवंबर 2018 में सिद्धू ने कहा कि 'कौन कैप्टन', कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ही उनके कैप्टन हैं और अमरिंदर सिंह तो सेना के कैप्टन रहे हैं। 
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पत्नी को टिकट न मिलने पर नाराज हुए थे सिद्धू
तीसरी बार 2019 के लोकसभा चुनाव में विवाद खड़ा हुआ। इस विवाद की जड़ बनी पटियाला संसदीय सीट। टिकट न मिलने पर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने कैप्टन के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई। सिद्धू ने भी इसका समर्थन किया। इसके बाद नाराज हुए अमरिंदर ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद सिद्धू की ख्वाहिश मुख्यमंत्री बनने की है। 

सक्रिय राजनीति से हुए दूर
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पंजाब में आठ ही सीटें जीती। हार का ठीकरा सिद्धू के सिर पर फोड़ा गया। लोकसभा चुनाव के बाद कैप्टन ने मंत्रीमंडल की बैठक ली। हार के जिम्मेदार बताए जाने से आहत सिद्धू उसमें नहीं आए। नाराज कैप्टन ने उनसे स्थानीय निकाय विभाग छीन लिया और उन्हें बिजली मंत्री बना दिया। भड़के सिद्धू ने जुलाई 2019 में मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया और लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।  

हाईकोर्ट के एक फैसले से आ गया पंजाब कांग्रेस में भूचाल
अपने वनवास के दौरान उन्होंने ‘जीतेगा पंजाब’ यूट्यूब चैनल खोला जिसमें वह पंजाब से जुड़े मुद्दे उठाने लगे। पिछले साल शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद सिद्धू सक्रिय राजनीति में लौटे। इसके बाद अप्रैल में हाईकोर्ट ने 2015 में बेअदबी घटना का विरोध कर रहे लोगों पर कोटकपूरा में फायरिंग मामले की जांच कर रही एसआईटी को रद्द कर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इसी फैसले ने पंजाब कांग्रेस में कलह की नींव रख दी। हाशिये पर गए सिद्धू को कैप्टन का घेराव करने का मौका मिल गया। जोर शोर से कैप्टन के खिलाफ उतरे सिद्धू ने उन्हें अयोग्य गृहमंत्री तक कह डाला। इससे नाराज कैप्टन ने उन्हें पटियाला से चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी। लेकिन इस बार मामला पेचीदा हो गया क्योंकि सिद्धू के साथ कई मंत्री और विधायक भी कैप्टन के खिलाफ खड़े हो गए।


कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तो मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ही मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा थमा दिया था। वहीं कैप्टन के खिलाफ आवाज उठाने वाले विधायक परगट सिंह और चरणजीत चन्नी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो मामला और भड़क गया। बगावत के सुर आलाकमान तक पहुंचे और अब पिछले डेढ़ माह से पार्टी की कलह को खत्म करने के एजेंडे पर लगातार काम किया जा रहा है। अब देखना ये होगा कि आलाकमान अनुभवी अमरिंदर सिंह की मानते हैं या बेबाक नवजोत सिद्धू की। फैसला चाहे जो भी हो, कैप्टन को नजरंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। 
 
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