कौन बनेगा सीएम: पंजाब में मुख्यमंत्री पद की रेस में ये दो बड़े चेहरे, क्या हिंदू नेता पर दांव खेलेगी कांग्रेस
सुनील जाखड़ 2002 में पहली बार अबोहर शहर के विधायक बने थे। अबोहर से लगातार तीन बार विधायक रहे जाखड़ 2012 से 2017 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।
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पंजाब कांग्रेस में कई महीनों से मचा घमासान कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे तक जा पहुंचा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब पंजाब में कांग्रेस के दो बड़े चेहरे मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं। अगर कैप्टन के ही हिंदू चेहरे के फॉर्मूले पर कांग्रेस काम करेगी तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ को पंजाब का नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। वहीं अगर कांग्रेस ने सिख चेहरे को प्राथमिकता दी तो नवजोत सिंह सिद्धू का नाम सबसे आगे है। इस सबके बीच पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने की चर्चा चल रही है।
सुनील जाखड़ का नाम सबसे आगे
पंजाब के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे सुनील जाखड़ कांग्रेस में एक प्रमुख हिंदू नेता हैं। जाखड़ मूलरूप से अबोहर के गांव पंजकोसी के रहने वाले हैं। उनके पिता बलराम कुमार जाखड़ कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शामिल थे। उनका परिवार शुरू से ही कांग्रेस के साथ रहा है। जाखड़ 2002 में पहली बार अबोहर शहर के विधायक बने थे। अबोहर से लगातार तीन बार विधायक रहे जाखड़ 2012 से 2017 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। वे कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एमबीए हैं।
सुनील जाखड़ ने भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माने जाने वाली गुरदासपुर लोकसभा सीट से 2017 में बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। गुरदासपुर से भारतीय जनता पार्टी के विनोद खन्ना लगातार 4 बार सांसद चुने गए थे। अप्रैल 2017 को विनोद खन्ना के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए थे जिसमें सुनील जाखड़ को जीत मिली थी। उन्होंने भाजपा के स्वर्ण सलारिया को हराया था। हालांकि इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में अभिनेता सनी देओल ने सुनील जाखड़ को शिकस्त दी। जाखड़ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं।
सिद्धू का भी नाम सीएम पद की रेस में
नवजोत सिंह सिद्धू का नाम भी सीएम पद की रेस में है। सिद्धू खेमे के विधायक और मंत्री कई बार उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर चुके हैं। कैप्टन से मतभेद के बाद कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपनी की बात कही थी लेकिन सिद्धू ने कैप्टन के साथ काम करने से मना कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी।