चंडीगढ़ में डेंगू के 7 केस आए सामने, ये हैं लक्षण और बचाव के उपाय, ध्यान रखेंगे तो फायदे में रहेंगे
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बारिश के बाद शुरू हुई उमस से चंडीगढ़ में डेंगू की एंट्री हो गई है। डेंगू के अब तक सात पाजीटिव केस सामने आ चुके हैं। जानकारों का कहना है कि यह मौसम डेंगू के मच्छरों के लिए बेहद अनुकूल है। जिस तरह से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ी है, उससे इस बात की पूरी आशंका है कि आने वाले समय में डेंगू का प्रकोप और बढ़ेगा। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इससे निपटने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
वहीं, जो लोग लापरवाही बरत रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक करीब 1100 मकान मालिकों को नोटिस दिया जा चुका है। 20 से ज्यादा गवर्नमेंट संस्थानों को भी कारण बताओ नोटिस थमाया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डेंगू को रोकने में लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है। बिना लोगों के जागरूक हुए डेंगू को नहीं रोका जा सकता। पिछले साल 2018 में जुलाई तक कुल दस केस आए थे।
डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर को पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं है। गर्म से गर्म माहौल में भी यह मच्छर जिंदा रह सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि एडीज मच्छरों के अंडे 12 से 18 महीने तक गर्म और सूखे की स्थिति में भी जिंदा रहते हैं।
यह आंखों से दिखते भी नहीं हैं इसलिए इन्हें मार पाना आसान नहीं है। जैसे ही पानी मिलता है यह अंडा लार्वा में बदल जाता है और फिर अडल्ट मच्छर बन जाता है। इसके बाद लोग मच्छरों से बचाव ढूंढने लगते हैं। अभी इसके अंडे और लार्वा को खत्म करने का सबसे सही वक्त है।
सामान्य डेंगू बुखार के लक्षण
एडीज इजिप्टी मच्छर के काटे जाने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है, बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना, गले में हल्का-सा दर्द होना, शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना साधारण डेंगू बुखार के लक्षण हैं।
जरूरी जानकारी ही बचाव
घरों के आसपास पानी जमा न होने दें।
मच्छर अक्सर घरों में पैदा होते हैं। फ्रिज से जो पानी निकलता है, उसमें भी लार्वा बनते हैं।
बोतल के छोटे से ढक्कन में पानी होने पर भी लार्वा बन सकता है।
कूलर में इसके पनपने का ज्यादा खतरा रहता हैं। इसलिए हर हफ्ते कूलर का पानी बदलें।
कूलर का पानी निकालने के बाद उसे सूखने दें। फिर उस पर पानी भरें।
जहां पर पानी रहता है, वहां पर एक बार केरोसिन तेल जरूर डाल दें।
विंडो एसी के बाहर वाले हिस्से के नीचे पानी टपकने से रोकने के लिए लगी ट्रे को रोज खाली करना न भूलें।
गमले चाहे घर के भीतर हों या बाहर, इनमें पानी जमा न होने दें। गमलों के नीचे रखी ट्रे भी खाली करना न भूलें।
छत पर टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें या उलटा करके रखें। पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करके साफ करने के बाद पानी भरें।
घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छर नाशक दवाई का छिड़काव जरूर करें।