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इंडियन नेवी का वो ऑपरेशन, जिसके बाद 7 दिनों तक सुलगता रहा कराची बंदरगाह...अब हुआ खुलासा

Sun, 09 Dec 2018 12:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 09 Dec 2018 12:19 PM IST
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Know about Operation Trident of Indian Navy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में पाक को मुंह की खानी पड़ी थी। इस युद्ध में भारतीय नेवी ने एक ऐसा ऑपरेशन किया था, जिसकी वजह से कराची बंदरगाह सात दिनों तक सुलगता रहा। जान लीजिए कैसे हुआ था ये खतरनाक ऑपरेशन...

Know about Operation Trident of Indian Navy
मेजर जनरल आरके कौशल

इन दिनों चंडीगढ़ में मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट चल रहा। हमारे देश के जबांज सैनिक युद्ध से जुड़ी तमाम यादें साझा कर रहे हैं। इन्हीं में से एक याद ऑपरेशन ट्राइडेंट से जुड़ी है।इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था भारतीय नेवी ने। इस अटैक ने पाकिस्तान की चूल्हें हिला दी थी। इस ऑपरेशन के बारे में फेस्ट में युवाओं को भी रोचक ढंग से अवगत करवाया गया।

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चंडीगढ़ में मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट

ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान का कराची बंदरगाह सात दिन तक सुलगता रहा था। ये ऑपरेशन गुरुग्राम के कमांडर बबरूभान यादव के नेतृत्व में किया गया था। युद्ध वार्ताकार मेजर जनरल आरके कौशल ने बताया कि सन 1971 का जब युद्ध शुरू हो गया था, तो एडमिरल एसएम नंदा ने भी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समक्ष पाकिस्तान के खिलाफ नेवी की ओर से भी ऑपरेशन करने का प्रस्ताव रखा था।

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मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट

प्रधानमंत्री इंदिरा ने तुरंत एडमिरल नंदा का प्रस्ताव स्वीकार करते हुए एक्शन लेने को कहा। उधर, पाकिस्तान पंजाब व राजस्थान बॉर्डर पर भारत से युद्ध लड़ रहा था, उसे कतई अंदाजा नहीं था कि भारतीय थल सेना के साथ-साथ जल सेना भी कुछ ऐसा कर जाएगी, जिसका जख्म बहुत गहरा होगा। यही हुआ, एडमिरल नंदा ने कराची बंदरगाह को उड़ाने की योजना तैयार की। उस वक्त भारत ने रूस से मिसाइल नावें ली थी। एडमिरल नंदा चाहते थे कि इन मिसाइल नावों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किया जाए।

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चंडीगढ़ में मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट

मेजर जनरल आरके कौशल ने बताया कि इन मिसाइल नावों को कराची बंदरगाह की रेंज तक पहुंचाना बड़ी चुनौती था, इसलिए एक बड़े जहाज के पीछे इन तीनों मिसाइल नावों को बांधा गया और उसे टारगेट रेंज तक पहुंचाया गया। जहाज, तीनों मिसाइल नावों को वहीं छोड़ वापस लौट आया और उसके बाद इन नावों ने कराची बंदरगाह पर मिसाइलें दाग दी। कराची बंदरगाह पर इतना नुकसान हुआ कि सात दिनों तक कराची बंदरगाह पर धुआं सुलगता रहा।

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